उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद राज्य की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई। अखिलेश यादव के हमले के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस सम्मान समारोह में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के बिना कोई भी व्यक्ति खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता।
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी ने ऐसा सवाल खड़ा किया, जिसका राजनीतिक असर अगले ही दिन दिखाई देने लगा। एक आपराधिक मामले में एफआईआर दर्ज करने के तरीके पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने यहां तक कहा कि अगर इसी तरह जांच होती रही तो सभी आपराधिक मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने पर विचार करना पड़ सकता है और पुलिस को भंग करने जैसी बात भी कही।
इस टिप्पणी के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरा। इसके बाद गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के लोकभवन में आयोजित पुलिस सम्मान समारोह में पुलिस की भूमिका और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर बात रखी।
हालांकि मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट या अखिलेश यादव का नाम लेकर जवाब नहीं दिया, लेकिन उनके बयान को मौजूदा विवाद के संदर्भ में देखा गया।
'बंद चैंबर में टिप्पणी आसान, सुरक्षा के बिना...'
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बंद चैंबर में बैठकर चिंतन करना और टिप्पणी करना अलग बात है, लेकिन बाहर सुरक्षित माहौल होना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर उसे सुरक्षा से बाहर कर दिया जाए तो उसे भी 'भीगी बिल्ली' बनने में देर नहीं लगेगी।
योगी ने इसी संदर्भ में यूपी पुलिस के थीम 'आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प' का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस जनता को सुरक्षा का एहसास कराने के लिए काम कर रही है।
मुख्यमंत्री का तर्क था कि सुरक्षा सिर्फ किसी एक वर्ग या व्यक्ति की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बिना सुरक्षा के कोई भी व्यक्ति पूरी तरह निश्चिंत नहीं रह सकता। कार्यक्रम में उन्होंने पुलिसकर्मियों के साहस और जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया।
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी की वजह क्या थी?
दरअसल, विवाद की शुरुआत एक आपराधिक मामले की एफआईआर से हुई।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि जिस व्यक्ति को शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर मौके पर पकड़कर पुलिस के हवाले किया था, एफआईआर में आरोपी के नाम की जगह 'अज्ञात' लिखा गया।
अदालत ने सवाल किया कि जब व्यक्ति को मौके पर पकड़ा गया था तो उसे अज्ञात क्यों बताया गया? सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की कार्रवाई पर सार्वजनिक भरोसे को लेकर भी सवाल उठाया।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि अगर पुलिस इसी तरह मामलों को देखती है तो लोगों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। अदालत ने जांच में कथित तौर पर एजेंडा या कवर-अप जैसी स्थिति की आशंका पर भी कड़ी टिप्पणी की और कहा कि जरूरत पड़ी तो सभी यूपी पुलिस जांच सीबीआई को सौंपने पर विचार किया जा सकता है।
अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारी को अगली सुनवाई में स्पष्टीकरण देने के लिए भी बुलाया है। यानी मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां इसी विशेष मामले की सुनवाई के संदर्भ में आई हैं।
योगी ने 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर क्या कहा?
पुलिस सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार से पहले के दौर की कानून-व्यवस्था का भी जिक्र किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ ही टेढ़ी हो तो कानून-व्यवस्था को मजबूत करना मुश्किल होता है। उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में माफिया और अपराधियों का प्रभाव इतना था कि सत्ता में बैठे लोगों को उनके सामने झुकना पड़ता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय अपराध और माफिया के प्रभाव के कारण आम लोगों में सुरक्षा को लेकर भय था, जबकि अब यूपी पुलिस की पहचान बदली है।
कार्यक्रम में उन्होंने प्रदेश में सात पुलिस कमिश्नरेट के काम करने का भी उल्लेख किया और पुलिस की वर्तमान व्यवस्था को पहले के मुकाबले अलग बताया।
हालांकि 2017 से पहले और उसके बाद की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार और विपक्ष के दावे अलग-अलग रहे हैं। इसलिए मुख्यमंत्री के इस हिस्से को उनके राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए।
87 इंटरसेप्टर वाहन, पुलिसकर्मियों का सम्मान
लोकभवन के कार्यक्रम में केवल कानून-व्यवस्था पर चर्चा नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया और आधुनिक उपकरणों से लैस 87 इंटरसेप्टर वाहनों को भी हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में वीरता और उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक 'संघर्ष' का भी विमोचन किया गया। प्रकाश सिंह पुलिस सुधार और कानून-व्यवस्था से जुड़े विषयों पर लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं।
प्रकाश सिंह का जिक्र और पुरानी यादें
मुख्यमंत्री योगी ने प्रकाश सिंह के कार्यकाल और उनके अनुभवों का उल्लेख करते हुए अपने छात्र जीवन का एक संस्मरण भी साझा किया।
उन्होंने कहा कि जब वह कॉलेज में पढ़ते थे, तब उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में आतंकवाद का प्रभाव था और लोगों के बीच भय का माहौल रहता था। उनके मुताबिक, ऐसे समय में प्रकाश सिंह जैसे अधिकारियों ने कठिन परिस्थितियों में कड़े फैसले लिए और तराई क्षेत्र में शांति बहाल करने में भूमिका निभाई।
योगी ने प्रकाश सिंह के असम, नागालैंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर सहित अशांत क्षेत्रों में काम करने के अनुभव को देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया।
अब असली सवाल यही है...
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी एक विशेष मामले में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने और जांच के तरीके से जुड़ी है, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जवाब व्यापक रूप से सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस की भूमिका और राज्य की कानून-व्यवस्था पर केंद्रित रहा।
एक तरफ अदालत ने पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता और जनता के भरोसे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ राज्य सरकार यूपी पुलिस के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव को रेखांकित कर रही है।
अब आगे निगाह इस बात पर रहेगी कि जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं, उसमें पुलिस की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और अदालत अगली सुनवाई में क्या रुख अपनाती है।
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