Tuesday, July 07, 2026

कैबिनेट का बड़ा फैसला: अब बाजार से जुटेगा विकास का पैसा, गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगम जारी करेंगे करोड़ों के म्युनिसिपल बॉण्ड

योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी, गोरखपुर 80 करोड़ और मुरादाबाद 50 करोड़ रुपये के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करेगा; अमृत 2.0 के तहत शहरी विकास परियोजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार, केंद्र सरकार भी देगी प्रोत्साहन राशि।

New Delhi , Latest Updated On - Jul 07 2026 | 11:42:00 AM
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उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निगमों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। योगी कैबिनेट ने गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगम को क्रमशः 80 करोड़ और 50 करोड़ रुपये के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने की मंजूरी दे दी है। इससे दोनों शहरों में आधारभूत ढांचे के विकास के लिए बाजार से वित्त जुटाया जाएगा।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी विकास और नगर निकायों को आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में गोरखपुर नगर निगम और मुरादाबाद नगर निगम को म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने की मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के तहत गोरखपुर नगर निगम 80 करोड़ रुपये और मुरादाबाद नगर निगम 50 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी कर सकेंगे। इसके साथ ही दोनों नगर निगमों की क्रेडिट रेटिंग मजबूत करने के लिए अवस्थापना विकास निधि (Infrastructure Development Fund) से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया है।

यह फैसला केवल दो नगर निगमों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे प्रदेश के शहरी निकायों को पारंपरिक सरकारी अनुदानों से आगे बढ़ाकर वित्तीय रूप से सक्षम और निवेश आकर्षित करने योग्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

क्या होता है म्युनिसिपल बॉण्ड और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

म्युनिसिपल बॉण्ड एक ऐसा वित्तीय साधन है, जिसके माध्यम से नगर निकाय पूंजी बाजार से धन जुटाते हैं। इस धन का उपयोग सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, पार्क, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य शहरी अवसंरचना परियोजनाओं के विकास में किया जाता है।

अब तक अधिकांश नगर निकाय विकास कार्यों के लिए राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं या अनुदानों पर निर्भर रहते थे, लेकिन म्युनिसिपल बॉण्ड उन्हें वित्त जुटाने का एक स्वतंत्र और दीर्घकालिक विकल्प उपलब्ध कराते हैं।


कैबिनेट बैठक में मिली औपचारिक मंजूरी

कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि राज्य सरकार नगर निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और नागरिक सुविधाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए नगर निगमों के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। ऐसे में वित्तीय प्रबंधन को आधुनिक बनाने, बाजार आधारित संसाधन जुटाने और नगर निकायों की क्रेडिट वर्थनेस बढ़ाने की दिशा में यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

गोरखपुर और मुरादाबाद ने पूरी की आवश्यक तैयारी

वित्त मंत्री ने बताया कि गोरखपुर नगर निगम ने 80 करोड़ रुपये और मुरादाबाद नगर निगम ने 50 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने का प्रस्ताव पहले ही नगर निगम सदन से पारित करा लिया है।

दोनों नगर निगमों ने उन विकास परियोजनाओं का भी चयन कर लिया है, जिनके लिए इस धन का उपयोग किया जाएगा। इससे परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से वित्त उपलब्ध होगा और विकास कार्यों में तेजी आएगी।

केंद्र सरकार भी करेगी आर्थिक सहयोग

इस योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने वाले नगर निकायों को भारत सरकार भी आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करेगी।

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार—

  • 100 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉण्ड निर्गम पर 13 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा।
  • 200 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर अधिकतम 26 करोड़ रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

इससे नगर निकायों पर वित्तीय दबाव कम होगा और उन्हें बाजार से संसाधन जुटाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।


सेबी के नियमों का होगा पालन

म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह नियामकीय व्यवस्था के अंतर्गत होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी नगर निगम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा निर्धारित सभी नियमों और मानकों का पालन करेंगे।

इसके लिए नगर निगमों को पारदर्शी लेखा प्रणाली, वित्तीय अनुशासन, नियमित ऑडिट और निवेशकों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।

अमृत 2.0 मिशन के लक्ष्य को मिलेगा बल

यह निर्णय केंद्र सरकार की अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) योजना के उद्देश्यों के अनुरूप भी है।

अमृत 2.0 के तहत राज्यों को नगर निकायों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने, राजस्व स्रोत विकसित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

राज्य सरकार ने भी इसे अपने शहरी सुधार कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में प्रदेश के अन्य नगर निगम भी म्युनिसिपल बॉण्ड के माध्यम से वित्त जुटाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

शहरों में विकास परियोजनाओं को मिलेगी नई गति

गोरखपुर और मुरादाबाद दोनों तेजी से विकसित हो रहे शहर हैं। जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ बेहतर सड़कें, आधुनिक जल निकासी प्रणाली, पेयजल, हरित क्षेत्र, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग और अन्य नागरिक सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।


म्युनिसिपल बॉण्ड से जुटाई गई राशि इन आधारभूत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे न केवल शहरी जीवन स्तर बेहतर होगा, बल्कि निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उत्तर प्रदेश के नगर निकायों के लिए एक नई वित्तीय सोच की शुरुआत है।

यदि नगर निगम अपने वित्तीय प्रबंधन को मजबूत रखते हैं और समय पर परियोजनाएं पूरी करते हैं, तो भविष्य में निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित किया जा सकेगा।

सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—नगर निकाय केवल सरकारी सहायता पर निर्भर न रहें, बल्कि अपनी वित्तीय क्षमता विकसित करते हुए स्वयं विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में सक्षम बनें।

गोरखपुर और मुरादाबाद से शुरू हुई यह पहल आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मॉडल को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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