मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ‘नंदा देवी’ एलपीजी टैंकर 46,500 मीट्रिक टन गैस लेकर गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पहुंचा। यह होर्मुज से गुजरने वाला दूसरा भारतीय जहाज है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। खतरनाक हालातों को पार करते हुए MT Nanda Devi नामक एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पहुंच गया है। इस जहाज में 46,500 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लदी हुई है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
यह टैंकर युद्ध प्रभावित Strait of Hormuz को पार करके भारत पहुंचा है। इस समय यह समुद्री मार्ग वैश्विक तनाव का केंद्र बना हुआ है, जहां लगातार हमलों और सुरक्षा खतरों की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में इस जहाज का सुरक्षित भारत पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
Deendayal Port Authority के चेयरमैन Sushil Kumar Singh ने स्वयं जहाज का दौरा किया और इसके कैप्टन व क्रू से मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “नंदा देवी” मंगलवार सुबह करीब 2:30 बजे वाडिनार पहुंचा और अब गहरे समुद्र में एंकरेज क्षेत्र में शिप-टू-शिप (STS) ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस एलपीजी को दूसरे जहाज MT BW Birch में ट्रांसफर किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया समुद्र में ही की जाएगी, ताकि तेजी से गैस की आपूर्ति को आगे बढ़ाया जा सके।

इससे पहले भी एक और एलपीजी टैंकर MT Shivalik भारत पहुंचा था, जिसने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर 46,000 मीट्रिक टन से अधिक गैस पहुंचाई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, उस जहाज में मौजूद एलपीजी लगभग 32.4 लाख घरेलू सिलेंडरों के बराबर थी, जो देश की एक दिन की जरूरत को पूरा करने में सक्षम है।
“नंदा देवी” इस कड़ी का दूसरा महत्वपूर्ण जहाज है, जिसने कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारत तक गैस पहुंचाने में सफलता हासिल की है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों पर खतरा लगातार बढ़ रहा है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट, जो दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक जलमार्गों में से एक है, वहां से गुजरना इस समय बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के जहाजों का सुरक्षित पहुंचना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, और ऐसे में सप्लाई चेन का सुचारू रूप से चलना जरूरी है।
सरकारी अधिकारियों ने भी इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह न केवल लॉजिस्टिक क्षमता को दर्शाता है, बल्कि भारतीय समुद्री संचालन और प्रबंधन की दक्षता का भी प्रमाण है।
इसके साथ ही, क्रू मेंबर्स की बहादुरी और समर्पण की भी सराहना की जा रही है, जिन्होंने जोखिम भरे हालात में भी अपने कर्तव्यों को निभाया और जहाज को सुरक्षित भारत तक पहुंचाया।
मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में इस तरह की आपूर्ति और भी महत्वपूर्ण हो सकती है। “नंदा देवी” और “शिवालिक” जैसे जहाजों का सुरक्षित आगमन यह संकेत देता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
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