लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि हिरासत के दौरान उन्हें ले जा रहे कुछ पुलिसकर्मियों ने भी सरकार के खिलाफ टिप्पणी की। राहुल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, छात्रों से माफी और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
देश में पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान जब दिल्ली पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर जा रही थी, तब कुछ पुलिसकर्मियों ने निजी तौर पर उनसे कहा कि "इस सरकार को हटाइए।"
राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई, बार-बार हो रहे पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से कई अहम मांगें भी रखीं।
'पुलिसकर्मी भी खुश नहीं थे' — राहुल गांधी का दावा
राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान जब पुलिस उन्हें घसीटकर ले जा रही थी, उसी समय कुछ पुलिसकर्मियों ने उनसे निजी बातचीत में सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
राहुल गांधी के अनुसार, एक पुलिसकर्मी ने स्वयं को राजस्थान का बताते हुए कहा कि "इस सरकार को हटाइए, हम सिर्फ वर्दी पहनकर आदेश का पालन कर रहे हैं।" वहीं दूसरे पुलिसकर्मी ने खुद को हरियाणा का बताते हुए भी इसी तरह की बात कही।
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में छात्रों के साथ जो कुछ हुआ, उससे पुलिस बल के कई कर्मचारी भी संतुष्ट नहीं थे, लेकिन सरकारी आदेशों का पालन करना उनकी मजबूरी है।
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हालांकि, राहुल गांधी के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
'छात्रों का कसूर क्या है?'
राहुल गांधी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर छात्रों का अपराध क्या है।
उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र केवल एक निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छात्रों को वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती है। परीक्षा से ठीक पहले यदि पेपर लीक हो जाए तो उनकी मेहनत, समय और भविष्य पर गंभीर असर पड़ता है।
पेपर लीक को लेकर सरकार पर हमला
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट से गुजर रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले लगभग एक दशक में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के 152 पेपर लीक हुए हैं। उनके अनुसार इसका मतलब है कि औसतन हर महीने एक बड़ी परीक्षा विवादों में रही।
उन्होंने कहा कि हर बार लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ती है, लेकिन अब तक किसी भी बड़े मामले में जिम्मेदार लोगों को प्रभावी सजा नहीं मिली।
राहुल गांधी ने कहा कि यदि लगातार इतने मामले सामने आने के बावजूद दोषियों को दंड नहीं मिलता, तो यह पूरी व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

'शिक्षा व्यवस्था भरोसे के संकट में'
राहुल गांधी ने कहा कि कभी भारतीय शिक्षा प्रणाली दुनिया की मजबूत व्यवस्थाओं में गिनी जाती थी, लेकिन अब छात्र और अभिभावक दोनों भरोसे के संकट का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं का भविष्य अनिश्चित होता जा रहा है। बार-बार पेपर लीक होने से युवाओं का मनोबल टूट रहा है और कई छात्र मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे तनावपूर्ण माहौल में कुछ छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उठाने की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं।
अभिभावकों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
राहुल गांधी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी केवल छात्रों की चुनौती नहीं है, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक परीक्षा भी बन चुकी है।
उन्होंने दावा किया कि नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी में अभिभावक भारी आर्थिक खर्च करते हैं। कोचिंग, रहने, किताबों और अन्य व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च होते हैं।
ऐसे में यदि पेपर लीक हो जाए और परीक्षा दोबारा करानी पड़े तो सबसे अधिक नुकसान गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को उठाना पड़ता है।

राहुल गांधी की प्रमुख मांगें
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने कई मांगें रखीं—
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें।
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छात्रों के साथ कथित मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
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प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जाए।
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पेपर लीक मामलों के दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राजनीतिक विवाद और तेज होने के संकेत
छात्रों के विरोध प्रदर्शन, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी कांग्रेस ने संसद से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन किए थे। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों की आवाज दबाई जा रही है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है।
राहुल गांधी के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस विषय पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।
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