1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा की अध्यक्षता में लखनऊ में अहम बैठकें हुईं, जिनमें शहरी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र को विकास का मुख्य आधार बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में राजधानी लखनऊ के संगम सभागार में नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग की अलग-अलग उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों की अध्यक्षता प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने की। बैठकों में दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और लक्ष्य प्राप्ति हेतु रणनीतिक बिंदुओं पर गंभीर मंथन किया गया।
नगर विकास विभाग की बैठक में प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद, सचिव/निदेशक अनुज झा, विशेष सचिव प्रवीण लक्षकार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव नरेंद्र भूषण और उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार सहित विभागीय अधिकारियों ने सहभागिता की।

बैठक के दौरान 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य को प्राप्त करने में दोनों विभागों की भूमिका और संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें शहरी आधारभूत संरचना को सुदृढ़ बनाने, आधुनिक शहरी सुविधाओं का विस्तार करने, निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने तथा निवेश आकर्षित करने की ठोस रणनीतियों पर विशेष बल दिया गया।
अपने संबोधन में मंत्री ए. के. शर्मा ने कहा कि नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग प्रदेश की आर्थिक प्रगति के दो मजबूत स्तंभ हैं। यदि शहरी सेवाएं पारदर्शी, प्रभावी और आधुनिक हों तथा विद्युत आपूर्ति विश्वसनीय और निर्बाध रहे, तो उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र को नई गति मिलेगी। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को व्यापक मजबूती प्राप्त होगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लक्ष्य आधारित कार्ययोजना बनाकर उसे समयबद्ध और परिणामोन्मुखी ढंग से धरातल पर उतारा जाए। साथ ही विभागीय समन्वय को और मजबूत करने, प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने तथा सुशासन की भावना से कार्य करने पर विशेष जोर दिया।

बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र पर भी विशेष चर्चा हुई। ऊर्जा मंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना तथा प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत उत्पादित बिजली के मूल्यांकन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इन योजनाओं के तहत उत्पन्न बिजली का मूल्यांकन यदि ऊर्जा विभाग के समेकित आंकड़ों में शामिल नहीं होगा, तो प्रदेश की वास्तविक उपलब्धियां परिलक्षित नहीं हो पाएंगी।
इस स्थिति को सुधारने के लिए मंत्री ने भारत सरकार को पत्र लिखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा प्रदेश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए प्रत्येक यूनिट उत्पादन का सही मूल्यांकन और लेखांकन अनिवार्य है।
अपर मुख्य सचिव नरेंद्र भूषण ने भी कहा कि पीएम सूर्य घर योजना प्रदेश की बड़ी ताकत बन सकती है, लेकिन इसके तहत उत्पादित बिजली के आंकड़े शामिल न होने से विकास की तस्वीर अधूरी रह जाती है। उन्होंने अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर केंद्र सरकार के साथ विस्तृत विमर्श की आवश्यकता बताई।
स्पष्ट है कि 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का लक्ष्य केवल घोषणा नहीं, बल्कि ठोस रणनीति और सख्त निगरानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि इन बैठकों में बने रोडमैप को जमीन पर कितनी तेजी से उतारा जाता है।
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