मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने कतर के LNG प्लांट पर हमला कर उसकी 17% निर्यात क्षमता प्रभावित कर दी है। इसका असर भारत, चीन और यूरोप की गैस सप्लाई पर पड़ेगा।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़ी घटना ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर कर रख दिया है। ईरान ने कतर के तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर मिसाइल हमला कर दिया, जिससे दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस हमले का सबसे बड़ा असर कतर की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात क्षमता पर पड़ा है, जो वैश्विक बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
जानकारी के अनुसार, बुधवार रात और 18-19 मार्च 2026 की सुबह हुए इन हमलों में कतर के प्रमुख LNG हब ‘रास लफान रिफाइनरी’ को भारी नुकसान पहुंचा है। कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी कतर एनर्जी के सीईओ और ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने पुष्टि की है कि इस हमले के चलते देश की कुल LNG निर्यात क्षमता का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो गया है।
हमले में LNG उत्पादन की दो प्रमुख इकाइयां—ट्रेन 4 और ट्रेन 6—क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इन दोनों की संयुक्त उत्पादन क्षमता सालाना 12.8 मिलियन टन (MTPA) है, जो कतर के कुल LNG निर्यात का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन सुविधाओं को पूरी तरह ठीक करने में तीन से पांच साल तक का समय लग सकता है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कतर एनर्जी को अपने कई दीर्घकालिक LNG अनुबंधों पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ा है। इसका मतलब है कि अप्रत्याशित परिस्थितियों के चलते कंपनी अपने अनुबंधों की आपूर्ति शर्तों को अस्थायी रूप से पूरा नहीं कर पाएगी। अल-काबी के अनुसार, इस हमले से कतर को सालाना करीब 20 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान भी हो सकता है।
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा प्रभाव भारत पर पड़ने की आशंका है। भारत अपनी कुल LNG जरूरत का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा कतर से आयात करता है, जिससे उसकी ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है। पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में भारत ने कुल 27.8 मिलियन मीट्रिक टन LNG आयात किया था, जिसमें से 11.30 MMT कतर से आया था। इसकी कुल कीमत लगभग 6.40 अरब डॉलर रही।

2025-26 के ताजा आंकड़े भी यही दर्शाते हैं कि कतर भारत का प्रमुख गैस आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में आपूर्ति में कमी आने से भारत में गैस की उपलब्धता और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे घरेलू बाजार में गैस महंगी हो सकती है और उद्योगों व उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम जैसे कई बड़े आयातक देशों पर भी इसका असर पड़ेगा। कतर एनर्जी के प्रमुख ने स्पष्ट कहा है कि LNG उत्पादन में आई यह बाधा वैश्विक स्तर पर गैस सप्लाई चेन को प्रभावित करेगी और कई देशों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, जहां ईरान पहले से ही इजरायल और अमेरिका के साथ टकराव में है, अब खाड़ी देशों तक फैलता नजर आ रहा है। कतर पर हमला इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय संघर्ष अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले वर्षों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में भारत समेत अन्य देशों के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और रणनीतिक भंडारण पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
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