उत्तर प्रदेश के झांसी में ‘डेयरी कॉन्क्लेव-स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डेयरी उद्योग को प्रदेश की वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का अहम आधार बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और महिलाओं व युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया। इस दौरान झांसी, चित्रकूटधाम और कानपुर मंडल में डेयरी क्षेत्र के लिए सरकारी सहायता और निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े भी सामने आए।
उत्तर प्रदेश में डेयरी सेक्टर को सिर्फ दूध उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उसे प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, कोल्ड चेन और बड़े निवेश से जोड़ने की तैयारी तेज होती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को झांसी के दीन दयाल ऑडिटोरियम में ‘डेयरी कॉन्क्लेव-स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’ कार्यशाला का आयोजन किया गया।
दुग्ध विकास विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में उन्नत और स्वस्थ गोवंश को बढ़ावा देना, नंद बाबा दुग्ध मिशन तथा दुग्ध प्रोत्साहन नीति-2022 का प्रचार-प्रसार करना और डेयरी सेक्टर में निजी पूंजी निवेश को आकर्षित करना रहा। मेरठ, आगरा और बरेली में सफल आयोजनों के बाद यह मंडलवार कॉन्क्लेव श्रृंखला का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव था।

कार्यक्रम में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि झांसी, चित्रकूटधाम और कानपुर मंडल कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं वाले क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में डेयरी विकास को आगे बढ़ाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि इसके साथ दुग्ध प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, कोल्ड चेन और डेयरी उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है।
सरकार की कोशिश है कि इसका सीधा फायदा किसानों तक पहुंचे, उनकी आय में वृद्धि हो और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
धर्मपाल सिंह ने विश्वास जताया कि झांसी, चित्रकूटधाम और कानपुर मंडल आने वाले समय में प्रदेश के प्रमुख डेयरी हब बन सकते हैं और उत्तर प्रदेश के वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने ‘स्वदेशी उन्नत गोवंश, समृद्ध निवेश, सुरक्षित भविष्य एवं खुशहाल उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को जन आंदोलन बनाने का आह्वान भी किया।

दुग्ध आयुक्त श्रीमती धनलक्ष्मी के. ने कहा कि उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। राज्य सरकार की ओर से किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और स्थायी आय उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि नंद बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 के जरिए गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन, आधुनिक डेयरी विकास तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दूध और दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत अब तक झांसी, चित्रकूटधाम और कानपुर मंडल में लगभग 1200 लाभार्थियों को DBT के माध्यम से 1100 लाख रुपये से अधिक की अनुदान राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
वहीं दुग्ध नीति के अंतर्गत इन तीनों मंडलों में विभिन्न परियोजनाओं के लिए अब तक 1350 लाख रुपये की अनुदान राशि अवमुक्त की गई है।

सबसे बड़ा संकेत निवेश को लेकर सामने आया। दुग्ध विकास विभाग को अब तक कुल 28 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें झांसी, चित्रकूटधाम और कानपुर मंडल के कुल 190 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं।
इनमें झांसी मंडल के 15 करोड़ रुपये, चित्रकूटधाम मंडल के 4 करोड़ रुपये और कानपुर मंडल के 171 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं।
कॉन्क्लेव में नंद बाबा दुग्ध मिशन के विभिन्न लाभार्थियों ने अपनी सफलता की कहानियां भी साझा कीं। इसके अलावा वेटनरी कॉलेज, आरएलबीसीयू झांसी, बांदा कृषि विश्वविद्यालय और कान्हा गौशाला सहित विभिन्न संस्थानों के विषय विशेषज्ञों ने डेयरी, पशुपालन और गोवंश से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम में लगाए गए विभिन्न स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे। विभागीय स्टॉल के साथ पराग, बलिनी, सामर्थ्य, स्टेलर इंडिया, अप्रा डेयरी, नमस्ते इंडिया, भोले बाबा और इंडियन बैंक समेत विभिन्न निजी एवं सहकारी संस्थाओं ने अपने उत्पादों, तकनीकों और सेवाओं का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम स्थल पर विशेष काउंटर के माध्यम से विभिन्न जनपदों की 22 प्रारम्भिक बहुउद्देशीय दुग्ध सहकारी समितियों के निबंधन के बाद उनके प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
आयोजन को सफल बनाने में विभाग की ओर से श्री अरविन्द कुमार सिंह, वित्त नियंत्रक; श्री ए.पी. सिंह, मुख्य दुग्धशाला विकास अधिकारी; श्री इन्द्रभूषण सिंह, श्री आशीष कुमार श्रीवास्तव, श्री राजेश कुमार, श्री बी.पी. सिंह, श्री नत्थू सिंह और श्री अखिलेन्द्र मिश्रा, दुग्धशाला विकास अधिकारियों, के साथ श्री विकास बालियान, श्री संतोष दिवाकर, डॉ. सत्येन्द्र सिंह और श्री सतीश कुमार सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कुल मिलाकर झांसी का यह डेयरी कॉन्क्लेव केवल सरकारी योजनाओं के प्रचार तक सीमित नहीं रहा। इसके जरिए सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की कि उत्तर प्रदेश में डेयरी सेक्टर को अब उत्पादन से आगे बढ़ाकर निवेश, तकनीक, प्रसंस्करण और रोजगार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में इन प्रयासों का वास्तविक असर किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार और डेयरी उद्योग में नए निवेश के रूप में कितना दिखाई देता है, यह देखने वाली बात होगी।
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