गाजियाबाद के नंदग्राम निवासी एवं असम राइफल्स के वीर जवान स्वर्गीय चंद्र मोहन सिंह को हिंडन घाट पर पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सैन्य टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर राष्ट्र के वीर सपूत को अंतिम सलामी दी। इस दौरान प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिकों ने श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।
देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर कभी विदा नहीं होते, वे हमेशा राष्ट्र की स्मृतियों में अमर रहते हैं। ऐसा ही भावुक और गर्व से भरा दृश्य गुरुवार को गाजियाबाद के हिंडन घाट पर देखने को मिला, जब असम राइफल्स के वीर जवान स्वर्गीय चंद्र मोहन सिंह का पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
तिरंगे में लिपटे वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए न केवल उनका परिवार, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे। पूरे वातावरण में शोक, सम्मान और गर्व का अद्भुत संगम दिखाई दिया। हर आंख नम थी, लेकिन हर चेहरे पर देश के इस वीर बेटे के लिए सम्मान भी साफ झलक रहा था।

अंतिम संस्कार के दौरान सैन्य टुकड़ी ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद जवान को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया। राष्ट्रध्वज में लिपटे पार्थिव शरीर को अंतिम सलामी देते हुए सैनिकों ने अपने वीर साथी के अद्वितीय साहस और राष्ट्र सेवा के प्रति उनके समर्पण को नमन किया।
बंदूकों की सलामी और सैन्य सम्मान के बीच जब अंतिम विदाई की रस्म पूरी हुई तो पूरा वातावरण भावुक हो उठा। उपस्थित लोगों ने "भारत माता की जय" और "अमर रहे" जैसे नारों के साथ वीर जवान को अंतिम विदाई दी।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
गाजियाबाद प्रशासन की ओर से पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। हिंडन घाट पर प्रशासन और सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे सम्मान और गरिमा के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सम्पन्न हुई।
यह केवल एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि पूरे जिले की ओर से अपने वीर सपूत के प्रति कृतज्ञता और सम्मान की अभिव्यक्ति थी।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल, उप जिलाधिकारी (सदर) अरुण दीक्षित, 56 फील्ड रेजिमेंट मेरठ के कर्नल नवीन शर्मा सहित अनेक प्रशासनिक, सैन्य एवं सामाजिक प्रतिनिधियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवान को श्रद्धांजलि दी।
सभी ने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि राष्ट्र उनके इस सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
वीर जवान स्वर्गीय चंद्र मोहन सिंह अपने पीछे पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
उनके परिवार में—
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पत्नी श्रीमती मंजू देवी रावत
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पुत्र राहुल सिंह रावत
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पुत्री रितिका रावत
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पुत्री यशिका रावत
शामिल हैं।
अंतिम विदाई के दौरान परिवार का दर्द हर किसी की आंखें नम कर रहा था। उपस्थित लोगों ने परिजनों को ढांढस बंधाया और इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।
"देश हमेशा ऋणी रहेगा"
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कहा कि स्वर्गीय चंद्र मोहन सिंह ने राष्ट्र सेवा को अपने जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य बनाया और अंतिम सांस तक अपने कर्तव्य का निर्वहन किया।
उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए उनका समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। ऐसे वीर सपूतों के कारण ही देश सुरक्षित है और पूरा राष्ट्र उनके बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।

दो मिनट का मौन रखकर दी श्रद्धांजलि
अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
साथ ही ईश्वर से प्रार्थना की गई कि वे शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान कई लोगों की आंखें नम थीं। हर व्यक्ति के मन में यही भावना थी कि देश ने एक बहादुर सैनिक खो दिया, लेकिन उनकी वीरता सदैव अमर रहेगी।
गाजियाबाद ने अपने वीर सपूत को किया नमन
नंदग्राम से लेकर हिंडन घाट तक पूरे जिले में शोक और गर्व का वातावरण रहा। स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
लोगों का कहना था कि स्वर्गीय चंद्र मोहन सिंह ने जिस साहस और समर्पण के साथ देश की सेवा की, वह हर युवा के लिए प्रेरणा है। उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
बलिदान जो हमेशा याद रखा जाएगा
देश की रक्षा करने वाले सैनिक केवल सीमाओं की सुरक्षा नहीं करते, बल्कि करोड़ों देशवासियों के विश्वास और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। स्वर्गीय चंद्र मोहन सिंह का जीवन इसी कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण रहा।
उनका सर्वोच्च बलिदान केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का गर्व है। आने वाली पीढ़ियां उनके साहस, देशभक्ति और समर्पण से प्रेरणा लेती रहेंगी।
गाजियाबाद ने आज अपने वीर बेटे को नम आंखों से विदा जरूर किया है, लेकिन उनकी शौर्यगाथा हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।
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