दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के साथ प्रदूषण का संकट फिर दस्तक देने की तैयारी में है। दिल्ली सरकार ने 37 प्रदूषण हॉटस्पॉट, वाहनों, सड़क की धूल, कचरा जलाने, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक प्रदूषण को लेकर कई फैसले किए हैं। इस बीच पिछले वर्षों के AQI आंकड़े बताते हैं कि चुनौती अभी भी बड़ी है।
दिल्ली की सर्दी आते ही मौसम के साथ एक और चीज चर्चा में आ जाती है—AQI। अक्टूबर से लेकर जनवरी तक राजधानी की हवा में प्रदूषण बढ़ने की तस्वीर हर साल सामने आती रही है। धुंध, धुएं और स्मॉग के बीच लोगों के सामने वही सवाल खड़ा होता है कि आखिर साफ हवा कब मिलेगी?
इस बार दिल्ली सरकार ने सर्दियों से पहले ही तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को हुई बैठक में प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए कई फैसले लिए गए। लेकिन असली परीक्षा अब इन फैसलों को जमीन पर लागू करने की होगी।
37 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर जनभागीदारी
दिल्ली के 37 चिन्हित प्रदूषण हॉटस्पॉट पर 10 अक्टूबर तक जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि हर इलाके में प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों को पहचानकर उसी के अनुसार कार्रवाई तय की जाएगी।
प्रदूषण का कारण हर इलाके में एक जैसा नहीं होता। कहीं ट्रैफिक, कहीं सड़क की धूल, कहीं निर्माण और कहीं खुले में कचरा जलाना बड़ी समस्या हो सकता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर निगरानी और कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।
500 पेट्रोल पंपों पर PUC की जांच
वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली के सभी 500 स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली वाले पेट्रोल पंपों पर 'नो PUC, नो फ्यूल' अभियान चलाया जाएगा।
वाहन चालकों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC की जांच के साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

दिल्ली सरकार का फोकस सिर्फ निजी वाहनों पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने पर भी है। 1 से 10 अक्टूबर के बीच दिल्ली मेट्रो के 'सारथी' ऐप को मिशन मोड में प्रमोट करने की योजना है। इसके लिए RWA और जनप्रतिनिधियों के साथ डाउनलोड कैंप लगाए जाएंगे।
1,193 किलोमीटर सड़क का काम पूरा
सड़क की धूल प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के मुताबिक, 2026 में 3,065 किलोमीटर सड़क के पुनर्निर्माण का लक्ष्य रखा गया था और 20 सितंबर तक 1,193 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका था।
प्रदूषण और यातायात वाले इलाकों में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, RWA, व्यापारियों और ट्रैफिक पुलिस के साथ नियमित निरीक्षण की भी योजना है।
कचरा जलाने और निर्माण पर निगरानी
खुले में कचरा जलाने पर रोक के लिए वार्ड स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। 15 अक्टूबर तक वार्ड और जिला स्तर पर निगरानी दल तैनात करने की योजना है।
वहीं 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली तोड़फोड़ और बाहरी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने का फैसला किया गया है।
अगर प्रदूषण की स्थिति गंभीर होती है तो प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध, पार्किंग शुल्क दोगुना करना, कार्यालयों के समय में बदलाव और 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम जैसे कदम भी लागू किए जा सकते हैं।
इसके अलावा 1 नवंबर 2026 से दिल्ली के बाहर पंजीकृत और BS-6 से नीचे के उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इससे छूट दी गई है।
AI से औद्योगिक प्रदूषण पर निगरानी
औद्योगिक प्रदूषण पर निगरानी मजबूत करने के लिए AI आधारित नियंत्रण केंद्र शुरू करने की योजना है। निगरानी केंद्रों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 की जाएगी और 334 प्रवर्तन दल तैनात किए जाएंगे।
सरकार ने इससे पहले भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं।
3 जून 2025 को 25 सूत्री वायु प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना शुरू की गई थी। इसमें सड़क की धूल, निर्माण और तोड़फोड़ का मलबा, वाहन प्रदूषण, खुले में कचरा और जैव ईंधन जलाना, औद्योगिक प्रदूषण, निगरानी, हरियाली और जनभागीदारी जैसे मुद्दे शामिल थे।
इसके तहत 76 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें, 283 पानी के छिड़काव वाली मशीनें और टैंकर तथा 406 एंटी-स्मॉग गन तैनात की गईं। धूल नियंत्रण नियमों की निगरानी के लिए 536 गश्ती दल लगाए गए।
500 वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र वाली निर्माण और तोड़फोड़ साइटों के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया। 20 जनवरी 2026 तक 1,742 निर्माण साइटें पंजीकृत थीं, जिनमें 808 सक्रिय थीं।
वहीं 5,000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाली 281 सक्रिय साइटों पर 608 एंटी-स्मॉग गन तैनात की गईं। निर्माण और तोड़फोड़ के कचरे के 100 प्रतिशत प्रसंस्करण और पुनर्चक्रित उत्पादों के दोबारा इस्तेमाल का लक्ष्य भी रखा गया।

पांच साल में कैसी रही दिल्ली की हवा?
अब सवाल है कि इन प्रयासों के बीच हवा की स्थिति कैसी रही?
उपलब्ध AQI आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में जनवरी में 2 दिन मध्यम, 13 दिन खराब, 12 दिन अस्वस्थ और 4 दिन खतरनाक रहे। नवंबर में 7 दिन अस्वस्थ, 21 दिन गंभीर और 2 दिन खतरनाक रहे। दिसंबर में 7 दिन अस्वस्थ, 22 दिन गंभीर और 2 दिन खतरनाक दर्ज किए गए।
2023 में जनवरी में 1 दिन खराब, 9 दिन अस्वस्थ, 18 दिन गंभीर और 3 दिन खतरनाक रहे। अक्टूबर में 12 दिन खराब, 14 दिन अस्वस्थ और 5 दिन गंभीर रहे। नवंबर में 4 दिन अस्वस्थ, 12 दिन गंभीर और 13 दिन खतरनाक रहे। दिसंबर में 3 दिन अस्वस्थ, 22 दिन गंभीर और 6 दिन खतरनाक रहे।
2024 में जनवरी में 24 दिन खराब और 7 दिन गंभीर रहे। अक्टूबर में 11 दिन खराब, 1 दिन अस्वस्थ और 19 दिन गंभीर रहे। नवंबर में 1 दिन अस्वस्थ, 19 दिन गंभीर और 10 दिन खतरनाक रहे। दिसंबर में 16 दिन अस्वस्थ, 8 दिन गंभीर और 7 दिन खतरनाक रहे।
2025 में जनवरी में 10 दिन मध्यम, 20 दिन खराब और 1 दिन खतरनाक रहा। अक्टूबर में 1 दिन मध्यम, 6 दिन खराब, 10 दिन अस्वस्थ, 12 दिन गंभीर और 2 दिन खतरनाक रहे। नवंबर में 2 दिन अस्वस्थ, 6 दिन गंभीर और 22 दिन खतरनाक रहे। दिसंबर में 11 दिन अस्वस्थ और 20 दिन गंभीर रहे।
सितंबर 2026 तक क्या तस्वीर?
सितंबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 47 दिन मध्यम, 134 दिन खराब, 47 दिन अस्वस्थ, 29 दिन गंभीर और 14 दिन खतरनाक श्रेणी में रहे।
यानी सितंबर तक सबसे ज्यादा 134 दिन खराब श्रेणी में दर्ज किए गए। हालांकि 2026 के अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के आंकड़े अभी बाकी हैं, इसलिए पूरे साल की अंतिम तस्वीर फिलहाल सामने नहीं है।
अब असली सवाल हवा का है
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने की तैयारी इस बार कई मोर्चों पर दिखाई दे रही है—हॉटस्पॉट, PUC, सार्वजनिक परिवहन, सड़कें, कचरा, निर्माण, पुराने वाहन और औद्योगिक निगरानी।
लेकिन योजनाओं की असली परीक्षा उनके ऐलान में नहीं, बल्कि अमल में होगी।
क्योंकि दिल्ली वालों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कितनी बैठकें हुईं या कितनी मशीनें तैनात हुईं। सवाल है कि इस सर्दी उन्हें कितनी साफ हवा में सांस लेने को मिलेगी।
अब नजर अक्टूबर से आगे के महीनों पर रहेगी। आंकड़े बताएंगे कि इस बार सिर्फ कार्रवाई बढ़ी या हवा की गुणवत्ता में भी कोई ठोस बदलाव आया।
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