राजधानी दिल्ली में आयोजित QUAD देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा संकट, चीन की बढ़ती आर्थिक पकड़ और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बड़ा मंथन हुआ। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की कोशिश दुनिया स्वीकार नहीं करेगी।
राजधानी दिल्ली एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का बड़ा केंद्र बन गई, जब हैदराबाद हाउस में QUAD देशों की महत्वपूर्ण विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू हुई। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों के बीच हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में दुनिया के कई संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। लेकिन इस बैठक का सबसे बड़ा और सबसे चर्चित संदेश तब सामने आया, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया।
मार्को रुबियो ने साफ शब्दों में कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हर हाल में खुला रहना चाहिए और खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि होर्मुज क्षेत्र में जो कुछ भी हो रहा है, वह गैरकानूनी, अस्थिर और पूरी दुनिया के लिए अस्वीकार्य है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान सिर्फ ईरान के लिए चेतावनी नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रणनीतिक चिंता को भी दर्शाता है।
बैठक की शुरुआत में जयशंकर का बड़ा संदेश
बैठक की शुरुआत भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया कई बड़े अवसरों और गंभीर चुनौतियों के दौर से गुजर रही है।
जयशंकर ने कहा कि QUAD देशों के बीच साझा गतिविधियों, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक चुनौतियों पर गंभीरता से चर्चा की जा रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक संतुलन बनाए रखना अब QUAD देशों की प्राथमिकता बन चुका है।

चीन के बढ़ते प्रभाव पर बना नया प्लान
इस बैठक का सबसे बड़ा फोकस चीन के बढ़ते प्रभाव और खासतौर पर क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में उसके दबदबे को चुनौती देना माना जा रहा है।
दरअसल, पिछले वर्ष QUAD देशों ने “क्रिटिकल मिनरल्स पहल” शुरू की थी। अब दिल्ली बैठक में सप्लाई चेन को मजबूत और विविध बनाने को लेकर नई रणनीति पर चर्चा हुई।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि QUAD देश मिलकर चीन पर निर्भरता कम करें और ऐसे विकल्प तैयार करें, जो भविष्य में आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, बैटरी और आधुनिक रक्षा तकनीकों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण खनिजों पर चीन की मजबूत पकड़ को देखते हुए यह पहल बेहद अहम मानी जा रही है।
इंडो-पैसिफिक सर्विलांस की शुरुआत
बैठक के बाद विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव नागराज नायडू ने जानकारी देते हुए बताया कि QUAD देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए “इंडो-पैसिफिक सर्विलांस” पहल लॉन्च की है।
इस नई व्यवस्था के तहत समुद्री गतिविधियों पर अधिक सटीक और तेज निगरानी रखी जाएगी। इसका उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाना, अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सीधे तौर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री सक्रियता के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

आतंकवाद और सीमा पार आतंक पर सख्त रुख
बैठक में आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।
चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि इस वैश्विक खतरे से मिलकर लड़ना जरूरी है।
हालांकि किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञ इसे दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से जोड़कर देख रहे हैं।
ऊर्जा सुरक्षा पर बना बड़ा फ्रेमवर्क
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण फैसले हुए।
QUAD देशों ने तेल, गैस, पेट्रोकेमिकल और उर्वरकों जैसी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई चेन को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने पर सहमति जताई।
चारों देशों ने माना कि वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों का सबसे ज्यादा असर इंडो-पैसिफिक देशों पर पड़ता है। इसलिए भविष्य के संकटों से निपटने के लिए एक मजबूत और लचीला नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
बनेगा “Quad Fuel Security Forum”
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ा ऐलान “Quad Fuel Security Forum” के गठन का रहा।
इस फोरम का उद्देश्य तेल, गैस, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना होगा।

इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में QUAD देशों की यह पहल बेहद रणनीतिक मानी जा रही है।
QUAD पर उठे सवालों का भारत ने दिया जवाब
बीते 18 महीनों में QUAD लीडर्स सम्मेलन न होने को लेकर उठे सवालों पर भारत ने स्पष्ट जवाब दिया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि QUAD पूरी तरह सक्रिय है और हर महीने इसके 5 से 6 वर्किंग ग्रुप्स की बैठकें होती हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी QUAD के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय बैठक QUAD की ही थी और तब से कई अहम बैठकें हो चुकी हैं।
दुनिया की नजर दिल्ली बैठक पर
दिल्ली में हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया ऊर्जा संकट, समुद्री सुरक्षा, चीन के विस्तारवाद और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
ऐसे में QUAD देशों की यह रणनीतिक बैठक आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।
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