NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने पूछा कि हाई पावर्ड कमेटी और सुधारों के बावजूद इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि 21 जून को होने वाली reNEET परीक्षा के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है और निगरानी हाई लेवल पर की जाएगी।
NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA से पूछा- “इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हुई?”
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए साफ कहा कि अगर हाई पावर्ड कमेटी और कई सुधारों के बावजूद पेपर लीक जैसी घटनाएं हो रही हैं, तो कहीं न कहीं सिस्टम में बड़ी खामी मौजूद है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत का रुख काफी सख्त दिखाई दिया। कोर्ट ने पूछा कि जब पहले से विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी, कई सिफारिशें लागू की जा चुकी थीं और सुरक्षा को मजबूत करने के दावे किए जा रहे थे, तब भी ऐसी गंभीर चूक आखिर कैसे हो गई।
इस पूरे मामले ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है। खासकर तब, जब 21 जून को होने वाली reNEET परीक्षा को लेकर सरकार और NTA नए सुरक्षा दावे कर रहे हैं।
कोर्ट ने पूछा- निगरानी हुई या सिर्फ कागजी तैयारी?
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पूर्व इसरो प्रमुख की अध्यक्षता में गठित हाई पावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुधारों और सुरक्षा उपायों का जिक्र किया गया है।
लेकिन अदालत इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई।
जस्टिस नरसिम्हा ने सुनवाई के दौरान सीधा सवाल उठाया कि आखिर इन सिफारिशों के लागू होने की निगरानी कितनी गंभीरता से की गई थी। उन्होंने कहा कि अगर इतने बड़े स्तर पर सुधार लागू किए गए थे, तो फिर पेपर लीक जैसी घटना कैसे हो गई।
कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि इसका मतलब दो ही हो सकते हैं—
या तो मूल सिफारिशों में कमी थी,
या फिर उन्हें ठीक तरीके से लागू ही नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सीधे तौर पर NTA की जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल मानी जा रही है।
हाई पावर्ड कमेटी ने दिए थे दर्जनों सुझाव
सुनवाई के दौरान पूर्व इसरो अध्यक्ष राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि कमेटी ने लॉन्ग टर्म के लिए 35 और शॉर्ट टर्म के लिए 60 सिफारिशें दी थीं।
उन्होंने दावा किया कि इन सुझावों में से अधिकांश को लागू भी कर दिया गया है। उन्होंने यह भी माना कि विवाद मुख्य रूप से प्रश्न पत्र से छेड़छाड़ और लीक को लेकर था, लेकिन अब कई तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू किए जा चुके हैं।
राधाकृष्णन ने अदालत को भरोसा दिलाया कि आने वाली reNEET परीक्षा में सुरक्षा के सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
“जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, सिस्टम नहीं सुधरेगा”
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सबसे अहम टिप्पणी जवाबदेही को लेकर की।
अदालत ने साफ कहा कि सिर्फ यह जानना काफी नहीं है कि गलती किसने की। असली सवाल यह है कि जिम्मेदारी किसके पास थी और किस स्तर पर लापरवाही हुई।
कोर्ट ने कहा कि जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। अदालत ने इसे पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बताया।
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आने वाले समय में परीक्षा संचालन एजेंसियों की जवाबदेही और पारदर्शिता पर और ज्यादा सख्ती हो सकती है।
सरकार का दावा- 21 जून की परीक्षा पूरी निगरानी में होगी
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के साथ खड़ी है और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि 21 जून को होने वाली reNEET परीक्षा के लिए नया सुरक्षा मैकेनिज्म तैयार किया गया है। परीक्षा की निगरानी “हाई लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम” के तहत की जाएगी।
सरकार का दावा है कि इस बार परीक्षा केंद्रों की निगरानी, पेपर ट्रांसपोर्ट, डिजिटल सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण को पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने UPSC का दिया उदाहरण
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने UPSC का उदाहरण देते हुए NTA को अप्रत्यक्ष रूप से सीख लेने की सलाह भी दी।
कोर्ट ने कहा कि UPSC जैसी परीक्षाओं में इस तरह की स्थिति शायद ही कभी देखने को मिलती है। इसलिए NTA को अपनी कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को उसी स्तर तक मजबूत करना होगा।
यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि अदालत अब सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वसनीयता की भी मांग कर रही है।
छात्रों और अभिभावकों में अब भी चिंता
हालांकि सरकार और NTA लगातार नई सुरक्षा व्यवस्था का दावा कर रहे हैं, लेकिन देशभर के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के मन में अब भी चिंता बनी हुई है।
पेपर लीक विवाद ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक भरोसा बहाल करना आसान नहीं होगा।
अब पूरे देश की नजर 21 जून को होने वाली reNEET परीक्षा पर टिकी हुई है। यह परीक्षा सिर्फ छात्रों के भविष्य का सवाल नहीं है, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता की भी सबसे बड़ी परीक्षा बन चुकी है।
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