ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के विशेष सत्र में एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प और निर्यात क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ने की रणनीति साझा की। डिजिटल मार्केटिंग, मजबूत सप्लाई चेन, हाईटेक स्टूडियो, ई-कॉमर्स और बेहतर लॉजिस्टिक्स के जरिए स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर जोर दिया गया।
ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक विशेष सत्र में उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प और निर्यात कारोबार को लेकर सरकार ने अपनी तस्वीर साफ कर दी है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि यूपी के कारीगर क्या बना रहे हैं, बल्कि असली चुनौती यह है कि उनके बनाए उत्पाद दुनिया के बाजार तक कितनी तेजी और बेहतर तरीके से पहुंचेंगे?
इसी दिशा में सरकार डिजिटल मार्केट, मजबूत सप्लाई चेन, आधुनिक पैकेजिंग और तकनीक आधारित सुविधाओं पर जोर दे रही है। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के विशेष सत्र में एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि ग्रेटर नोएडा का इंडिया एक्सपो सेंटर बदलते भारत और बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर पेश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश को देश के मजबूत ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित करने की दिशा में काम हुआ है। सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ केवल बड़े औद्योगिक केंद्रों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि गांवों, कारीगरों, महिला उद्यमियों और छोटे कारोबारियों तक पहुंचाना है।

भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उद्योग और निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। उनके मुताबिक, मौजूदा सरकार के कार्यकाल में औद्योगिक इकाइयों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और प्रदेश का निर्यात दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है।
सरकार अब अगले चरण में डिजिटल बाजार और सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में एक्सपोर्ट हब विकसित करने पर जोर दे रही है।
वाराणसी जैसे प्रमुख केंद्रों में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग और कस्टम्स से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका मकसद स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
हर जिले का कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनेगा हाईटेक स्टूडियो
सरकार की योजना सिर्फ उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उत्पाद दुनिया के खरीदारों के सामने किस तरह पेश किया जाएगा, इस पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।
भूपेंद्र चौधरी ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में मौजूद कॉमन फैसिलिटी सेंटर को हाईटेक स्टूडियो के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इन केंद्रों में ब्रांडिंग, प्रमोशन, 3डी फोटोग्राफी, हाई-डेफिनिशन फोटोग्राफी और पैकेजिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे छोटे कारोबारी और कारीगर अपने उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेहतर तरीके से प्रदर्शित कर सकेंगे।
यानी जिस कारीगर के पास बड़े स्टूडियो या महंगी मार्केटिंग टीम की सुविधा नहीं है, उसे भी अपने उत्पाद को वैश्विक खरीदार के सामने पेश करने के लिए आधुनिक माध्यम उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को ई-कॉमर्स से जोड़ने पर जोर
हस्तशिल्प क्षेत्र में महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। सरकार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए इन समूहों को बड़े बाजार से जोड़ने की कोशिश कर रही है।
इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को केवल आसपास के बाजार तक सीमित रखने के बजाय उन्हें देश और विदेश के खरीदारों तक पहुंचाना है।
भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी, भदोही के कालीन और मुरादाबाद के हस्तशिल्प जैसे उत्पाद पहले से अपनी पहचान रखते हैं। अब डिजिटल प्रमाणन, ऑनलाइन परमिट और ट्रेसबिलिटी जैसी व्यवस्थाओं के जरिए इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच को और आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

सत्र में आयुक्त (उद्योग) के. विजयेंद्र पांडियन ने हस्तशिल्प कारोबारियों को बदलते बाजार की जरूरतों के मुताबिक अपनी रणनीति बदलने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि भविष्य में कारोबार तेजी से डिजिटल होने वाला है। ऐसे में हस्तशिल्प उद्यमियों को इंस्टाग्राम, फेसबुक समेत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देना होगा।
उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश एमएसएमई और हस्तशिल्प का बड़ा केंद्र है और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कारोबारियों से कहा कि केवल ट्रेडिंग तक सीमित रहने के बजाय उन्हें अपने उत्पाद की गुणवत्ता, मात्रा, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बेहतर मार्जिन पर भी काम करना चाहिए।
जिले के खास उत्पाद बन सकते हैं ग्लोबल ब्रांड
के. विजयेंद्र पांडियन ने जनपदों के विशिष्ट उत्पादों की पहचान कर उन्हें मॉडल के तौर पर विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि होम डेकोर समेत अलग-अलग श्रेणियों के उत्पादों के लिए डिजिटल और फिजिकल शोरूम तैयार किए जा सकते हैं।
इसके साथ ही एक्सपोर्ट चैन के जरिए विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने की जरूरत बताई गई।
उन्होंने प्रतिभागियों से विशेषज्ञों के सत्रों को ध्यान से सुनने, सफल कारोबार मॉडलों का अध्ययन करने और अपनी व्यावसायिक चुनौतियों से जुड़े सवालों के जवाब हासिल कर उन्हें कारोबार में लागू करने का आह्वान किया।
अब असली चुनौती बाजार तक पहुंच की
उत्तर प्रदेश के पास सहारनपुर, भदोही, मुरादाबाद, वाराणसी जैसे कई ऐसे केंद्र हैं, जिनके उत्पादों की अपनी अलग पहचान है। लेकिन वैश्विक बाजार में सिर्फ अच्छा उत्पाद होना पर्याप्त नहीं है। वहां पहुंचने के लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, लॉजिस्टिक्स और प्रमाणन जैसी पूरी व्यवस्था को एक साथ मजबूत करना पड़ता है।
ग्रेटर नोएडा के इस सत्र में सामने आया रोडमैप इसी बदलाव की ओर इशारा करता है। सरकार की कोशिश है कि यूपी का स्थानीय हुनर केवल स्थानीय पहचान बनकर न रह जाए, बल्कि तकनीक और मजबूत सप्लाई चेन के सहारे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी जगह बनाए।
अब देखने वाली बात यही होगी कि हाईटेक स्टूडियो, डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स और एक्सपोर्ट हब की यह पहल जमीन पर कितनी तेजी से उतरती है और यूपी के छोटे कारीगरों का उत्पाद वैश्विक खरीदारों तक कितनी मजबूती से पहुंचता है।
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