बिहार में आयोजित NEET-UG री-एग्जाम के दौरान बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में गड़बड़ी, डमी उम्मीदवारों को परीक्षा दिलाने और संगठित नकल रैकेट में शामिल होने के आरोप में 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में मेडिकल कॉलेजों के छात्र, एक MBBS इंटर्न, BAMS और नर्सिंग की छात्राएं तथा परीक्षा केंद्र से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET-UG एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला बिहार से सामने आया है, जहां पेपर लीक के आरोपों के बाद दोबारा आयोजित की गई परीक्षा में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने की कोशिश का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में अब तक कम से कम 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मचारी, डमी उम्मीदवार, असली अभ्यर्थी, बिचौलिए और विभिन्न मेडिकल संस्थानों से जुड़े छात्र शामिल हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कुछ ही सप्ताह पहले आयोजित मूल NEET-UG परीक्षा पेपर लीक के गंभीर आरोपों के चलते विवादों में घिर गई थी। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठे और प्रभावित केंद्रों पर दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। रविवार को बिहार में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच री-एग्जाम कराया गया था, लेकिन इसी दौरान कथित फर्जीवाड़े का यह मामला सामने आ गया।
बिहार पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) सुधांशु कुमार के अनुसार, जांच में सामने आया कि परीक्षा केंद्रों पर तैनात कुछ कर्मचारियों ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से समझौता करते हुए डमी उम्मीदवारों और बिचौलियों के साथ कथित मिलीभगत की।

पुलिस ने बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम से जुड़े 18 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को प्रभावित कर वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा देने का अवसर उपलब्ध कराया।
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह कोई व्यक्तिगत स्तर की घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग सक्रिय थे और इसकी पहुंच किन-किन राज्यों तक फैली हुई थी।
नौ डमी उम्मीदवार और एक असली अभ्यर्थी गिरफ्तार
लखीसराय पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, नौ डमी उम्मीदवारों, एक वास्तविक अभ्यर्थी और दो सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है। इन सभी पर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने और फर्जी तरीके से मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास कराने की साजिश में शामिल होने का आरोप है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए डमी उम्मीदवारों में कई ऐसे छात्र शामिल हैं जो पहले से प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं।

मेडिकल कॉलेजों के छात्र भी जांच के घेरे में
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार डमी उम्मीदवारों में पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज का एक चौथे वर्ष का MBBS छात्र, उत्तर प्रदेश के AIIMS रायबरेली का चौथे वर्ष का MBBS छात्र तथा बिहार के एएन मगध मेडिकल कॉलेज का चौथे वर्ष का MBBS छात्र शामिल है।
इसके अलावा मध्य प्रदेश के सतना स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज का प्रथम वर्ष का छात्र भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने दिल्ली के शाहदरा स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (UCMS) में कार्यरत एक MBBS इंटर्न को भी गिरफ्तार किया है। वहीं पटना के NMCH में पढ़ने वाले चौथे वर्ष के B.Pharm छात्र और एक अन्य छात्र का नाम भी इस मामले में सामने आया है।
इन गिरफ्तारियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मेडिकल शिक्षा से जुड़े कुछ छात्र आर्थिक लाभ के लिए ऐसे अवैध नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं।

पुलिस जांच में दो छात्राओं की भी संलिप्तता सामने आई है।
इनमें एक छात्रा वाराणसी स्थित BHU में BSc Nursing की पढ़ाई कर रही है, जबकि दूसरी ओडिशा के एक सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज में BAMS की छात्रा बताई गई है।
दोनों पर आरोप है कि उन्होंने डमी उम्मीदवार के रूप में परीक्षा प्रक्रिया में हिस्सा लिया या फिर उससे जुड़े नेटवर्क का हिस्सा बनीं।
पुलिस ने नालंदा जिले के रहने वाले संजीत कुमार नामक एक वास्तविक अभ्यर्थी को भी गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि असली उम्मीदवार और डमी उम्मीदवारों के बीच समन्वय के बिना इस प्रकार की साजिश संभव नहीं थी।
इसलिए अब पुलिस उन अभ्यर्थियों की भी जांच कर रही है जिनके लिए कथित रूप से दूसरे लोगों को परीक्षा देने भेजा गया था।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि गिरफ्तार बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मियों में तीन सुपरवाइजर और पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) का चौथे वर्ष का एक MBBS छात्र भी शामिल है।
इस खुलासे ने परीक्षा केंद्रों पर तैनाती और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि मामले में लखीसराय जिले के किऊल और कवैया थाना क्षेत्रों में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन तथा आपसी संपर्कों की जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और परीक्षा माफिया से इसके तार जुड़े हो सकते हैं।
फिर सवालों के घेरे में परीक्षा व्यवस्था
पेपर लीक विवाद के बाद दोबारा आयोजित की गई परीक्षा में इस तरह की कथित गड़बड़ी सामने आने से NEET परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल बिहार पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यदि जांच में किसी बड़े संगठित रैकेट की पुष्टि होती है, तो यह देश की मेडिकल प्रवेश प्रणाली से जुड़ा एक और बड़ा खुलासा साबित हो सकता है।
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