दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए सुरक्षित, किफायती और पर्याप्त हॉस्टल की मांग को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस ने मार्च निकाला। IYC राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने छात्रों से संवाद कर हॉस्टल की कमी, बढ़ते किराए, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सुनीं। मार्च आर्ट्स फैकल्टी से शुरू होकर किरोड़ीमल कॉलेज पर समाप्त हुआ।
दिल्ली विश्वविद्यालय का कैंपस इन दिनों सिर्फ पढ़ाई और परीक्षाओं की वजह से चर्चा में नहीं है। छात्रों के सामने एक ऐसा सवाल भी खड़ा है, जिसका सीधा संबंध उनकी पढ़ाई, सुरक्षा और परिवार की आर्थिक स्थिति से है—दिल्ली में पढ़ने आए छात्रों को रहने के लिए सुरक्षित और किफायती जगह आखिर मिलेगी कहां?
इसी सवाल को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने दिल्ली विश्वविद्यालय में मार्च निकाला। संगठन ने विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती हॉस्टल उपलब्ध कराने की मांग उठाई। खास तौर पर दिल्ली से बाहर के राज्यों और देश के अलग-अलग हिस्सों से पढ़ाई करने आने वाले छात्रों की आवास संबंधी परेशानियों को मार्च के केंद्र में रखा गया।
मार्च में भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब शामिल हुए। उन्होंने छात्रों से सीधे संवाद किया और हॉस्टल की कमी, निजी PG और किराए के बढ़ते खर्च, सुरक्षा तथा बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी उनकी समस्याएं सुनीं। IYC के मुताबिक, मार्च आर्ट्स फैकल्टी से शुरू होकर किरोड़ीमल कॉलेज पर समाप्त हुआ। दिल्ली युवा कांग्रेस अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा समेत बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए।

दिल्ली विश्वविद्यालय के आधिकारिक छात्र संसाधन पोर्टल के मुताबिक, विश्वविद्यालय के 20 हॉस्टल आउटस्टेशन छात्रों को आवास सुविधा देते हैं। इनमें उत्तर और दक्षिण कैंपस के हॉस्टल शामिल हैं। विश्वविद्यालय यह भी बताता है कि इन हॉस्टलों में भोजन, सुरक्षा, चिकित्सा और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
लेकिन छात्रों की संख्या और उपलब्ध आवास के बीच अंतर का मुद्दा लगातार सामने आता रहा है। हाल के दिनों में दिल्ली में छात्र आवास की सुरक्षा को लेकर हुई घटनाओं ने इस बहस को और तेज कर दिया है। एक हालिया विश्लेषण में दिल्ली विश्वविद्यालय के हॉस्टल की कमी और निजी PG पर छात्रों की निर्भरता को गंभीर मुद्दे के रूप में रेखांकित किया गया।
यही वजह है कि IYC ने मांग की है कि छात्रों को महंगे और असुरक्षित निजी आवासों पर निर्भर रहने के बजाय विश्वविद्यालय और सरकार की ओर से पर्याप्त संस्थागत आवास उपलब्ध कराया जाए।
छात्रों को संबोधित करते हुए IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि दूसरे राज्यों और देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली पढ़ने आने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल कोई विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत है।
उनके मुताबिक छात्रों को महंगे किराए, असुरक्षित आवास और अपर्याप्त सुविधाओं की चिंता करने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने का अवसर मिलना चाहिए।

चिब ने सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से घोषणाओं के बजाय जमीन पर काम करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सुरक्षित, किफायती और सम्मानजनक आवास की व्यवस्था होनी चाहिए और हॉस्टल की कमी का असर खास तौर पर सामान्य तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों पर पड़ता है।
उनका कहना था कि ऐसे परिवारों के छात्रों को निजी आवास पर अपनी पारिवारिक आय का बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ सकता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU चुनाव भी 18 सितंबर 2026 को होने हैं। इस बार छात्र सुरक्षा और आवास जैसे मुद्दे चुनावी बहस में प्रमुखता से दिखाई दे रहे हैं। हालिया चुनावी रिपोर्टों में भी छात्र आवास और सुरक्षा को प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया गया है।
इसी राजनीतिक माहौल के बीच उदय भानु चिब ने छात्रों से DUSU चुनाव में छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने छात्रों से NSUI पैनल का समर्थन करने को कहा और इसे बेहतर हॉस्टल, सुरक्षित कैंपस, किफायती सुविधाओं तथा विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही से जोड़ा।
यह अपील भारतीय युवा कांग्रेस और NSUI के राजनीतिक रुख का हिस्सा है, इसलिए इसे संगठन की चुनावी अपील के रूप में देखा जाना चाहिए।

दिल्ली युवा कांग्रेस अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने कहा कि छात्र किसी से एहसान नहीं मांग रहे हैं, बल्कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा कांग्रेस दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और किफायती शिक्षा, सम्मान तथा समान अवसर की मांग करने वाले युवाओं के साथ खड़ी है।
IYC ने विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के सामने कई मांगें रखीं। इनमें पर्याप्त हॉस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना, किफायती छात्र आवास उपलब्ध कराना, कैंपस सुरक्षा मजबूत करना, बुनियादी सुविधाओं में सुधार और विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है।
संगठन ने लंबित हॉस्टल परियोजनाओं में तेजी लाने की भी मांग की है। साथ ही यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि दिल्ली से बाहर से आने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को असुरक्षित या अत्यधिक महंगे निजी आवास में रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।
दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की मांग कोई नई मांग नहीं है, लेकिन हाल की छात्र आवास संबंधी घटनाओं ने इसे सुरक्षा के सवाल से जोड़ दिया है। अब बहस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि कितने कमरे उपलब्ध हैं, बल्कि यह भी है कि जो छात्र कैंपस से बाहर रहने को मजबूर हैं, उनके लिए आवास कितना सुरक्षित, किफायती और निगरानी के दायरे में है।
दिल्ली सरकार ने भी हाल में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए 10,000 छात्रों की क्षमता वाले हॉस्टल बनाने की योजना की घोषणा की है। इसके लिए आवास की जरूरत और संभावित स्थानों का सर्वे कराने की बात कही गई है।
अब देखना यह होगा कि हॉस्टल को लेकर उठ रही राजनीतिक आवाजें और सरकारी घोषणाएं जमीन पर कितनी तेजी से बदलती हैं। क्योंकि दिल्ली आने वाले छात्र के लिए हॉस्टल सिर्फ रहने की जगह नहीं—उसकी पढ़ाई, सुरक्षा और परिवार की आर्थिक क्षमता से जुड़ा सवाल है।
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