लोकसभा ने एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'द पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' को लोकसभा से ध्वनिमत के जरिए पारित करा लिया। हालांकि यह विधेयक जितना महत्वपूर्ण माना जा रहा था, उतनी ही तीखी राजनीतिक बहस और भारी हंगामे का भी गवाह बना। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर इतना बढ़ गया कि अंततः लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक, संगठित नकल, तकनीकी धोखाधड़ी और अन्य अनुचित साधनों पर पहले से अधिक सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का दावा है कि नया संशोधन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगा और युवाओं का विश्वास मजबूत करेगा।
जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर साधा निशाना
विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्ष, विशेषकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त रहा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि संसद में असंसदीय भाषा का प्रयोग करना उचित नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी के भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी और संसदीय मर्यादा का पालन आवश्यक है। उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इतने गंभीर विषय पर राजनीति नहीं बल्कि सार्थक चर्चा होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन का किया समर्थन
वहीं कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार को शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामलों पर घेरते हुए कहा कि देश के छात्र अपने भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं और उनके आंदोलन को सम्मान मिलना चाहिए।
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह किसी प्रकार का हिंसक या नफरत से प्रेरित आंदोलन नहीं था, बल्कि युवाओं की वास्तविक चिंता की अभिव्यक्ति थी। उन्होंने कहा कि देश के हर राजनीतिक दल को छात्रों की भावनाओं को समझना चाहिए।
'इडियट' और 'अंधभक्त' शब्दों पर मचा बवाल
राहुल गांधी के भाषण के दौरान उस समय सदन का माहौल अचानक गर्म हो गया जब उन्होंने उदाहरण देते हुए 'स्टूडेंट', 'इडियट' और 'अंधभक्त' जैसे शब्दों का उल्लेख किया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने तत्काल आपत्ति जताई और इसे असंसदीय भाषा बताया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि जो भी शब्द संसदीय नियमों के अनुरूप नहीं होंगे, उन्हें कार्यवाही से हटा दिया जाएगा। राहुल गांधी ने भी कहा कि यदि किसी शब्द पर आपत्ति है तो वह दूसरा शब्द इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन तब तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो चुकी थी।
शिक्षा व्यवस्था और आरएसएस पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली छात्रों के लिए भरोसेमंद नहीं रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी संस्थाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और शिक्षा व्यवस्था पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का प्रभाव है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पेपर लीक का पूरा नेटवर्क करोड़ों रुपये के खेल में बदल चुका है और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है।
गृह मंत्री को लेकर भी दिए बयान
राहुल गांधी ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बल प्रयोग गृह मंत्री के आदेश के बिना संभव नहीं होता। इस बयान पर भी सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
किरण रिजिजू ने राहुल गांधी से पूछा कि यदि उनके पास इस तरह के आरोपों का कोई प्रमाण है तो वह सदन के सामने रखें। स्पीकर ने भी राहुल गांधी से कहा कि वे विधेयक से जुड़े मुद्दों पर ही चर्चा करें और बिना प्रमाण के आरोप लगाने से बचें।
विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से सवाल पूछे। हालांकि उनके एक बयान को बाद में सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने छात्रों के आंदोलन की तुलना पड़ोसी देशों में हुए छात्र आंदोलनों से की, जबकि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी की।
बिल पास, लेकिन हंगामा जारी
लंबी बहस और लगातार विरोध के बीच आखिरकार एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक लोकसभा से ध्वनिमत के जरिए पारित हो गया। हालांकि बिल पारित होने के बाद भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। सदन में नारेबाजी और शोर-शराबा बढ़ने के कारण लोकसभा अध्यक्ष को कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
क्या बदल जाएगी परीक्षा व्यवस्था?
सरकार का दावा है कि नया कानून पेपर लीक माफियाओं, संगठित परीक्षा गिरोहों और तकनीकी धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
देशभर के करोड़ों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि नया कानून लागू होने के बाद वास्तव में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कितना प्रभावी अंकुश लग पाता है। फिलहाल संसद में पारित यह विधेयक शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य को लेकर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुका है।
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