बजट सत्र के दौरान लोकसभा में एक असाधारण स्थिति देखने को मिली, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही पारित कर दिया गया।
संसद के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को लोकसभा में एक असाधारण और ऐतिहासिक स्थिति देखने को मिली। साल 2004 के बाद पहली बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब के बिना ही पारित कर दिया गया। लगातार हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि 28 जनवरी को संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्वारा दिए गए अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पढ़कर सुनाया गया। विपक्षी सांसदों के शोर-शराबे के बावजूद प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था, लेकिन विपक्ष की लगातार नारेबाजी और व्यवधान के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी, जिससे प्रधानमंत्री का जवाब नहीं हो सका।

गुरुवार को भी सुबह 11 बजे शुरू हुई लोकसभा की कार्यवाही कुछ ही देर में बाधित हो गई। विरोध थमने के कोई संकेत नहीं मिलने पर स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।
विपक्षी सांसदों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका न मिलने का मुद्दा उठाया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने राहुल गांधी को सदन में बोलने से रोका और उन्हें 2020 के चीन सीमा विवाद से जुड़े पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देने नहीं दिया गया।
इस बीच सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ गया, जब अनुशासनहीन व्यवहार के आरोप में कांग्रेस के आठ सांसदों को बजट सत्र के शेष हिस्से के लिए निलंबित कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि साल 2004 में भी इसी तरह की स्थिति बनी थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने का अवसर नहीं मिला था।
COMMENTS