उत्तर प्रदेश में सड़क अवसंरचना को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में ₹60,000 करोड़ की नई परियोजनाओं, 10,204 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग विकास, जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी, धार्मिक कॉरिडोर और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे समेत कई अहम योजनाओं पर चर्चा हुई।
उत्तर प्रदेश को विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। सोमवार को लखनऊ में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय राजमार्गों एवं प्रमुख सड़क परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उत्तर प्रदेश के सड़क नेटवर्क को और मजबूत बनाने, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, धार्मिक एवं औद्योगिक कॉरिडोर, रोड सेफ्टी और भविष्य की परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आधुनिक सड़क अवसंरचना विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क नेटवर्क निवेश, उद्योग, कृषि, पर्यटन, व्यापार और रोजगार को नई गति देगा तथा राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख केंद्र बन चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति, यूटिलिटी शिफ्टिंग और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए ताकि सभी परियोजनाएं निर्धारित समय सीमा में पूरी हो सकें।

बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने जानकारी दी कि वर्ष 2014 के बाद उत्तर प्रदेश में 10,204 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 9,329 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। अप्रैल 2025 से मई 2026 के बीच 606 किलोमीटर नई परियोजनाओं को मंजूरी मिली, जबकि 1,010 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण पूरा किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अब तक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर लगभग ₹1.94 लाख करोड़ का निवेश किया जा चुका है। इसमें केवल वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग ₹23,445 करोड़ का निवेश शामिल है। राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण में सहयोग, ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए रॉयल्टी मुक्त मिट्टी उपलब्ध कराना तथा रिंग रोड एवं बाईपास परियोजनाओं में लागत साझा करने जैसे निर्णयों से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए इसे विकास की गति का प्रमुख कारण बताया।

बैठक में कई प्रमुख निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा भी की गई। इनमें लगभग ₹13,980 करोड़ की लागत वाली मथुरा-बरेली-सीतारगंज फोरलेन परियोजना, ₹5,904 करोड़ की आगरा-अलीगढ़ फोरलेन परियोजना, आगरा-ग्वालियर-झांसी-नागपुर आर्थिक कॉरिडोर, कानपुर रिंग रोड, जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाली छह लेन सड़क परियोजना तथा मुरादाबाद-काशीपुर चार और छह लेन परियोजना शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि ये सभी परियोजनाएं निर्धारित समय सीमा के अनुसार आगे बढ़ रही हैं और इनके पूरा होने से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर भी विशेष जोर दिया गया। समीक्षा के दौरान सोनौली-गोरखपुर फोरलेन, गाजीपुर-बलिया-बिहार सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रयागराज सदर्न रिंग रोड तथा प्रयागराज-जौनपुर-आजमगढ़-दोहरीघाट राष्ट्रीय राजमार्ग की प्रगति पर चर्चा हुई। इन परियोजनाओं से भारत-नेपाल सीमा, बौद्ध पर्यटन सर्किट और पूर्वी भारत के व्यापारिक मार्गों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
बैठक में अयोध्या रिंग रोड, राम वन गमन मार्ग, राम जानकी मार्ग और 84 कोसी परिक्रमा मार्ग जैसी धार्मिक महत्व की परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने का माध्यम बनेंगी। इनके पूरा होने के बाद अयोध्या, चित्रकूट, प्रयागराज, कौशांबी और नेपाल के जनकपुर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक यात्रा अधिक सुगम होगी।

भविष्य की परियोजनाओं में 742 किलोमीटर लंबे शामली-गोरखपुर एक्सेस कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्ग, उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर, अयोध्या-गोंडा फोरलेन, रीवा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग तथा प्रयागराज में नैनी पुल के समानांतर नए पुल के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र को उच्च क्षमता वाले सड़क नेटवर्क से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
बैठक में सड़क सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। नितिन गडकरी ने कहा कि सड़क निर्माण के साथ सड़क दुर्घटनाओं को कम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में सुरक्षित डिजाइन, ब्लैक स्पॉट सुधार, आधुनिक साइनज और सड़क सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर भी महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया। बरेली बाईपास परियोजना की समीक्षा के दौरान गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां संभव हो, पेड़ों को काटने के बजाय आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनका ट्रांसप्लांटेशन किया जाए, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकें।
इसी दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन भी किया। इस छह लेन एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय लगभग ढाई-तीन घंटे से घटकर 35 से 45 मिनट रह जाएगा।

यह देश के पहले ऐसे एक्सप्रेसवे में शामिल है जहां मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) जैसी आधुनिक तकनीक आधारित टोल प्रणाली लागू की गई है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश का सबसे आधुनिक, सुरक्षित और विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क वाला राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
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