कानपुर में होली के दौरान हुड़दंग और सड़क हादसों ने कई लोगों को अस्पताल पहुंचा दिया। एलएलआर अस्पताल की इमरजेंसी में 119 से अधिक घायल भर्ती हुए, जिनमें आंखों में केमिकल रंग जाने, सिर में गंभीर चोट और हड्डी टूटने के कई मामले शामिल हैं। उर्सुला और कांशीराम अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे।
कानपुर में होली का हुड़दंग पड़ा भारी: 119 से अधिक घायल अस्पताल में भर्ती
कानपुर में होली के जश्न के बीच हुड़दंग और लापरवाही कई लोगों पर भारी पड़ गई। रंगों के इस त्योहार के दौरान शहर में मारपीट, केमिकल युक्त रंगों के इस्तेमाल और सड़क हादसों के चलते 119 से अधिक लोग घायल होकर अस्पतालों की इमरजेंसी में भर्ती हुए। सबसे ज्यादा मरीज एलएलआर अस्पताल (हैलट अस्पताल) की इमरजेंसी में पहुंचे, जहां डॉक्टरों को लगातार कई घंटों तक घायलों का इलाज करना पड़ा।
डॉक्टरों के अनुसार घायलों में सबसे ज्यादा मामले आंखों में केमिकल युक्त रंग जाने, बिना हेलमेट बाइक चलाने के कारण सिर में गंभीर चोट, और हाथ-पैर की हड्डी टूटने से जुड़े रहे। कई मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती किया गया।
आंखों में केमिकल रंग से कई लोग घायल
होली के दौरान केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल कई लोगों के लिए खतरनाक साबित हुआ। करीब 13 मरीज आंखों में केमिकल रंग जाने के कारण कॉर्नियल इंजरी के साथ एलएलआर अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। इन मरीजों को तुरंत नेत्र विशेषज्ञों की निगरानी में इलाज दिया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि केमिकल रंग आंखों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं और समय पर इलाज न मिले तो दृष्टि पर भी असर पड़ सकता है।
बिना हेलमेट हादसे बने बड़ी वजह
होली के दिन बाइक चलाते समय सुरक्षा नियमों की अनदेखी भी भारी पड़ी। बिना हेलमेट बाइक चलाने वाले 27 लोग सिर में गंभीर चोट के साथ न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती हुए।
इसके अलावा 13 मरीज हाथ-पैर की हड्डी टूटने के कारण आर्थोपेडिक विभाग में भर्ती किए गए।
अन्य अस्पतालों में भी पहुंचे कई घायल
एलएलआर अस्पताल के अलावा शहर के अन्य अस्पतालों की इमरजेंसी में भी घायलों की लंबी कतार लगी रही।
डॉक्टरों के अनुसार इन अस्पतालों में भी सड़क हादसे और झगड़े के कारण सिर और हाथ-पैर में चोट के कई मामले सामने आए।

एलएलआर अस्पताल में पहले से थी तैयारी
एलएलआर अस्पताल के सीएमएस डॉ. विकास कटियार ने बताया कि होली के मद्देनजर इमरजेंसी में पहले से ही विशेष तैयारियां की गई थीं, जिससे मरीजों को तुरंत इलाज मिल सका।
उन्होंने बताया कि 4 मार्च को
वहीं 5 मार्च को
इन सभी मरीजों को पहले रेड जोन में प्राथमिक उपचार दिया गया, जिसके बाद उन्हें संबंधित विभागों के वार्ड में शिफ्ट किया गया।
ट्रामा केयर की व्यवस्था से मिला तुरंत इलाज
एलएलआर अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक प्रो. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि इमरजेंसी में ट्रामा केयर के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी।
रेड जोन को ट्रामा मरीजों के लिए सुरक्षित रखा गया था, जहां सड़क हादसे और गंभीर चोट वाले मरीजों का प्राथमिक इलाज कर उन्हें बाद में वार्ड में भर्ती किया गया।
उर्सुला और कांशीराम अस्पताल में भी बढ़े केस
उर्सुला अस्पताल के निदेशक डॉ. बीसी पाल ने बताया कि होली के दिन इमरजेंसी में न्यूरो, आर्थो और मेडिसिन विभाग के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा रही।
वहीं कांशीराम चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि इमरजेंसी में सात ऐसे मरीज पहुंचे जिनके सिर और हड्डियों में गंभीर चोट थी, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए एलएलआर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
सावधानी बरतने की अपील
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि त्योहारों के दौरान केमिकल रंगों से बचें, बाइक चलाते समय हेलमेट जरूर पहनें और हुड़दंग से दूर रहें, ताकि इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
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