देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई है। CBI जांच में अब नासिक, पुणे, राजस्थान और कई राज्यों तक फैले कथित सॉल्वर गैंग के तार सामने आ रहे हैं। लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी चिंता और गुस्सा है।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 अब केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि पूरे देश में भरोसे, मेहनत और शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवालों का प्रतीक बन चुकी है। लाखों छात्रों ने दिन-रात मेहनत करके डॉक्टर बनने का सपना देखा था, लेकिन पेपर लीक के आरोपों ने उन सपनों को अचानक अनिश्चितता में धकेल दिया।
National Testing Agency यानी NTA ने बड़ा फैसला लेते हुए NEET-UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। अब यह परीक्षा दोबारा कराई जाएगी। इस फैसले के बाद देशभर के छात्रों और उनके परिवारों में चिंता, गुस्सा और असमंजस का माहौल है।

NTA का बड़ा फैसला, क्यों रद्द हुई परीक्षा?
NTA ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि जांच एजेंसियों से मिले इनपुट और सामने आए तथ्यों को देखते हुए मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखना उचित नहीं था। एजेंसी ने साफ किया कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए परीक्षा रद्द करना जरूरी हो गया था।
अब नई परीक्षा तिथि, री-एग्जाम शेड्यूल और नए एडमिट कार्ड की जानकारी जल्द जारी की जाएगी।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — आखिर देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली परीक्षा का पेपर लीक हुआ कैसे?
NTA DG अभिषेक सिंह का सख्त बयान
पेपर लीक मामले पर Abhishek Singh ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
उन्होंने कहा कि इस गड़बड़ी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे कोई अंदर का हो या बाहर का, हर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने CBI से अपील करते हुए कहा कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों को गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हो सकें।
क्या नासिक से शुरू हुआ पेपर लीक नेटवर्क?
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं।
शुरुआत में इसे केवल ‘गेस पेपर’ माना जा रहा था, लेकिन अब जांच एजेंसियों के रडार पर महाराष्ट्र का नासिक शहर आ गया है।
सूत्रों के मुताबिक NEET पेपर की पहली डिजिटल कॉपी नासिक के किसी गुप्त स्थान पर तैयार की गई थी। इसके बाद यह डिजिटल कॉपी देशभर में सक्रिय कथित ‘सॉल्वर गैंग’ तक पहुंचाई गई।
जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क राजस्थान, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना तक फैला हो सकता है।
CBI की कार्रवाई तेज, कई आरोपी हिरासत में
Central Bureau of Investigation यानी CBI ने मामले की जांच तेज कर दी है।
महाराष्ट्र के नासिक से पकड़े गए मुख्य आरोपी Shubham Khairnar को मुंबई की CBI अदालत में पेश किया गया, जहां एजेंसी उसकी रिमांड लेकर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।

वहीं दूसरे संदिग्ध आरोपी Dhananjay Lokhande को भी हिरासत में लिया गया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।
इसके अलावा पुणे से Manisha Baghmare को भी हिरासत में लिया गया है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
कैसे खुला पेपर लीक का राज?
पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस कथित लीक का खुलासा एक मामूली घटना से हुआ।
राजस्थान के सीकर में एक हॉस्टल मालिक को भेजा गया कथित ‘गेस पेपर’ बाद में असली NEET पेपर से मेल खाने लगा। यहीं से शक गहराया और जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं।
जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर पेपर 30 लाख रुपये तक में खरीदा गया और बाद में करोड़ों रुपये के नेटवर्क के जरिए कई छात्रों तक पहुंचाया गया।

NTA मुख्यालय पर ABVP का प्रदर्शन
इस बीच Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad के कार्यकर्ताओं ने NTA मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
आरोपियों के परिवारों का दावा – “हमारे बेटे निर्दोष हैं”
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के परिवारों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
जयपुर के जमवारामगढ़ के आरोपी दिनेश बिंवाल और मांगीलाल के परिवारों ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उनके बेटे निर्दोष हैं।
परिजनों ने कहा कि परिवार फाइनेंस का काम करता है और पेपर खरीदने के आरोप पूरी तरह गलत हैं। मां प्रभुदेवी ने रोते हुए कहा, “मेरे बेटे ऐसा नहीं कर सकते।”

कांग्रेस ने उठाए सवाल
Indian National Congress ने भी इस मुद्दे पर सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा है।
कांग्रेस ने कहा कि केवल परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं है। पार्टी ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 89 पेपर लीक हुए हैं और 48 मामलों में दोबारा परीक्षा करानी पड़ी।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित करने की मांग की है।
छात्रों की मेहनत और टूटा भरोसा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों छात्रों का हुआ है जिन्होंने वर्षों तक मेहनत की।
कई छात्र मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों ने दिन-रात पढ़ाई की, कोचिंग ली, परिवारों ने अपनी जमा पूंजी खर्च कर दी, लेकिन अब उन्हें दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ेगी।
देशभर में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या भारत की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है?
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