डोडा में आयोजित सम्मेलन में उदय भानु चिब ने जम्मू-कश्मीर की स्टेटहुड बहाली को लेकर आक्रामक रुख अपनाने की बात कही और केंद्र व स्थानीय सरकार पर तीखा हमला बोला।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इस बार मुद्दा वही पुराना लेकिन लगातार गहराता हुआ—स्टेटहुड की बहाली। उदय भानु चिब ने डोडा जिले में आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन में ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
डोडा में आयोजित इस कार्यक्रम में बोलते हुए चिब ने साफ कहा कि अब स्टेटहुड की मांग सिर्फ निवेदन या अपील तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे एक मजबूत और आक्रामक राजनीतिक आंदोलन का रूप देना होगा। उनका कहना था कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर दबाव बनाए बिना यह मांग पूरी नहीं होगी।
“हक है, किसी की मेहरबानी नहीं”
चिब ने स्टेटहुड के मुद्दे को सिर्फ एक प्रशासनिक या राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से हो रही देरी ने जनता में निराशा और गुस्सा दोनों बढ़ाया है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे आगे आएं और इस मुद्दे को संगठित आंदोलन में बदलें। उनके शब्दों में—“यह कोई रियायत नहीं, हमारा अधिकार है, जिसे हमें संगठित होकर वापस लेना होगा।”

जमीनी मुद्दों को भी उठाया
चिब ने अपने संबोधन में सिर्फ स्टेटहुड की बात नहीं की, बल्कि डोडा जैसे क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं को भी सामने रखा। उन्होंने स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, मेगा प्रोजेक्ट्स में प्राथमिकता, डोडा डेवलपमेंट अथॉरिटी के गठन, डेस्सा-कपरान सड़क निर्माण, एयर एम्बुलेंस की सुविधा, महिला कॉलेज की स्थापना और पहाड़ी समुदाय को दर्जा देने जैसे मुद्दे उठाए।
उन्होंने कहा कि ये सभी मांगें केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन से जुड़ी बुनियादी जरूरतें हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस पर सीधा हमला
चिब ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे बीजेपी के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम रुख अपना रहे हैं। उन्होंने इसे “राजनीतिक समर्पण की आदत” करार दिया और कहा कि इस तरह के रवैये से स्टेटहुड की लड़ाई कमजोर होती है।
उनका कहना था कि इतिहास उन लोगों को याद रखता है जो संघर्ष करते हैं, न कि उन लोगों को जो चुपचाप इंतजार करते रहते हैं।
अधूरे वादों पर उठाए सवाल
चिब ने सरकार पर कई वादे पूरे न करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर हटाने का वादा अब तक अधूरा है, जबकि इसको लेकर जनता में नाराजगी साफ दिखाई देती है।

इसके अलावा उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर भी सवाल उठाए और कहा कि युवाओं को नौकरी देने के वादे सिर्फ कागजों में ही सीमित रह गए हैं। इससे युवाओं में निराशा बढ़ रही है।
‘हमारी रियासत, हमारा हक’ अभियान का जिक्र
चिब ने जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा चलाए जा रहे “हमारी रियासत, हमारा हक” अभियान की सराहना की। उन्होंने इसे एक मजबूत और समयानुकूल पहल बताया, जो जनता की भावनाओं को राजनीतिक दिशा दे रही है।
उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि इसे हर जिले और हर वर्ग तक पहुंचाकर एक व्यापक आंदोलन बनाया जा रहा है।
“अब चुप रहने का वक्त नहीं”
अपने संबोधन के अंत में चिब ने स्पष्ट कहा कि अब शांत रहकर इंतजार करने का समय खत्म हो चुका है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अपील की कि वे एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्टेटहुड की बहाली में और देरी हुई, तो इससे जनता का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था से कमजोर हो सकता है।
उनके बयान ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की राजनीति में स्टेटहुड का मुद्दा और तेज होने वाला है।
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