लखनऊ में जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न जिलों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को छोटी घटनाओं पर भी नजर रखने, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचने और पीड़ितों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पुलिस और राजस्व से जुड़े मामलों में लापरवाही को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त संदेश दिया।
उत्तर प्रदेश में किसी छोटी घटना के बड़े विवाद में बदलने से पहले ही प्रशासन और पुलिस को सक्रिय होना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ के दौरान अधिकारियों को इसी दिशा में सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज में वैमनस्य फैलाने वाले तत्व मामूली घटनाओं को भी बड़ा रूप देने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में जिलाधिकारी और एसपी स्तर के अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में छोटी से छोटी घटना पर भी नजर रखनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर पहुंचें, पीड़ित की बात सुनें और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने चेतावनी दी कि छोटी-छोटी घटनाओं में भी उदासीनता या लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हाल के जनता दर्शन कार्यक्रमों में भी मुख्यमंत्री पुलिस, राजस्व और जनशिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर अधिकारियों को लगातार निर्देश देते रहे हैं। 21 सितंबर के जनता दर्शन में भी यही मुद्दा प्रमुखता से सामने रहा।
जनता दर्शन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे लोग अपनी शिकायतें लेकर आए थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक-एक कर लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने लोगों से उनकी शिकायतों की जानकारी लेने के साथ संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपे और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पिछले साढ़े नौ वर्षों से बिना भेदभाव लोगों की समस्याओं के समाधान का प्रयास कर रही है। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि जनता की शिकायतों को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि संवेदनशीलता के साथ उनका वास्तविक समाधान किया जाए।
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि जनशिकायतों का निस्तारण समय सीमा के भीतर और पीड़ित की संतुष्टि के अनुरूप होना चाहिए। पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले, जरूरतमंद मरीजों के इलाज की व्यवस्था हो और जमीन पर अवैध कब्जे करने वाले भूमाफिया व दबंगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
पुलिस की शिकायतों पर मुख्यमंत्री का सख्त रुख
जनता दर्शन में पुलिस और राजस्व से जुड़े मामलों की शिकायतें भी सामने आईं। इन मामलों को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसएसपी स्तर के अधिकारी नियमित रूप से जनसमस्याओं की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि थाना, चौकी या स्थानीय स्तर पर किसी शिकायत को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी मातहत अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही की शिकायत सामने आती है तो केवल शिकायतकर्ता को जवाब देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
पुलिस से जुड़ी शिकायतों में लापरवाही को लेकर मुख्यमंत्री का यह रुख नया नहीं है। सितंबर के पहले सप्ताह में भी जनता दर्शन के दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों से थाना, चौकी और बीट स्तर पर शिकायतों में हीलाहवाली रोकने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा था।
छोटी घटना, बड़ा विवाद और प्रशासन की पहली जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री के निर्देशों का एक अहम हिस्सा कानून-व्यवस्था से जुड़ा रहा। उन्होंने अधिकारियों को समझाया कि कई बार छोटी घटना समय रहते न संभाले जाने पर विवाद का रूप ले सकती है। ऐसी स्थिति पैदा होने से पहले प्रशासन को सक्रिय होना होगा।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी और एसपी केवल कार्यालय से स्थिति की निगरानी न करें, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर खुद घटनास्थल पर पहुंचें। पीड़ित की बात सुनना, वास्तविक स्थिति समझना और कानून के अनुसार कार्रवाई करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
इसका उद्देश्य शिकायतों के बढ़ने या स्थानीय विवाद के व्यापक रूप लेने से पहले ही स्थिति को नियंत्रित करना और लोगों का प्रशासन पर भरोसा बनाए रखना है।
राजस्व मामलों के जल्द निस्तारण के निर्देश
मुख्यमंत्री ने राजस्व और कानून-व्यवस्था से संबंधित मामलों को भी प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने को कहा। जमीन, कब्जे और अन्य राजस्व विवादों में अनावश्यक देरी से लोगों को लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ऐसे मामलों में समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल शिकायत सुनने तक नहीं है। शिकायतकर्ता को यह महसूस होना चाहिए कि उसकी समस्या पर वास्तव में काम हुआ है। हाल के जनता दर्शन में भी मुख्यमंत्री ने पुलिस, राजस्व और भूमि विवादों से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण पर जोर दिया है।
बच्चे ने नहीं लौटाई चॉकलेट, खिलखिला उठा पूरा हॉल
जनता दर्शन का माहौल उस समय कुछ देर के लिए हल्का और आत्मीय हो गया, जब एक महिला अपने छोटे बच्चे के साथ मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची।
मुख्यमंत्री ने बच्चे से उसका हालचाल पूछा और यह भी जानना चाहा कि वह कहां पढ़ता है। बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चे की ओर चॉकलेट बढ़ाई। बच्चे ने बिना देर किए चॉकलेट ले ली। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मजाकिया अंदाज में चॉकलेट वापस मांगने की कोशिश की, लेकिन बच्चे ने उसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया।
बच्चे के इस मासूम जवाब पर वहां मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया और पूरा हॉल खिलखिला उठा। मुख्यमंत्री ने बच्चे को उसके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया और मन लगाकर पढ़ाई करने की सलाह दी।
जनता दर्शन में बच्चों से मुख्यमंत्री की ऐसी बातचीत पहले भी देखने को मिलती रही है। जुलाई और अगस्त के कार्यक्रमों में भी उन्होंने बच्चों से पढ़ाई और रुचियों के बारे में बातचीत कर उन्हें चॉकलेट दी थी।
संदेश साफ: शिकायत से लेकर समाधान तक जवाबदेही
सोमवार के जनता दर्शन से मुख्यमंत्री का प्रशासन और पुलिस के लिए संदेश साफ रहा—छोटी घटना को नजरअंदाज करने की गुंजाइश नहीं है। समय पर सूचना, मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी, पीड़ित की सुनवाई और नियम के मुताबिक कार्रवाई, यही व्यवस्था की पहली कड़ी होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे और किसी जरूरतमंद को अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े। जनता दर्शन में आए लोगों की शिकायतों पर दिए गए निर्देशों के जरिए सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों पर जोर दिया।
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