देशभर में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और संगठित नकल के मामलों पर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक में दोषियों के लिए कड़ी सजा, भारी जुर्माना, फास्ट ट्रैक कोर्ट, समयबद्ध जांच और अपील की व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
देश में सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 लोकसभा में पेश किया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा प्रस्तुत इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य वर्ष 2024 में लागू कानून को और अधिक प्रभावी बनाना है, ताकि प्रश्नपत्र लीक, फर्जी अभ्यर्थियों के माध्यम से परीक्षा दिलाने, संगठित नकल और परीक्षा माफिया जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों के मामलों ने लाखों मेहनती अभ्यर्थियों के भविष्य पर गंभीर असर डाला है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कानून को और अधिक सख्त बनाने का निर्णय लिया गया है।
दोषियों के लिए सजा होगी दोगुनी से भी ज्यादा कड़ी
संशोधन विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करता है या परीक्षा प्रक्रिया में धोखाधड़ी करता है, तो अब उसे न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की सजा हो सकती है। वर्तमान कानून में यह सजा तीन से पांच वर्ष तक निर्धारित है।
इसके अलावा अधिकतम आर्थिक दंड भी ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख करने का प्रस्ताव रखा गया है।
सर्विस प्रोवाइडर्स पर भी होगी बड़ी कार्रवाई
यदि परीक्षा आयोजित करने वाली किसी एजेंसी या सेवा प्रदाता की भूमिका परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक में सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
संशोधन के अनुसार ऐसे संस्थानों पर अधिकतम ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा, जबकि वर्तमान सीमा ₹1 करोड़ है। साथ ही सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से प्रतिबंध की अवधि चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का प्रस्ताव है।
प्रबंधन स्तर के अधिकारियों पर भी होगी सीधी जवाबदेही
कानून में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि यदि किसी सेवा प्रदाता संस्था के प्रबंधकीय अधिकारी अपराध में शामिल पाए जाते हैं, तो उन्हें भी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।
ऐसे मामलों में न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की जेल के साथ ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
संगठित पेपर लीक गिरोहों पर सबसे बड़ा प्रहार
यदि परीक्षा में धांधली किसी संगठित गिरोह या आपराधिक नेटवर्क द्वारा की जाती है, तो सजा और भी अधिक कठोर होगी।
संशोधन के तहत ऐसे मामलों में न्यूनतम सजा सात वर्ष तथा अधिकतम दस वर्ष तक होगी। वहीं अधिकतम जुर्माना ₹10 करोड़ तक लगाया जा सकेगा। वर्तमान कानून में ऐसे अपराधों के लिए न्यूनतम सजा पांच वर्ष और अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ निर्धारित है।
दो महीने में जांच और तीन महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य
विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान मामलों के शीघ्र निस्तारण से जुड़ा है।
प्रस्तावित नए धारा 12A के तहत—
- जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मुकदमे का निस्तारण करने का प्रयास किया जाएगा।
- मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित किए जाएंगे।
- प्रत्येक फास्ट ट्रैक कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) नियुक्त किए जाएंगे।
अपील भी होगी समयबद्ध
प्रस्तावित धारा 12B के अनुसार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ संबंधित पक्ष 30 दिनों के भीतर हाईकोर्ट में अपील कर सकेगा। साथ ही प्रयास रहेगा कि हाईकोर्ट भी ऐसी अपीलों का निस्तारण तीन महीने के भीतर कर दे।
स्पेशल टास्क फोर्स को भी मिल सकेगी जांच
संशोधन विधेयक के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार भी दिया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच विशेष रूप से गठित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंपी जा सके।
किन परीक्षाओं पर लागू होता है यह कानून?
Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 12 फरवरी 2024 को अधिनियमित हुआ था और 21 जून 2024 से लागू है। यह कानून निम्नलिखित संस्थाओं द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है—
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
- कर्मचारी चयन आयोग (SSC)
- रेलवे भर्ती बोर्ड (RRBs)
- इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सेलेक्शन (IBPS)
- नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA)
- केंद्र सरकार के मंत्रालय एवं विभाग
- केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य भर्ती एवं परीक्षा संस्थान
इस कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable), गैर-जमानती (Non-Bailable) और गैर-समझौतायोग्य (Non-Compoundable) हैं।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का मानना है कि प्रस्तावित संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं में निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूत करेगा। साथ ही पेपर लीक, फर्जी अभ्यर्थियों, संगठित नकल गिरोहों और परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगेगा। सरकार का कहना है कि इससे करोड़ों ईमानदार और मेहनती अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित होंगे तथा देश की परीक्षा प्रणाली पर जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
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