नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसाइटी के एसटीपी टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी से दो कर्मचारियों की मौत हो गई। पुलिस ने मामले में ठेकेदार को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है। हादसे ने सीवर और एसटीपी सफाई में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-150 स्थित एक आवासीय सोसाइटी में शनिवार देर रात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के टैंक की सफाई के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। टैंक के भीतर जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण दो कर्मचारियों की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर सीवर और एसटीपी टैंकों की सफाई के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में पुलिस ने संबंधित ठेकेदार को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र की है।
पुलिस के मुताबिक, सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसाइटी में एसटीपी टैंक की नियमित सफाई का कार्य कराया जा रहा था। सफाई के दौरान कर्मचारी शशिकांत शर्मा (40 वर्ष) टैंक के भीतर काम करते समय अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें बचाने के उद्देश्य से वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड आकाश (22 वर्ष) बिना किसी पर्याप्त सुरक्षा उपकरण या श्वसन यंत्र के टैंक के अंदर उतर गया। हालांकि कुछ ही क्षणों में वह भी जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही थाना नॉलेज पार्क पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर दोनों कर्मचारियों को टैंक से बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल भेजा गया। लेकिन चिकित्सकों ने उपचार के दौरान दोनों को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। प्रारंभिक जांच के आधार पर सफाई कार्य से जुड़े ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जो भी व्यक्ति लापरवाही का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर इतने जोखिमपूर्ण कार्यों में सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं किया जाता। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी सीवर या एसटीपी टैंक में प्रवेश से पहले गैस की जांच, ऑक्सीजन स्तर का परीक्षण, सुरक्षा हार्नेस, ब्रीदिंग उपकरण, लाइफलाइन और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की उपलब्धता अनिवार्य होती है। इन आवश्यक सुरक्षा उपायों की अनदेखी अक्सर ऐसी दुखद घटनाओं का कारण बनती है।
इस संबंध में नोएडा जल विभाग के वर्क सर्किल-2 के वरिष्ठ प्रबंधक प्रदीप कुमार ने बताया कि यह मामला बिल्डर द्वारा संचालित निजी सोसाइटी से संबंधित है। उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी भेजी जाएगी, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
जांच के दायरे में सोसाइटी प्रबंधन और एजेंसी
घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या सफाई कार्य शुरू होने से पहले सभी निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था। क्या कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा किट, ऑक्सीजन उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया था? क्या सोसाइटी प्रबंधन और कार्यदायी एजेंसी ने श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी निभाई थी? पुलिस इन सभी बिंदुओं की जांच कर रही है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान सोसाइटी प्रबंधन, ठेकेदार या किसी अन्य संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा केवल दो श्रमिकों की दर्दनाक मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी बड़ा सवाल है जिनका उद्देश्य ऐसे खतरनाक कार्यों में लगे कर्मचारियों के जीवन की रक्षा करना है। यदि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई हो, तो भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सकता है।
COMMENTS