ग्रेटर नोएडा में मानसून की पहली तेज बारिश ने प्राधिकरण के दावों की पोल खोल दी। गामा-1 और बीटा-1 सेक्टर के बीच बना पुराना नाला अचानक टूटकर ध्वस्त हो गया। इससे पहले सेक्टर-150 के पास खुले मेनहोल में 10 साल का बच्चा गिर गया था, जिसे मौके से गुजर रहे एआरटीओ राजेश मोहन और उनकी टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला। लगातार हो रहे हादसों के बाद स्थानीय लोगों ने प्राधिकरण की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
शहर में मानसून की पहली तेज बारिश ने एक बार फिर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के दावों और तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है। एक तरफ गामा-1 और बीटा-1 सेक्टर के बीच 60 मीटर रोड पर बना पुराना नाला अचानक भरभराकर ढह गया, तो दूसरी ओर कुछ ही दिन पहले खुले मेनहोल में गिरकर एक 10 वर्षीय मासूम की जान मुश्किल में पड़ गई थी। दोनों घटनाओं ने शहर की जल निकासी व्यवस्था, खुले नालों और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद प्राधिकरण ने न तो जर्जर नालों की मरम्मत कराई और न ही खुले मेनहोल व नालों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता है।
भारी बारिश में ध्वस्त हुआ पुराना नाला
मंगलवार को हुई तेज बारिश के दौरान गामा-1 और बीटा-1 सेक्टर के बीच 60 मीटर रोड पर बना पुराना नाला अचानक टूटकर धंस गया। देखते ही देखते नाले का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा और मलबा गंदे पानी में समा गया।
गनीमत यह रही कि जिस समय नाला टूटा, उस वक्त वहां कोई वाहन या राहगीर मौजूद नहीं था। यदि हादसा व्यस्त समय में होता, तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था।
यह सड़क रोजाना सैकड़ों छात्रों, कर्मचारियों, स्थानीय निवासियों और अन्य वाहन चालकों के आवागमन का प्रमुख मार्ग है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और नाराजगी का माहौल है।

'शिकायतें होती रहीं, कार्रवाई नहीं हुई'
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस नाले की हालत कई वर्षों से जर्जर थी। इसकी मरम्मत और मजबूती को लेकर कई बार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज बारिश शुरू होने के बाद नाले में पानी का दबाव लगातार बढ़ता गया। कमजोर हो चुकी दीवारें इस दबाव को नहीं झेल सकीं और नाले का हिस्सा बीच से टूटकर गिर गया।
सिर्फ एक सेक्टर नहीं, पूरे शहर की समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या केवल गामा-1 और बीटा-1 तक सीमित नहीं है। ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में नालों की स्थिति बेहद खराब है।
कहीं नालों के स्लैब टूटे हुए हैं, तो कहीं फुटपाथ धंस चुके हैं। कई स्थानों पर नालों की नियमित सफाई नहीं होने से जलभराव की समस्या भी बढ़ रही है।
हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और मरम्मत के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही उन दावों की हकीकत सामने आ जाती है।
10 साल के मासूम की जान पर भी बन आई थी
नाले के धंसने की घटना से पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई थी।
सेक्टर-150 स्थित आईएफएस विला के सामने अपनी मां के साथ जा रहा लगभग 10 वर्षीय बच्चा सड़क किनारे खुले मेनहोल में गिर गया।

बच्चे की मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बच्चा गहरे नाले में जा चुका था।
इसी दौरान वहां से गुजर रहे यात्री कर अधिकारी (पीटीओ/एआरटीओ) राजेश मोहन और उनकी टीम ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू शुरू किया।
करीब सात से आठ मिनट की मशक्कत के बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाहर आने पर बच्चा पूरी तरह कीचड़ से लथपथ था और उसके मुंह में गंदा पानी व कीचड़ भी चला गया था। मौके पर मौजूद लोगों ने पानी से उसका मुंह साफ कराया।
अगर कुछ मिनट और देर हो जाती, तो यह घटना भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती थी।
लोगों में भारी नाराजगी
दोनों घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
निवासियों का कहना है कि शहर में कई नाले और मेनहोल खुले पड़े हैं। कई जगह सुरक्षा बैरिकेड तक नहीं लगाए गए हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो स्थायी समाधान किया जाता है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है।
लोगों ने मांग की है कि सभी खुले नालों और मेनहोल को तत्काल ढका जाए, जर्जर नालों की तकनीकी जांच कराई जाए तथा खतरनाक स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग लगाई जाए।

प्राधिकरण ने क्या कहा?
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-5 के वरिष्ठ प्रबंधक राजेश कुमार निम ने बताया कि यह नाला काफी पुराना था। लगातार और अधिक बारिश के कारण इसका हिस्सा टूट गया है। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त नाले का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।
हालांकि स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि नाले की स्थिति पहले से खराब थी तो बारिश से पहले उसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई।
पहले भी कई जानें ले चुके हैं खुले नाले
ग्रेटर नोएडा में खुले नाले और असुरक्षित जल निकासी व्यवस्था पहले भी कई दर्दनाक हादसों का कारण बन चुकी है।
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23 मई 2024 को ईकोटेक-3 क्षेत्र में एक व्यक्ति नाले की पुलिया में फंस गया था, जिसे पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद बचाया।
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2 मार्च 2025 को बीटा-2 क्षेत्र में एक कार अनियंत्रित होकर नाले में गिर गई थी, जिसमें एक स्टेशन मास्टर की मौत हो गई।
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7 जून 2023 को तेज रफ्तार वैगनआर कार नाले में गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
इन हादसों के बाद भी खुले नालों की सुरक्षा को लेकर स्थायी व्यवस्था नहीं बन पाई।
अब लोगों की मांग—सिर्फ आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर हादसे के बाद जांच, मरम्मत और कार्रवाई का भरोसा दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। उनका कहना है कि यदि मानसून के दौरान भी शहर के नाले सुरक्षित नहीं हैं, तो यह आम लोगों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही है।
निवासियों ने मांग की है कि पूरे शहर में नालों और मेनहोल का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, जर्जर ढांचों की तत्काल मरम्मत हो, खुले स्थानों को ढका जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
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