'क्रिमिनल ट्राइब' से सम्मान तक का सफर: योगी सरकार के फैसले से बदलेगी घुमंतू समाज की तकदीर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घुमंतू विकास बोर्ड के गठन को बताया ऐतिहासिक कदम, कहा- अब घुमंतू समाज को दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगी और उन्हें सम्मान के साथ विकास का अवसर मिलेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने विमुक्त एवं घुमंतू समाज के उत्थान की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए घुमंतू विकास बोर्ड के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह बोर्ड केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि दशकों से उपेक्षित समुदायों को सम्मान, पहचान और अधिकार दिलाने का माध्यम बनेगा। कार्यक्रम में सपेरा समाज ने पारंपरिक बीन वादन के जरिए मुख्यमंत्री का स्वागत किया और समाज के प्रतिनिधियों ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया।
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार का दिन विमुक्त और घुमंतू समाज के लिए एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब घुमंतू समाज को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। सरकार उन्हें सम्मानजनक जीवन देने और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
प्रदेश सरकार की ओर से घुमंतू विकास बोर्ड के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बोर्ड केवल एक सरकारी संस्था नहीं होगा, बल्कि यह उन लाखों लोगों के लिए आशा की नई किरण बनेगा, जो वर्षों से पहचान, सम्मान और अधिकार के लिए संघर्ष करते रहे हैं।
लखनऊ में आयोजित अभिनंदन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2014 में दिए गए 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को धरातल पर उतारने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा के भेदभाव से ऊपर उठकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ब्रिटिश शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने वर्ष 1871 में लागू किए गए क्रिमिनल ट्राइब एक्ट के तहत उन समुदायों को अपराधी घोषित कर दिया था, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने सुनियोजित तरीके से इन समुदायों की सामाजिक पहचान को धूमिल करने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने इन समुदायों को 'क्रिमिनल ट्राइब' के कलंक से मुक्त कराकर उन्हें सम्मानजनक पहचान दिलाने का काम किया था। हालांकि, इसके बावजूद लंबे समय तक इनके विकास के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घुमंतू विकास बोर्ड में विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा, ताकि उनकी समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंच सकें। उन्होंने यह भी बताया कि बोर्ड के माध्यम से इन समुदायों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने वनटांगिया, मुसहर, थारू, गौड़, चेरो, बुक्सा, कोल और सहरिया समाज का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार ने इन वर्गों को पहली बार बड़े पैमाने पर सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया है। राशन कार्ड, आयुष्मान भारत योजना, आवास योजना, गैस कनेक्शन, बिजली कनेक्शन और पेंशन योजनाओं के जरिए इन समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने उपेक्षित समुदायों के महापुरुषों और वीरांगनाओं को उचित सम्मान दिलाने का काम किया है। उन्होंने निषादराज गुह्य, महाराजा सुहेलदेव, वीरांगना अवंतीबाई लोधी, ऊदा देवी पासी, झलकारी बाई और महारानी दुर्गावती जैसे महान व्यक्तित्वों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने सपेरा समाज का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि इस समुदाय ने सदियों तक समाज को जागरूक करने और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का काम किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उनके पुनर्वास और विकास के लिए हरसंभव कदम उठाएगी।
इस अवसर पर समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि अब घुमंतू समाज धीरे-धीरे 'टिकंतू' समाज में बदल रहा है। उनके अनुसार, जिन लोगों के पास कभी स्थायी निवास नहीं था, उनके पास अब घर, बिजली, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
कार्यक्रम में सपेरा समाज के लोगों ने पारंपरिक बीन बजाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। 'योगी बाबा जिंदाबाद' के नारों के बीच उपस्थित लोगों ने सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया।
समाज के प्रतिनिधि सुभाष जोगी, शिवपूजन राम, वेदपाल, राजेश और दिनेश ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आजादी के दशकों बाद पहली बार किसी सरकार ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना है और उनके विकास के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
घुमंतू विकास बोर्ड के गठन के साथ ही यह उम्मीद बढ़ गई है कि वर्षों से सामाजिक और आर्थिक उपेक्षा का सामना कर रहे लाखों लोगों को अब एक नई पहचान और बेहतर भविष्य का अवसर मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार के इस कदम को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
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