बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन करने के बाद आज अपने आवास पर JDU के विधायकों, सांसदों और विधान पार्षदों की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में उनके भविष्य के राजनीतिक कदम और बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर बड़ा संकेत मिल सकता है।
बिहार में सत्ता का नया अध्याय? राज्यसभा नामांकन के बाद नीतीश कुमार की बड़ी बैठक, CM चेहरे पर सस्पेंस
पटना: बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री ने आज शाम 5 बजे अपने आधिकारिक आवास पर जेडीयू के सभी विधायकों, सांसदों और विधान पार्षदों की अहम बैठक बुलाई है।
माना जा रहा है कि इस बैठक में नीतीश कुमार अपने भविष्य के राजनीतिक कदमों और पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर बड़ा फैसला सुना सकते हैं। पिछले दो दशकों से बिहार की सत्ता संभाल रहे नीतीश कुमार के इस कदम को राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।
राज्यसभा नामांकन के बाद तेज हुई अटकलें
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसके बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि अब वह बिहार की राजनीति से हटकर दिल्ली की सक्रिय राजनीति में भूमिका निभा सकते हैं। करीब 20 साल तक मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद उनका यह फैसला राज्य के राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।
इसी कारण बिहार में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि अगर नीतीश कुमार दिल्ली जाते हैं तो बिहार की कमान किसके हाथों में होगी।
CM चेहरे को लेकर बना सस्पेंस
राजनीतिक गलियारों में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार में मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी संभावित मुख्यमंत्री के रूप में चर्चा में है। नित्यानंद राय यादव समुदाय से आते हैं और बीजेपी के प्रमुख नेताओं में माने जाते हैं।
हालांकि अभी तक बीजेपी या जेडीयू के किसी भी नेता ने इस मुद्दे पर खुलकर बयान नहीं दिया है। लेकिन अंदरखाने यह चर्चा जरूर चल रही है कि बिहार में अगली सरकार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बन सकता है।

तीन बड़े सवाल जिन पर टिकी है नजर
बिहार की राजनीति में इस समय तीन बड़े सवाल चर्चा के केंद्र में हैं —
बताया जा रहा है कि इन सभी सवालों के जवाब अगले तीन से चार दिनों के भीतर सामने आ सकते हैं।
35 साल की राजनीति में दो ही चेहरे
अगर पिछले तीन दशकों की बिहार की राजनीति पर नजर डालें तो राज्य ने मुख्य रूप से दो ही बड़े राजनीतिक चेहरे देखे हैं — लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार।
करीब 35 वर्षों तक बिहार की राजनीति इन्हीं दो नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन अब दोनों ही नेता स्वास्थ्य कारणों से धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से पीछे होते नजर आ रहे हैं।
परिवार की राजनीति पर अलग रास्ता
जहां लालू प्रसाद यादव अपने बेटे तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश में लगातार सक्रिय रहे, वहीं नीतीश कुमार ने अब तक अपने बेटे को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया।
हालांकि हाल के दिनों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि नीतीश कुमार के बेटे की भी राजनीति में एंट्री हो सकती है, लेकिन इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बैठक पर टिकी बिहार की नजर
आज शाम होने वाली जेडीयू की यह बैठक बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद राज्य की सत्ता और नेतृत्व को लेकर बड़ा संकेत सामने आ सकता है।
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