केरल चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एलडीएफ सरकार और केंद्र पर तीखा हमला बोला, यूडीएफ सरकार बनने का किया दावा।
केरल विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्य में सत्ता परिवर्तन का बड़ा दावा करते हुए कहा है कि केरल में बदलाव की हवा चल रही है और कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार का बनना तय है।
इडुक्की में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए खरगे ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रगतिशील विचारधारा और सामाजिक न्याय के प्रतीक केरल को एलडीएफ शासन ने भ्रष्टाचार, आर्थिक कुप्रबंधन और बेरोजगारी के दलदल में धकेल दिया है।
“एलडीएफ सरकार घोटालों की सरकार”
खरगे ने अपने भाषण में आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में एलडीएफ सरकार केवल घोटालों और भ्रष्टाचार तक सीमित रह गई है। उन्होंने लाइफ मिशन हाउसिंग घोटाला और सबरीमाला मंदिर से सोना चोरी जैसे मामलों का जिक्र करते हुए राज्य सरकार को घेरा।
उन्होंने कहा कि इन मामलों ने सरकार की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
“विजयन मोदी के रास्ते पर”
सबसे तीखा हमला करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहे, बल्कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रास्ते पर चल रहे हैं।
उन्होंने कहा, “फर्क सिर्फ इतना है कि एक का झंडा केसरिया है और दूसरे का लाल, लेकिन दोनों की कार्यशैली एक जैसी है।”
खरगे ने यह भी दावा किया कि केरल में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिलने वाली है।

एफसीआरए संशोधन बिल पर हमला
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार के एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बिल केवल ईसाई संस्थाओं पर ही नहीं, बल्कि सिविल सोसाइटी, स्वयंसेवी संगठनों और गरीबों के लिए काम करने वाली संस्थाओं पर हमला है।
उन्होंने इसे अल्पसंख्यक समुदायों को डराने की राजनीति बताते हुए कहा कि जैसे वक्फ संशोधन विधेयक से मुस्लिम समाज में भय का माहौल बना, वैसे ही एफसीआरए कानून से ईसाई समुदाय में डर पैदा किया जा रहा है।
खरगे ने कहा कि अल्पसंख्यक संस्थाओं को कमजोर करने की कोई भी कोशिश संविधान का अपमान है और कांग्रेस पार्टी ऐसे हर कदम के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहेगी।
आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल
राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी खरगे ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 2016 में केरल पर 1.57 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर लगभग 6 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण राज्य आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर गरीबों, किसानों और मछुआरों पर पड़ रहा है।
बेरोजगारी बना बड़ा मुद्दा
बेरोजगारी के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केरल जैसे शिक्षित राज्य में भी युवाओं के पास रोजगार के अवसर नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में बेरोजगारी दर लगभग 30 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से तीन गुना अधिक है। इस कारण राज्य के युवाओं को रोजगार की तलाश में बाहर पलायन करना पड़ रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर साल दो करोड़ नौकरियां देने के वादे को भी याद दिलाते हुए कहा कि 12 साल बाद भी इसका कोई परिणाम नहीं दिखा।

योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल
खरगे ने आरोप लगाया कि राज्य में कल्याणकारी योजनाएं या तो देर से लागू हो रही हैं या फिर उनका सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो रहा।
उन्होंने कहा कि बढ़ता कर्ज, गलत नीतियां और घटते अवसरों ने राज्य को अनिश्चितता और निराशा की स्थिति में ला खड़ा किया है।
बागान श्रमिकों की समस्या उठाई
चाय और इलायची बागान श्रमिकों की समस्याओं को उठाते हुए खरगे ने बेहतर मजदूरी सुनिश्चित करने का वादा किया।
उन्होंने कहा कि कई बागान मालिक अपना व्यापार बंद कर रहे हैं और एलडीएफ सरकार ने उन्हें वित्तीय मदद देने का जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया गया।
साथ ही उन्होंने नए श्रम कानूनों को शोषणकारी बताते हुए कहा कि इनके कारण मजदूरों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
किसानों और पर्यटन पर फोकस
खरगे ने जंगली जानवरों के हमलों से किसानों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया और पर्यटन क्षेत्र के विकास पर जोर दिया।
उन्होंने यूडीएफ गठबंधन की गारंटियों को गिनाते हुए कहा कि सत्ता में आने पर इन सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
जनता से समर्थन की अपील
अपने भाषण के अंत में मल्लिकार्जुन खरगे ने जनता से यूडीएफ उम्मीदवारों को भारी मतों से जिताने की अपील की और कहा कि यह चुनाव केरल के भविष्य को तय करेगा।
केरल में चुनावी माहौल के बीच मल्लिकार्जुन खरगे का यह बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। जहां एक ओर उन्होंने एलडीएफ सरकार और केंद्र पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर यूडीएफ के पक्ष में मजबूत माहौल बनने का दावा किया। अब देखना होगा कि यह राजनीतिक बयानबाजी चुनावी नतीजों में कितना असर डालती है।
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