नई दिल्ली में भाजपा के अंतरराष्ट्रीय मिलन कार्यक्रम ‘भाजपा को जानो’ के तहत श्रीलंका की सत्ताधारी जनता विमुक्ति पेरमुणा (JVP) का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली भाजपा कार्यालय पहुंचा। पार्टी महामंत्री एम. तिलविन सिल्वा के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल का दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा समेत पार्टी पदाधिकारियों ने स्वागत किया। इस दौरान भारत-श्रीलंका संबंधों, पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और लोकतंत्र, पारदर्शिता व जनकल्याण जैसे साझा मूल्यों पर चर्चा हुई।
दिल्ली में बुधवार को भारत और श्रीलंका के राजनीतिक रिश्तों से जुड़ी एक अहम मुलाकात देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी के अंतरराष्ट्रीय मिलन कार्यक्रम ‘भाजपा को जानो’ के तहत श्रीलंका की सत्ताधारी पार्टी जनता विमुक्ति पेरमुणा (JVP) का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली भाजपा कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व JVP के पार्टी महामंत्री एम. तिलविन सिल्वा ने किया।
मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और श्रीलंका के बीच आर्थिक, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य और संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार चर्चा में रहा है। JVP और CPI(M) के बीच भी 2026 में आर्थिक स्थिरीकरण, भ्रष्टाचार-रोधी पहलों और शासन सुधारों को लेकर बातचीत की रिपोर्ट सामने आई है।
JVP प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन रहा शामिल?
श्रीलंका से आए प्रतिनिधिमंडल में JVP केंद्रीय समिति की सदस्य चंद्रिका अधिकारी, श्रीलंका के सांसद अबूबकर अथम्बावा, जाफना नगर परिषद के सदस्य काबिलन सुंदरमूर्ति और श्रीलंका संसद नेता की समन्वय सचिव बी.आर.के. मधुभाषिणी शामिल रहीं।

दिल्ली भाजपा कार्यालय पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल का पार्टी की ओर से औपचारिक स्वागत किया गया। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, संगठन महामंत्री पवन राणा, वरिष्ठ पदाधिकारी विष्णु मित्तल, योगिता सिंह, विजय सोलंकी और ऋचा पांडेय ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट किए।
इस अवसर पर भाजपा के विदेश विभाग के पदाधिकारी विजय चौथाईवाले और नकुल भारद्वाज के साथ दिल्ली भाजपा के मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर और कार्यालय मंत्री कैलाश जैन भी मौजूद रहे।
‘भारत-श्रीलंका संबंध सिर्फ कूटनीतिक नहीं’
प्रतिनिधिमंडल के स्वागत में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने भारत और श्रीलंका के रिश्तों को केवल राजनीतिक या कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं बताया।
उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका के संबंध सभ्यता, संस्कृति और आस्था से जुड़े हुए हैं। उन्होंने रामायण काल से लेकर बौद्ध धर्म के प्रसार तक दोनों देशों के ऐतिहासिक संपर्क का उल्लेख किया।
हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि समुद्र दोनों देशों को भले अलग करता है, लेकिन लोगों के बीच के संबंध भारत और श्रीलंका को जोड़ते हैं। उन्होंने श्रीलंका में रहने वाले तमिल, बौद्ध, सिंहल और मुस्लिम समुदायों के साथ भारत के संबंधों को परिवार जैसे रिश्ते के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के दौर में पड़ोसी देशों के साथ मित्रता और सहयोग पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

मोदी सरकार के कार्यकाल का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन में हर्ष मल्होत्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-श्रीलंका संबंधों में आए बदलाव का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहायता, ऊर्जा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में काम हुआ है।
उन्होंने कोविड महामारी के दौरान भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल और श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत की ओर से दी गई सहायता को दोनों देशों के सहयोग के उदाहरण के तौर पर सामने रखा।
यह उल्लेख ऐसे समय में आया है जब श्रीलंका भारत, चीन और अन्य साझेदारों के साथ आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को संतुलित करते हुए आगे बढ़ रहा है।
JVP के सत्ता में आने के बाद बदलाव का जिक्र
हर्ष मल्होत्रा ने अपने संबोधन में JVP के सत्ता में आने के बाद श्रीलंका में स्थिरता और विकास से जुड़ी पहलों का भी स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि लोकतंत्र, पारदर्शिता और जनकल्याण जैसे साझा मूल्यों के आधार पर दोनों देशों के बीच सहयोग आगे बढ़े।

उन्होंने कहा कि मजबूत पड़ोसी ही एक मजबूत क्षेत्र का आधार बनते हैं।
श्रीलंका में वर्तमान सरकार का राजनीतिक आधार National People's Power (NPP) गठबंधन है, जिसमें JVP प्रमुख घटक पार्टी है। 2026 में JVP के महासचिव तिलविन सिल्वा के नेतृत्व में पार्टी की आर्थिक सुधारों और शासन से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका की रिपोर्ट भी सामने आई है।
‘भाजपा को जानो’ के जरिए अंतरराष्ट्रीय संवाद
दिल्ली भाजपा कार्यालय में हुई यह मुलाकात भाजपा के ‘भाजपा को जानो’ अभियान का हिस्सा थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विदेशी राजनीतिक दलों और प्रतिनिधियों के साथ संवाद के माध्यम से भारत की राजनीति, लोकतांत्रिक व्यवस्था और भाजपा के कामकाज से परिचित कराना रहा है। भाजपा के आधिकारिक प्रकाशन में भी ‘भाजपा को जानो’ के तहत विदेशी और अन्य प्रतिनिधियों के साथ संवाद का उल्लेख मिलता है।
इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों के साथ-साथ मौजूदा क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में सहयोग की जरूरत पर जोर दिया गया।
‘पड़ोसी पहले’ पर जोर
अपने स्वागत भाषण के अंत में हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली भाजपा भारत और श्रीलंका की मैत्री को आगे बढ़ाने में हर संभव सहयोग करेगी।
उन्होंने ‘पड़ोसी पहले’ की नीति को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग को और आगे ले जाने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, दिल्ली भाजपा कार्यालय में हुई यह मुलाकात भारत-श्रीलंका के बीच राजनीतिक संपर्कों के साथ-साथ दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को रेखांकित करने वाला संवाद रही। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से सहयोग, मित्रता और साझा मूल्यों पर आधारित संबंधों को आगे बढ़ाने की बात सामने आई।
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