Wednesday, July 15, 2026

UP चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस में बढ़ी तकरार! आखिर 143 सीटों का ऐसा कौन सा गणित, जिसने बदल दिए राजनीतिक तेवर?

इमरान मसूद के तीखे बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में नई बहस छिड़ गई है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों की हिस्सेदारी, मुस्लिम वोट बैंक और गठबंधन की मजबूरी पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Bahrampur , Latest Updated On - Jul 13 2026 | 15:39:00 PM
विज्ञापन

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान ने गठबंधन की राजनीति को नई दिशा दे दी है। 143 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोट बैंक का असर और 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे दोनों दलों की रणनीति का केंद्र बन चुके हैं। जानिए आखिर क्यों कांग्रेस अब सपा पर दबाव बनाने की स्थिति में नजर आ रही है।

विज्ञापन

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी कुछ महीने का समय बाकी है, लेकिन प्रदेश की राजनीति में चुनावी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी जहां संगठन और सरकार दोनों स्तर पर चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है, वहीं विपक्षी खेमे में सीटों के गणित और गठबंधन की रणनीति को लेकर हलचल तेज हो गई है। सबसे अधिक चर्चा समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर हो रही है।

इस चर्चा को उस समय और हवा मिल गई जब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सार्वजनिक रूप से कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ आने की वजह से ही समाजवादी पार्टी 37 सीटें जीत सकी थी। उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन की जरूरत कांग्रेस से ज्यादा सपा को थी। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सीटों की सौदेबाजी की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

सपा और कांग्रेस के बीच क्यों बढ़ी बयानबाजी?

2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था और भाजपा को उत्तर प्रदेश में कड़ी चुनौती दी थी। इस गठबंधन के बेहतर प्रदर्शन के बाद यह माना जा रहा था कि विधानसभा चुनाव में भी दोनों दल साथ आ सकते हैं।

हालांकि अब चुनाव नजदीक आते ही सीटों की हिस्सेदारी को लेकर दोनों दलों के बीच दबाव की राजनीति शुरू होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस की ओर से प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और सांसद इमरान मसूद लगातार पार्टी की ताकत को सामने रख रहे हैं।

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की तरफ से फिलहाल संयमित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। पार्टी के वरिष्ठ नेता उदयवीर सिंह ने कांग्रेस पर टिप्पणी जरूर की, लेकिन शीर्ष नेतृत्व की ओर से यही संकेत दिया गया है कि गठबंधन को बनाए रखने की कोशिश जारी रहेगी।

143 विधानसभा सीटें क्यों बन गईं सबसे बड़ा फैक्टर?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूरे विवाद की जड़ उत्तर प्रदेश की वे 143 विधानसभा सीटें हैं, जहां मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक माना जाता है।

इन सीटों में भी अलग-अलग स्तर पर मुस्लिम आबादी का असर देखने को मिलता है—

  • करीब 70 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम आबादी 20 से 30 प्रतिशत के बीच है।
  • लगभग 43 सीटों पर मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत से अधिक है।
  • कुल मिलाकर 36 सीटें ऐसी मानी जाती हैं, जहां मुस्लिम उम्मीदवार अपने दम पर चुनाव जीतने की स्थिति में होते हैं।
  • वहीं करीब 107 सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम मतदाता जीत और हार का फैसला करने की क्षमता रखते हैं।

यही कारण है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों इन सीटों को लेकर अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का दावा कर रही हैं।

क्या कांग्रेस के पाले में खिसक रहा है मुस्लिम वोट बैंक?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक मुस्लिम वोट कांग्रेस का परंपरागत आधार माना जाता था। बाद के वर्षों में यह समर्थन बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ गया।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस ने मुस्लिम समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। पार्टी ने कई ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाया है जिनकी मुस्लिम समुदाय में अच्छी पहचान मानी जाती है। इनमें इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी जैसे नेता प्रमुख हैं।

इसी बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरे आजम खान लंबे समय से कानूनी मामलों और जेल में रहने के कारण सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम मतदाताओं का एक वर्ग अब कांग्रेस की ओर भी आकर्षित होता दिखाई दे रहा है।

अखिलेश यादव की रणनीति क्या है?

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार अपने पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ गैर-यादव पिछड़े वर्गों और कुछ सवर्ण समुदायों तक भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

उनकी रणनीति यह है कि यदि यादव वोट बैंक के साथ मुस्लिम मतदाताओं का व्यापक समर्थन बरकरार रहता है और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का एक हिस्सा भी पार्टी के साथ आता है, तो विधानसभा चुनाव में मजबूत मुकाबला किया जा सकता है।

हालांकि यदि मुस्लिम वोटों में बिखराव होता है तो इसका सीधा असर समाजवादी पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर पड़ सकता है।

2024 के प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती

2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया था। इसी सफलता के आधार पर समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव में भी उसी रणनीति को दोहराना चाहती है।

लेकिन कांग्रेस अब अपने बेहतर प्रदर्शन और बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के आधार पर विधानसभा चुनाव में अधिक सीटों की मांग करने की स्थिति में दिखाई दे रही है। यही वजह है कि इमरान मसूद जैसे नेताओं के बयान राजनीतिक संदेश भी माने जा रहे हैं।

भाजपा भी पूरी तैयारी में

उधर भारतीय जनता पार्टी भी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर संगठन को मजबूत करने में लगे हैं।

भाजपा की कोशिश होगी कि विपक्षी दलों के बीच सीटों को लेकर पैदा होने वाले मतभेदों का राजनीतिक लाभ उठाया जाए।

आने वाले महीनों में साफ होगी तस्वीर

फिलहाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समाजवादी पार्टी और कांग्रेस विधानसभा चुनाव भी साथ लड़ेंगी या सीटों के विवाद के चलते दोनों के रास्ते अलग हो जाएंगे।

143 विधानसभा सीटों का गणित, मुस्लिम वोट बैंक की भूमिका और सीटों की हिस्सेदारी—ये तीनों मुद्दे आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। राजनीतिक दलों की बयानबाजी भले अभी शुरुआती दौर में हो, लेकिन इससे इतना साफ हो चुका है कि 2027 का चुनाव केवल मुद्दों का नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों और गठबंधन की रणनीति का भी बड़ा इम्तिहान बनने जा रहा है।

विज्ञापन

UP Election 2027, Uttar Pradesh Politics, Imran Masood, Akhilesh Yadav, Samajwadi Party, Congress, Muslim Vote Bank, 143 Assembly Seats, SP Congress Alliance, Seat Sharing, UP Political News, Assembly Election Analysis, INDIA Alliance, Hindi Political News

Related News

विज्ञापन

Newsletter

For newsletter subscribe us

विज्ञापन
आपकी राय
भारत क्रिकेट टीम के सर्वश्रेष्ठ कप्तान का नाम कौन है?




COMMENTS
All Comments (11)
  • V
    vijaykumar
    vijaykumar@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    A
    arif
    arif@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    A
    ajaykumar
    ajaykumar@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    very intresting news
    A
    ankitankit
    ankitankit@pearlorganisation.com
    27/12/2023
    Good
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    29/12/2023
    good news
    R
    rahul+11
    rahul+11@pearlorganisation.com
    15/01/2024
    Nice
    R
    rahul+11
    rahul+11@pearlorganisation.com
    15/01/2024
    Bisarkh police station, during checking at Char Murti intersection, spotted an FZ MOSA carrying two persons towards Surajpur.
    R
    rahul
    rahul@pearlorganisation.com
    02/02/2024
    test
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    02/02/2024
    अच्छा
    R
    rahul
    rahul@pearlorganisation.com
    08/02/2024
    अच्छा