ईरान युद्ध के बीच फंसे भारतीय मछुआरों को निकालने में आर्मेनिया ने भारत की मदद की है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आर्मेनियाई समकक्ष का धन्यवाद किया, जबकि रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के बीच फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी के प्रयासों में एक नया और अहम मोड़ आया है। इस संकट की घड़ी में एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश आर्मेनिया भारत के लिए मददगार बनकर सामने आया है।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आर्मेनिया के विदेश मंत्री अरारात मिर्जोयान और वहां की सरकार का सार्वजनिक रूप से आभार जताया है। उन्होंने बताया कि आर्मेनिया ने ईरान में फंसे भारतीय मछुआरों को सुरक्षित निकालकर अपने रास्ते से भारत पहुंचाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान में जारी संघर्ष के कारण सैकड़ों भारतीय नागरिक, खासकर मछुआरे, गंभीर संकट में फंसे हुए हैं। भारत सरकार लगातार उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए प्रयासरत है और इस दिशा में कई देशों के साथ समन्वय कर रही है।
तमिलनाडु के मछुआरे सबसे ज्यादा प्रभावित
मिली जानकारी के अनुसार, ईरान में फंसे भारतीयों में बड़ी संख्या तमिलनाडु के मछुआरों की है। आंकड़ों के मुताबिक, 600 से अधिक मछुआरे अब भी वहां फंसे हुए हैं। इनमें अधिकतर कन्याकुमारी से हैं, जबकि कुछ थूथुकुडी, तिरुनेलवेली और रामनाथपुरम जिलों से संबंध रखते हैं।
भारत सरकार ने इन मछुआरों के परिवारों को आश्वस्त किया है कि सभी को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाया जाएगा। विदेश मंत्रालय लगातार ईरान सरकार के संपर्क में बना हुआ है और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
अब तक 1000 से ज्यादा भारतीयों की वापसी
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 1,043 भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें 717 छात्र भी शामिल हैं। हालांकि, अभी भी कई लोग वहां फंसे हुए हैं और उन्हें निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
इस पूरे अभियान में आर्मेनिया की भूमिका बेहद अहम रही है, जिसने अपने क्षेत्र का उपयोग कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में सहयोग दिया।
मछुआरा संगठनों ने जताई चिंता
इस बीच, दक्षिण एशियाई मछुआरा संगठन के महासचिव जॉन चर्चिल ने इस स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मछुआरों के मुद्दे को लेकर पर्याप्त गंभीर नहीं है।
उन्होंने कहा कि कन्याकुमारी के करीब 450 मछुआरे अभी भी ईरान में फंसे हुए हैं, जिनमें से कई समुद्र में नावों पर ही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी प्रकार का हमला होता है, तो उनके पास बचने या भागने का कोई रास्ता नहीं होगा।
वैश्विक संकट में सहयोग की मिसाल
ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। ऐसे में भारत द्वारा अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि, इस संकट के बीच आर्मेनिया जैसे देश का सहयोग वैश्विक साझेदारी और मानवीय दृष्टिकोण की एक मिसाल बनकर सामने आया है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि भारत इस सहयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है और भविष्य में भी ऐसे सहयोग की उम्मीद करता है।
आगे की राह
फिलहाल, भारत सरकार का पूरा ध्यान शेष फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालने पर है। लगातार बदलते हालात के बीच यह रेस्क्यू ऑपरेशन और भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
परिवारों की नजरें सरकार पर टिकी हैं…
और हर गुजरता दिन… चिंता को और बढ़ा रहा है।
अब देखना होगा…
क्या सभी भारतीय सुरक्षित वापस लौट पाएंगे?
और क्या यह वैश्विक सहयोग इस संकट को आसान बना पाएगा?
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