नोएडा प्राधिकरण ने औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन को लेकर बड़ी योजना सामने रखी है। प्रस्तावित न्यू नोएडा को लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित करने की तैयारी है। वहीं, वर्ष 2030 तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5 से 6 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
दिल्ली से सटे नोएडा की पहचान अब केवल ऊंची इमारतों, आईटी कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों तक सीमित नहीं रहने वाली। अगर प्राधिकरण की योजनाएं तय दिशा में आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र औद्योगिक निवेश, आधुनिक परिवहन और रोजगार के बड़े केंद्र के रूप में अपनी जगह और मजबूत कर सकता है। इसी कड़ी में ‘न्यू नोएडा’ के विस्तार की तैयारी की जा रही है। योजना के तहत लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में विकास की परिकल्पना है, जबकि वर्ष 2030 तक 6 लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य सामने रखा गया है।
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कृष्णा करुणेश के अनुसार, शहर में औद्योगिक गतिविधियों की बढ़ती मांग और सीमित भूमि उपलब्धता को देखते हुए नए क्षेत्र का विकास जरूरी हो गया है। इसके साथ ही निवेश परियोजनाओं को गति देने और मौजूदा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
20 हजार हेक्टेयर में विस्तार, चरणबद्ध भूमि अधिग्रहण की तैयारी
वर्ष 1976 में दिल्ली के निकट औद्योगिक नगरी के रूप में स्थापित नोएडा आज उत्तर भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में शामिल है। विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्यिक गतिविधियों में लगातार बढ़ते निवेश ने शहर की आर्थिक भूमिका को मजबूत किया है। लेकिन औद्योगिक विस्तार के साथ जमीन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन रही है।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए न्यू नोएडा के विकास की योजना तैयार की गई है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से भूमि अधिग्रहण शुरू करने की तैयारी है। वहीं, राज्य सरकार मौजूदा नोएडा में अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की सुविधा देने के लिए नीतिगत विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इससे उपलब्ध भूमि पर निर्माण क्षमता बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
हालांकि, इस विस्तार की वास्तविक गति भूमि अधिग्रहण, विकास कार्यों और संबंधित प्रक्रियाओं के आगे बढ़ने पर निर्भर करेगी।
₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट्स पर नजर
नोएडा के औद्योगिक भविष्य को लेकर एक और बड़ा संकेत आगामी पांचवें भूमि पूजन समारोह यानी जीबीसी से मिला है। सीईओ के मुताबिक, इस आयोजन में लगभग ₹35 हजार करोड़ की 120 परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की तैयारी है।
इन परियोजनाओं में डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाणिज्यिक रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत विकास से जुड़े निवेश शामिल हैं। यदि परियोजनाएं निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो इनसे औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मेट्रो कनेक्टिविटी से बढ़ेगी रफ्तार
किसी भी औद्योगिक शहर के विकास में सड़क और सार्वजनिक परिवहन की अहम भूमिका होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए नोएडा में तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर की योजना पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित कनेक्टिविटी के जरिए शहर को बोड़ाकी के मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब, बॉटनिकल गार्डन और चार मूर्ति के रास्ते गौर सिटी से जोड़ने की परिकल्पना है।
फिलहाल नोएडा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, डीएनडी फ्लाईवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों से जुड़ा हुआ है। प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर आगे बढ़ते हैं, तो यात्रियों के साथ-साथ औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
12 लाख से अधिक रोजगार का दावा, अब भविष्य पर नजर
प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 20 हजार हेक्टेयर में फैले नोएडा को 168 सेक्टरों में विभाजित किया गया है और करीब 90 प्रतिशत क्षेत्र विकसित हो चुका है। पिछले तीन दशकों में यहां लगभग 9,500 औद्योगिक, 5,000 वाणिज्यिक और 250 से अधिक संस्थागत आवंटन किए गए हैं। इन गतिविधियों से पिछले 30 से 35 वर्षों में 12 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की जानकारी दी गई है।
नोएडा का उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में लगभग 10 प्रतिशत योगदान बताया जाता है। राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत और परिधान निर्यात में लगभग 80 प्रतिशत बताई गई है।
बड़ी कंपनियों से लेकर नई तकनीकों तक निवेश का दायरा
नोएडा में सैमसंग, डिक्सन, टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल, माइक्रोसॉफ्ट, विप्रो और एडोबी जैसी कंपनियां मौजूद हैं। वहीं, सिफी और अडानीकनेक्स के डेटा सेंटर निवेश ने प्रौद्योगिकी क्षेत्र को भी मजबूती दी है।
प्राधिकरण सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और बैटरी तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से उच्च कौशल वाले युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
क्या न्यू नोएडा का विस्तार, प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर और ₹35 हजार करोड़ की परियोजनाएं तय समय पर आगे बढ़ पाएंगी? वर्ष 2030 तक 5 से 6 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य भी इसी पर निर्भर करेगा। फिलहाल योजना नोएडा के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा देने की क्षमता रखती है, लेकिन इसकी असली सफलता जमीन पर उतरने वाले प्रोजेक्ट्स, वास्तविक निवेश और युवाओं को मिलने वाले रोजगार से तय होगी।
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