कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क की सतह धंसने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए टोल वसूली पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही, परियोजना से जुड़े अधिकारियों और निर्माण कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर किमी-64 के पास सड़क की सतह में आई स्लिपेज (धंसाव) की घटना के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में परियोजना की निगरानी से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जबकि निर्माण कंपनी को भी नोटिस जारी किया गया है।
एनएचएआई ने वर्तमान परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया है। इसके अलावा पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया और वर्तमान परियोजना निदेशक नकुल वर्मा के खिलाफ आरोप-पत्र जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है।
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी और मुख्य महाप्रबंधक गौतम विशाल चरण पहारी के अनुसार, 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के किमी-64 के आसपास सड़क की सतह में असामान्य बदलाव और धंसाव दिखाई दिया था।
सूचना मिलने के बाद तत्काल मरम्मत और राहत कार्य शुरू कर दिए गए। प्रभावित हिस्से से यातायात को दूसरी दिशा में मोड़ दिया गया, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल यातायात सामान्य रूप से संचालित किया जा रहा है और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।

इस मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ की गई है। एनएचएआई ने कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने के लिए नोटिस जारी किया है।
इसके साथ ही कंपनी पर निष्पादन सुरक्षा राशि के दो प्रतिशत के बराबर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा कंपनी के जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ तीन वर्ष तक प्रतिबंध लगाने और उसकी रेटिंग घटाने की भी तैयारी की जा रही है।
एनएचएआई के अनुसार, क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत पर लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसका पूरा खर्च निर्माण कंपनी को ही उठाना पड़ेगा।
आईआईटी खड़गपुर की टीम करेगी जांच
सड़क धंसने के पीछे की वास्तविक वजह जानने के लिए आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर के.एस. रेड्डी के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टीम बनाई गई है।
यह टीम केवल क्षतिग्रस्त हिस्से की जांच ही नहीं करेगी, बल्कि पूरे एक्सप्रेसवे की संरचना का अध्ययन करके यह भी पता लगाएगी कि आखिर यह स्थिति क्यों पैदा हुई।
एनएचएआई ने आधुनिक लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक के जरिए सड़क की गुणवत्ता का आकलन करने का फैसला भी किया है। इसके माध्यम से सड़क की सतह की सूक्ष्म खामियों का भी पता लगाया जा सकेगा।
टोल वसूली पर लगाई गई रोक
एनएचएआई ने यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, जब तक मरम्मत का काम पूरी तरह पूरा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी वाहन चालक से टोल नहीं लिया जाएगा।
इस दौरान होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी निर्माण कंपनी से ही कराई जाएगी।

हालांकि, एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि एक्सप्रेसवे पर निर्धारित 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर फैल रही तमाम अफवाहों को खारिज करते हुए प्राधिकरण ने कहा कि यातायात नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
एनएचएआई ने इस मामले में निर्माण एजेंसी और निगरानी एजेंसी से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।
निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र अभियंता के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से परियोजना से हटा दिया गया है।
इसके अलावा इन तीनों अधिकारियों पर अगले दो वर्षों तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ), एनएचएआई और एनएचआईडीसीएल की किसी भी परियोजना में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
स्वतंत्र अभियंता कंपनी थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी भविष्य की परियोजनाओं से प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
एनएचएआई का कहना है कि परियोजनाओं की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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