कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हितों के बजाय छवि निर्माण और अमेरिका को खुश करने पर केंद्रित रही है। खेड़ा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों, ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों की मौत, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, BRICS, रूसी तेल आयात और भारत की वैश्विक स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
देश की विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति “भारत-प्रथम” के बजाय “PR-प्रथम” बनकर रह गई है।
नई दिल्ली में जारी अपने विस्तृत बयान में पवन खेड़ा ने कहा कि रणनीतिक मामलों में अमेरिका को खुश करने के लिए भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगातार नजरअंदाज किया जाना केवल उनका व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की गरिमा से भी जुड़ा मुद्दा है।
भारतीय नाविकों की मौत को लेकर उठाए सवाल
पवन खेड़ा ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हवाई हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना के बाद भारत सरकार ने अमेरिका से न तो बिना शर्त माफी मांगी और न ही सार्वजनिक रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराया।
खेड़ा के अनुसार, जब इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे सामान्य घटना बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस संवेदनशील मामले पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी चिंताजनक है और इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति कमजोर होती दिखाई देती है।
ट्रंप के बयानों पर कांग्रेस का निशाना
अपने बयान में खेड़ा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई सार्वजनिक बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रंप ने विभिन्न मंचों पर प्रधानमंत्री मोदी को लेकर टिप्पणियां कीं, लेकिन भारत सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने भारत के नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक मंचों पर अनिश्चितता व्यक्त की, फिर भी प्रधानमंत्री मोदी ने इसका प्रतिवाद नहीं किया। कांग्रेस का आरोप है कि इससे भारत की कूटनीतिक साख प्रभावित हुई है।
विदेश नीति की विश्वसनीयता पर उठाए प्रश्न
कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति की परंपरा कमजोर हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर भारत की नीतियां अब स्वतंत्र निर्णयों के बजाय बाहरी दबावों से प्रभावित दिखाई देती हैं।
खेड़ा ने कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में विदेश नीति का फोकस प्रचार और छवि निर्माण पर अधिक दिखाई देता है।
भारत-अमेरिका संबंधों और व्यापार समझौते पर भी सवाल
पवन खेड़ा ने भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि किसी समझौते में भारतीय किसानों, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) तथा व्यापारियों के हित प्रभावित होते हैं तो सरकार को उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के पक्ष में झुकाव वाली नीतियां भारत के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकती हैं।
रूसी तेल खरीद और ऊर्जा सुरक्षा पर टिप्पणी
कांग्रेस नेता ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को लेकर स्वतंत्र नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर बाहरी दबाव बनाया जा रहा है और सरकार इस संबंध में स्पष्ट रुख रखने में असफल रही है।
BRICS और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका
खेड़ा ने BRICS समूह को लेकर अमेरिकी टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब वैश्विक मंचों पर BRICS जैसे संगठनों को लेकर बयान दिए गए, तब भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए अधिक मुखर भूमिका निभानी चाहिए थी।
कांग्रेस का कहना है कि उभरती वैश्विक व्यवस्था में भारत को स्वतंत्र और मजबूत आवाज के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता है।
सरकार से पूछे तीन प्रमुख सवाल
पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से तीन प्रमुख सवाल पूछे—
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ओमान की खाड़ी में मारे गए तीन भारतीय नाविकों के मामले में प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने क्या मुद्दे उठाए?
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भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते की वास्तविक शर्तें क्या हैं और उसका भारतीय किसानों तथा MSME क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
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क्या भारत ने अपनी पारंपरिक रणनीतिक स्वतंत्रता और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति से दूरी बना ली है?
राजनीतिक बहस तेज होने के आसार
पवन खेड़ा के इस बयान के बाद विदेश नीति, भारत-अमेरिका संबंध और राष्ट्रीय हितों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने जहां मोदी सरकार पर राष्ट्रीय गरिमा और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता करने का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से इस पर प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि इसमें भारत की विदेश नीति, वैश्विक कूटनीति और राष्ट्रीय हितों से जुड़े कई संवेदनशील प्रश्न शामिल हैं।
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