नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन हो चुका है, लेकिन पैसेंजर फ्लाइट्स शुरू होने में अभी 40-60 दिन का समय लग सकता है। सुरक्षा मंजूरी और विदेशी CEO को लेकर नियमों का पेंच देरी की वजह बना है।
देश के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का 25 मार्च 2026 को भव्य उद्घाटन हो चुका है। लेकिन उद्घाटन के बाद भी यहां से पैसेंजर फ्लाइट्स शुरू नहीं हो पाई हैं, जिससे यात्रियों और उद्योग जगत में उत्सुकता के साथ-साथ सवाल भी उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस एयरपोर्ट से नियमित उड़ानें शुरू होने में अभी कम से कम 40 से 60 दिन का समय और लग सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह सुरक्षा एजेंसियों की मंजूरी का लंबित होना है, जो किसी भी एयरपोर्ट संचालन के लिए अनिवार्य प्रक्रिया मानी जाती है।
जानकारी के मुताबिक, Bureau of Civil Aviation Security यानी BCAS की अंतिम एनओसी (No Objection Certificate) अभी जारी नहीं हुई है। इसके साथ ही Intelligence Bureau यानी IB की रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है।
जब तक ये दोनों मंजूरियां नहीं मिलतीं, तब तक एयरपोर्ट से शेड्यूल पैसेंजर फ्लाइट्स का संचालन शुरू नहीं किया जा सकता।

क्या है देरी की असली वजह?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच एयरपोर्ट के शीर्ष प्रबंधन से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। दरअसल, क्रिस्टोफ श्नेलमान, जो इस एयरपोर्ट के सीईओ हैं, विदेशी नागरिक हैं।
यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं और पूरी प्रक्रिया को विस्तार से जांच रही हैं।
सुरक्षा नियमों का क्या है मामला?
BCAS के 2011 के सुरक्षा नियमों के अनुसार, भारत में किसी भी एयरपोर्ट का सीईओ भारतीय नागरिक होना चाहिए। यह नियम राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से बनाया गया है, ताकि एयरपोर्ट संचालन में संवेदनशील सूचनाओं और प्रक्रियाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ऐसे में एक विदेशी नागरिक का सीईओ होना इस नियम के साथ सीधे तौर पर मेल नहीं खाता, जिसके चलते संबंधित एजेंसियां इस मामले में पूरी तरह संतुष्ट होना चाहती हैं।
कौन-कौन सी मंजूरियां हैं लंबित?
वर्तमान स्थिति में दो प्रमुख मंजूरियां लंबित हैं:
पहली, Intelligence Bureau की सुरक्षा रिपोर्ट, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विदेशी सीईओ के रहते किसी प्रकार का सुरक्षा जोखिम तो नहीं है।
दूसरी, Bureau of Civil Aviation Security की अंतिम एनओसी, जो IB की रिपोर्ट के आधार पर ही जारी की जाएगी।

प्रक्रिया के तहत सबसे पहले IB अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार करेगा।
इसके बाद यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी जाएगी।
गृह मंत्रालय की समीक्षा के बाद BCAS को अंतिम निर्णय के लिए इनपुट मिलेगा।
और अंत में BCAS एनओसी जारी करेगा।
इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पैसेंजर फ्लाइट्स का संचालन शुरू हो सकेगा।
कितना और इंतजार?
नागर विमानन मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो अगले 40 से 60 दिनों के भीतर यहां से नियमित उड़ानें शुरू हो सकती हैं।
हालांकि, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि सुरक्षा एजेंसियां कितनी जल्दी अपनी मंजूरी देती हैं।
उम्मीदें और चुनौतियां
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश के सबसे बड़े और आधुनिक एयरपोर्ट्स में गिना जा रहा है, जिससे न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे एनसीआर क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
लेकिन मौजूदा स्थिति यह भी दिखाती है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं कितनी जटिल होती हैं, जहां एक छोटी सी अड़चन भी पूरे प्रोजेक्ट को रोक सकती है।
फिलहाल, एयरपोर्ट पूरी तरह तैयार है, लेकिन उड़ानों के लिए जरूरी “ग्रीन सिग्नल” का इंतजार जारी है।
अब सभी की नजरें Intelligence Bureau और Bureau of Civil Aviation Security पर टिकी हैं, जिनकी मंजूरी के बाद ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली उड़ान भर सकेगी।
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