फारस की खाड़ी से भारत आ रहे LPG टैंकर ‘पाइन गैस’ को दो बार अपना गंतव्य बदलना पड़ा। अंततः इसे विशाखापत्तनम पोर्ट भेजा गया, जहां तेजी से गैस उतारने की तैयारी है।
भारत की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है, जहां फारस की खाड़ी से 47,000 टन एलपीजी लेकर आए विशाल टैंकर ‘पाइन गैस’ को अपने सफर के दौरान दो बार गंतव्य बदलना पड़ा। अंततः इस जहाज को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम बंदरगाह की ओर मोड़ दिया गया, जहां इसे जल्द से जल्द अनलोड करने की तैयारी है।
यूएई से भारत तक का सफर
227 मीटर लंबा यह एलपीजी टैंकर संयुक्त अरब अमीरात के गनतूत क्षेत्र से रवाना हुआ था, जो दुबई और अबू धाबी के बीच स्थित है। जहाज में 47,000 टन एलपीजी लदी थी और इसका मूल गंतव्य कर्नाटक का न्यू मैंगलोर बंदरगाह तय किया गया था।
फारस की खाड़ी से निकलकर जहाज होर्मुज जलडमरुमध्य से गुजरते हुए भारतीय समुद्री क्षेत्र में प्रवेश किया। लेकिन यहां से इसकी यात्रा ने अप्रत्याशित मोड़ लेना शुरू कर दिया।
युद्ध का असर: एक महीने तक खाड़ी में फंसा रहा जहाज
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया। इस कारण समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए और कई जहाजों को अपनी यात्रा रोकनी पड़ी।
इसी वजह से ‘पाइन गैस’ टैंकर भी करीब एक महीने तक फारस की खाड़ी में लंगर डाले खड़ा रहा। इस दौरान भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
स्थिति कुछ सामान्य होने के बाद ईरान ने आपसी सहमति के तहत कुछ जहाजों को होर्मुज जलडमरुमध्य से गुजरने की अनुमति दी। इसी क्रम में ‘पाइन गैस’ को भी भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की सुरक्षा में आगे बढ़ाया गया और सुरक्षित भारतीय समुद्री क्षेत्र तक पहुंचाया गया।
भारत पहुंचने के बाद जहाज को कर्नाटक के न्यू मैंगलोर बंदरगाह पर एलपीजी अनलोड करना था, लेकिन वहां कुछ परिचालन (ऑपरेशनल) समस्याएं सामने आईं। इसके चलते जहाज का गंतव्य बदलकर ओडिशा के धामरा बंदरगाह कर दिया गया।

दूसरा और अंतिम बदलाव: विशाखापत्तनम क्यों?
हालांकि, बाद में यह महसूस किया गया कि धामरा बंदरगाह तक जहाज को ले जाने में और अधिक समय लग सकता है। देश में पहले से ही एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी, ऐसे में देरी और समस्या पैदा कर सकती थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लिया गया कि जहाज को सीधे विशाखापत्तनम बंदरगाह भेजा जाए। यहां की डीप वॉटर सुविधा और आधुनिक एलपीजी हैंडलिंग सिस्टम इस कार्य के लिए अधिक उपयुक्त माने गए।
विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, उनका बंदरगाह पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) के सभी मानकों का पालन करता है और बड़े गैस टैंकरों को तेजी से हैंडल करने में सक्षम है।
केंद्र सरकार के निर्देश: LPG टैंकरों को प्राथमिकता
पश्चिम एशिया में जारी संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश के सभी बंदरगाहों को निर्देश दिए हैं कि एलपीजी और प्राकृतिक गैस लेकर आने वाले जहाजों को अन्य जहाजों की तुलना में प्राथमिकता दी जाए।
इसका उद्देश्य देश में गैस की आपूर्ति को बनाए रखना और किसी भी तरह की कमी से बचना है।
जग वसंत से तुलना
एक अन्य जहाज ‘जग वसंत’ भी इसी रूट पर था, जो 28 मार्च को गुजरात के वाडिनार पोर्ट पहुंच गया था। लेकिन ‘पाइन गैस’ को पश्चिमी तट से अधिक दूरी तय करनी पड़ी, जिससे इसकी यात्रा लंबी हो गई।
वैश्विक संकट का असर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री में अस्थिरता देखने को मिल रही है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, बीमा लागत और संचालन में देरी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो ऊर्जा के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।
भारत के प्रमुख बंदरगाह तैयार
इस स्थिति से निपटने के लिए भारत के कई प्रमुख बंदरगाहों को तैयार रखा गया है, जिनमें शामिल हैं:
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मुंद्रा बंदरगाह
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न्यू मैंगलोर बंदरगाह
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कोच्चि बंदरगाह
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जवाहरलाल नेहरू पोर्ट
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चेन्नई बंदरगाह
ये सभी बंदरगाह खाड़ी से आने वाले जहाजों के ट्रैफिक को संभालने में सक्षम हैं।
‘पाइन गैस’ टैंकर की यात्रा सिर्फ एक शिपिंग कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति, युद्ध और लॉजिस्टिक चुनौतियां किसी देश की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
ऑपरेशनल कारणों, समुद्री परिस्थितियों और सरकार-ऑपरेटर के समन्वय के चलते ऐसे रूट बदलाव सामान्य होते हैं, लेकिन इस मामले में समय की संवेदनशीलता ने इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।
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