लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी पुलिस के लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के 912 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। कार्यक्रम में पुलिस भर्ती की पारदर्शिता, साइबर थानों, फॉरेंसिक लैब, महिला पुलिस बल, पुलिस प्रशिक्षण क्षमता और आगामी भर्तियों को लेकर सरकार की ओर से कई दावे किए गए।
लोक भवन में रविवार का दिन उन 912 युवाओं और उनके परिवारों के लिए खास रहा, जिन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी जगह बनाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इनमें 173 महिलाएं भी शामिल हैं।
लेकिन नियुक्ति पत्रों का यह कार्यक्रम सिर्फ 912 युवाओं की नौकरी तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री योगी ने मंच से अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने और हर सप्ताह एक बड़ा भर्ती इवेंट आयोजित करने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि शनिवार को 818 और रविवार को 912 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए, जबकि 22 सितंबर को फिर नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखना है। उनके अनुसार अब विज्ञापन जारी होने से लेकर परीक्षा, नियुक्ति पत्र, प्रशिक्षण और जिलों में तैनाती तक अभ्यर्थी को सिफारिश की जरूरत नहीं होगी।

मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में 2017 से पहले की भर्ती व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस दौर में युवाओं के बीच यह भरोसा नहीं था कि बिना सिफारिश और लेनदेन के सरकारी नौकरी मिल सकती है। उनके मुताबिक पेपर लीक और भर्ती में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती थीं।
योगी ने दावा किया कि कुछ मामलों में परीक्षा किसी और ने दी और नियुक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को मिली। उन्होंने कहा कि सरकार ने भर्ती व्यवस्था में बदलाव करते हुए समूह ‘ग’ और ‘घ’ की भर्तियों से साक्षात्कार समाप्त किया, ताकि चयन प्रक्रिया में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की गुंजाइश कम हो।
उन्होंने कहा कि पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग सहित विभिन्न भर्ती संस्थाओं की प्रक्रियाओं में सुधार किया गया है।
पुलिस बल बढ़ा, साइबर से फॉरेंसिक तक बदला ढांचा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उसकी तकनीकी क्षमता पर भी काम किया गया है। उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई और इसके लिए एयरपोर्ट के पास पुलिस की 110 एकड़ भूमि को कब्जे से मुक्त कराने की बात कही गई। उनके अनुसार अब प्रत्येक रेंज में फॉरेंसिक लैब उपलब्ध है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के सात शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू की गई है। यूपी एसएसएफ और एसडीआरएफ का गठन किया गया। प्रत्येक जिले में साइबर थाना और हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित करने की जानकारी भी दी गई।
पीएसी की समाप्त की गई 34 कंपनियों को दोबारा गठित किया गया है। इसके अलावा तीन महिला पीएसी बटालियन बनाई गईं, जिन्हें बढ़ाकर छह करने की प्रक्रिया बताई गई।
56 जिलों में हाईराइज पुलिस बैरक
योगी ने कहा कि स्मार्ट पुलिसिंग सिर्फ प्रशिक्षण से संभव नहीं है। पुलिसकर्मियों को बेहतर बैरक, आवास और दूसरी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। सरकार ने पुलिस लाइन, बैरक और आवासीय सुविधाओं के विस्तार पर काम किया है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश के 56 जिलों में पुलिस की हाईराइज बैरक या पुलिस आवासीय सुविधा सबसे ऊंची इमारत है। उन्होंने कहा कि बेहतर सुविधाओं से पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ती है और बदलती तकनीक के साथ पुलिस को भी लगातार खुद को अपडेट करना होगा।
छह हजार से 60 हजार हुई प्रशिक्षण क्षमता
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पहले यूपी पुलिस के पास एक साथ करीब 6 हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता थी, जो अब बढ़कर 60 हजार से अधिक हो गई है। उन्होंने बताया कि पहले प्रदेश में 10 हजार महिला पुलिसकर्मी भी नहीं थीं, जबकि अब यह संख्या 44 हजार से अधिक है। मौजूदा भर्ती प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस वर्ष के अंत तक महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 50 हजार तक पहुंचने की बात कही गई।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि नवचयनित अभ्यर्थियों का आधारभूत प्रशिक्षण 6 अक्टूबर से शुरू होगा। इसमें छह महीने का संस्थागत और तीन महीने का व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल होगा। इसके बाद अभ्यर्थियों की तैनाती की जाएगी।
डीजीपी के अनुसार करीब 35 हजार पदों पर सीधी भर्ती और 9,457 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है।
912 नियुक्तियां, 912 परिवारों के लिए उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र केवल 912 युवाओं के हाथ में नहीं पहुंच रहे, बल्कि इससे उनके 912 परिवारों और आसपास के समाज में भी भरोसा पैदा होगा। उन्होंने कहा कि गांव और मोहल्ले के दूसरे युवाओं को भी यह विश्वास मिलेगा कि योग्यता के आधार पर बिना सिफारिश और लेनदेन सरकारी सेवा में प्रवेश संभव है।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि पुलिस सेवा में कर्तव्य पहले और अधिकार बाद में आते हैं। उन्होंने युवाओं से नौकरी मिलने के बाद अहंकार से दूर रहने की अपील की।
दंगे, माफिया और यूपी की बदली पहचान का दावा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश में दंगे और लंबे कर्फ्यू की घटनाएं होती थीं और माफिया प्रशासन, पुलिस तथा न्यायपालिका के लिए चुनौती बने हुए थे।

योगी ने दावा किया कि अब प्रदेश की पहचान कर्फ्यू और माफिया के बजाय निवेश, आयोजन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ रही है। कुंभ-महाकुंभ, पर्व-त्योहार, वीवीआईपी कार्यक्रम और स्थानीय आयोजनों के शांतिपूर्ण आयोजन में उन्होंने यूपी पुलिस की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर भी कहा कि आज लड़कियों की शिक्षा और आवाजाही को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ा है और इस बदलाव में पुलिस की भूमिका है। उनके अनुसार देश के दूसरे हिस्सों में भी यूपी पुलिस के मॉडल की चर्चा होती है।
पेपर लीक पर कठोर कानून का जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले पेपर लीक और अवैध धंधे में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानून बनाया गया है, जिसमें आजीवन कारावास और संपत्ति जब्ती जैसे प्रावधान हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में डीजीपी राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पौधा और भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट कर स्वागत किया। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना का भी पौधा और राम दरबार की प्रतिमा देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि पारंपरिक पुष्पगुच्छ की जगह पौधा देने का उद्देश्य हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है।
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और नवचयनित अभ्यर्थी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने अंत में विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो काम नहीं कर पाए, वे बोलते रहेंगे और सरकार नियुक्तियां देती रहेगी। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में बदलाव का उद्देश्य युवाओं को यह भरोसा देना है कि योग्यता के आधार पर चयन और पारदर्शी तरीके से नियुक्ति संभव है।
COMMENTS