रामलीला मैदान के पास चल रहा था कथित ‘नकली नोट कारखाना’, एक असली के बदले तीन नकली का सौदा; रेलवे स्टेशन के आसपास करेंसी खपाने की तैयारी का पुलिस का दावा
बाहर से देखने पर कमरा बिल्कुल सामान्य था। किराए का कमरा, रोजमर्रा का सामान और अंदर रखा एक प्रिंटर। लेकिन पुलिस के मुताबिक इसी कमरे के भीतर कागज पर स्याही नहीं, बल्कि कथित तौर पर नकली नोट तैयार किए जा रहे थे। प्रिंटर में पेपर डाला जाता और कुछ देर बाद तैयार होकर निकलते थे ऐसे नोट, जिन्हें बाजार में चलाने की तैयारी थी। पुलिस का दावा है कि इन नकली नोटों को खास तौर पर रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के बाजारों में खपाने की योजना थी।
कानपुर में रेल बाजार थाना पुलिस ने ऐसे ही कथित नकली करेंसी नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से कुल 2 लाख 4 हजार 650 रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं। बरामद नोटों में 100, 50 और 500 रुपये के नकली नोट शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस को मौके से नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला प्रिंटर, पेपर, इंक और अन्य सामान भी मिला है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का कथित मास्टरमाइंड 52 वर्षीय शेर सिंह है, जो पांचवीं कक्षा तक पढ़ा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोटों का यह खेल कितने समय से चल रहा था और तैयार नोट आखिर किन-किन लोगों तक पहुंचते थे।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर मुख्यालय संकल्प शर्मा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि रेल बाजार थाना क्षेत्र में रामलीला मैदान के पास एक कमरा किराए पर लिया गया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि इस स्थान पर नकली नोट तैयार किए जा रहे हैं। सूचना के आधार पर टीम ने बताए गए ठिकाने पर छापा मारा।
कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को नकली नोटों की खेप मिली। इसके साथ ही नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला सामान भी बरामद किया गया। मौके से बांगरमऊ, उन्नाव के रघुवर खेड़ा निवासी शेर सिंह (52), रोशन अली (24) और जालौन के उरई थाना क्षेत्र के गड़र बिनौर निवासी सोमिल गुप्ता (36) को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक शेर सिंह वर्तमान में कानपुर के चकेरी इलाके में संजू पुलिया के पास किराए के कमरे में रह रहा था।
एक असली के बदले तीन नकली का सौदा
पुलिस की पूछताछ में कथित गिरोह के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी नकली नोटों का सौदा ‘एक के बदले तीन’ के हिसाब से करते थे।
यानी कोई व्यक्ति जितनी रकम देता था, उसके बदले उसे कथित तौर पर तीन गुना कीमत के नकली नोट दिए जाते थे। पुलिस के मुताबिक गिरोह कम मूल्य वाले नोटों को बाजार में आसानी से खपाने की कोशिश करता था।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों के निशाने पर रेलवे स्टेशन के आसपास की छोटी दुकानें रहती थीं। स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों और आसपास के बाजारों में भी नकली नोट चलाने की कोशिश किए जाने की बात पुलिस ने कही है।
हालांकि, अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि वास्तव में कितनी नकली करेंसी बाजार तक पहुंची और इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए थे।

पुलिस के मुताबिक छापेमारी में बरामद नकली करेंसी में सबसे ज्यादा 100 रुपये के नोट मिले हैं।
बरामदगी का पूरा ब्योरा इस प्रकार है—
- 100 रुपये के 1,991 नकली नोट
- 50 रुपये के 71 नकली नोट
- 500 रुपये के 4 नकली नोट
इन सभी नकली नोटों की कुल कीमत 2,04,650 रुपये बताई गई है।
नकली करेंसी के अलावा पुलिस ने एक प्रिंटर, कैंची, दो पेपर कटर, दो स्केल, चार खाली और पांच भरी हुई इंक की बोतल/डिब्बियां, एक रिम पेपर, कपड़े, ट्रॉली बैग और अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं।
कमरे में मिला पूरा ‘सेटअप’, अब नेटवर्क की तलाश
पुलिस को जिस तरह प्रिंटर, पेपर, इंक और अन्य सामान मिला है, उससे जांच का दायरा अब केवल बरामद नकली नोटों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर नकली नोट तैयार करने का काम कितने समय से चल रहा था।
साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि शेर सिंह अकेले नकली नोट तैयार करता था या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति तकनीकी तौर पर जुड़ा था। पुलिस उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जो तैयार नकली नोटों को बाजार में खपाने का काम करते थे।
तीनों आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मुकदमे
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। सोमिल गुप्ता पर पांच, रोशन अली पर सात और शेर सिंह पर चार आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।
पुलिस अब इन पुराने मामलों की जानकारी जुटाने के साथ आरोपियों के पुराने संपर्कों और गतिविधियों को भी खंगाल रही है। जांच एजेंसियों को यह भी आशंका है कि नकली नोटों का नेटवर्क केवल कानपुर तक सीमित नहीं रहा होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल—कहां तक पहुंच चुके हैं नकली नोट?
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी और नकली नोटों की बरामदगी के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब तक कितनी नकली करेंसी तैयार की जा चुकी है और उसमें से कितनी बाजार में पहुंच चुकी है।
पुलिस कानपुर सेंट्रल के अलावा आसपास के रेलवे स्टेशनों और उनसे जुड़े बाजारों में भी आरोपियों के संपर्क तलाश रही है। इसके साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली नोट तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाला विशेष पेपर, इंक और अन्य सामग्री आरोपियों को कहां से मिलती थी।
फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। अब जांच कमरे में मिले प्रिंटर और नकली नोटों से आगे बढ़कर उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में है, जहां कथित तौर पर तैयार करेंसी को बाजार में उतारा जाता था।
कानपुर पुलिस की यह कार्रवाई एक बार फिर यह सवाल सामने लाती है कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ जालसाज भी अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में बाजार में नकली नोटों की पहचान और संदिग्ध लेन-देन को लेकर लोगों को भी अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।
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