गाजियाबाद के चर्चित सूर्या चौहान हत्याकांड में मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर के बाद अब प्रशासन ने उसके परिवार पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। एक ओर मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सूर्या चौहान के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है, वहीं दूसरी ओर असद के पिता नवाब को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप में नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
सूर्या चौहान हत्याकांड: असद के एनकाउंटर के बाद प्रशासन का बड़ा एक्शन, पीड़ित परिवार को 5 लाख की सहायता, पिता नवाब को अवैध कब्जे का नोटिस
गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में हुए चर्चित सूर्या चौहान हत्याकांड ने पूरे उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चा बटोरी थी। 17 वर्षीय छात्र सूर्या चौहान की हत्या के बाद पुलिस कार्रवाई, मुख्य आरोपी असद का एनकाउंटर और अब प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई इस मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए हुए है। अब इस पूरे घटनाक्रम में दो बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। पहला, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है और दूसरा, मुख्य आरोपी असद के पिता नवाब के खिलाफ सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से परिवार को मिली सहायता
जिलाधिकारी गाजियाबाद की संस्तुति पर मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से खोड़ा कॉलोनी निवासी श्रीमती सरोज, पत्नी कौशलेन्द्र सिंह चौहान को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। यह सहायता उनके पुत्र स्वर्गीय सूर्या चौहान के 28 मई 2026 को हुए निधन के बाद परिवार के भरण-पोषण के लिए प्रदान की गई है।

उपजिलाधिकारी सदर अरुण दीक्षित ने स्वयं पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये का चेक सौंपा। प्रशासन का कहना है कि इस आर्थिक सहायता का उद्देश्य परिवार को कठिन परिस्थितियों में आर्थिक संबल प्रदान करना है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पात्र परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
कैसे हुआ था सूर्या चौहान हत्याकांड?
28 मई 2026 को खोड़ा कॉलोनी के नवनीत विहार क्षेत्र में 17 वर्षीय छात्र सूर्या चौहान की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि मुख्य आरोपी असद और सूर्या के बीच पहले से दोस्ती थी। बताया गया कि बाइक चलाने को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था, जो बाद में खूनी संघर्ष में बदल गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि असद ने अपने पिता नवाब और अन्य साथियों के साथ मिलकर सूर्या को सबक सिखाने की योजना बनाई थी। आरोप है कि नवाब ने ही अपने बेटे असद को उकसाया था। बाद में असद और उसके साथियों ने सूर्या पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
50 हजार के इनामी असद का हुआ एनकाउंटर
हत्या के बाद मुख्य आरोपी असद फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। लगातार तलाश के दौरान पुलिस को उसकी लोकेशन मिली। पुलिस के अनुसार, जब उसे पकड़ने का प्रयास किया गया तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया और अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

असद के एनकाउंटर के बाद मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा। भाजपा नेताओं और कई हिंदू संगठनों ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि कुछ विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए। हालांकि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी यह कहा कि अपराधी का कोई धर्म या जाति नहीं होती और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
पिता नवाब की पूछताछ में हुए अहम खुलासे
असद के एनकाउंटर के बाद पुलिस ने उसके पिता नवाब को हिरासत में लेकर पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में नवाब ने स्वीकार किया कि उसे असद और सूर्या के बीच हुए विवाद की जानकारी थी। उसने यह भी बताया कि उसने असद को सूर्या को सबक सिखाने की बात कही थी।
पुलिस अब इस पूरे मामले में नवाब की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
अवैध कब्जे पर प्रशासन की कार्रवाई
इसी बीच गाजियाबाद प्रशासन ने असद के पिता नवाब के खिलाफ एक और कार्रवाई शुरू कर दी है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार ग्राम खोड़ा, परगना लोनी, तहसील एवं जनपद गाजियाबाद स्थित खसरा संख्या 70 की सरकारी बंजर भूमि पर कथित अवैध कब्जा पाया गया है।
उपजिलाधिकारी सदर द्वारा उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 136 के तहत नोटिस जारी किया गया है। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर नवाब के घर के बाहर नोटिस चस्पा किया। इस दौरान ढोल बजाकर मुनादी भी कराई गई ताकि स्थानीय लोगों को कार्रवाई की जानकारी मिल सके।

15 दिन का समय, फिर चलेगा बुलडोजर
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर संबंधित व्यक्ति स्वयं अवैध कब्जा हटा ले। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो प्रशासन नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगा। साथ ही कार्रवाई में आने वाला खर्च भी संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।
अधिकारियों ने साफ कहा है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त बनाने का अभियान लगातार जारी रहेगा।
कानून और प्रशासन दोनों मोर्चों पर कार्रवाई
सूर्या चौहान हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़ा व्यापक मामला बन गया है। एक ओर पीड़ित परिवार को राहत और सहायता प्रदान की जा रही है, वहीं दूसरी ओर आरोपियों और उनसे जुड़े मामलों पर कानूनी कार्रवाई जारी है।
प्रशासन का कहना है कि शासन की मंशा स्पष्ट है—पात्र लोगों को सहायता मिले और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई हो। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
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