उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और अतिवृष्टि के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में उतरकर नुकसान का तत्काल आकलन करने और नियमानुसार 24 घंटे में मुआवजा उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, कृषि क्षेत्र में करीब 4,000 करोड़ रुपये की विश्व बैंक समर्थित यूपी-एग्रीज परियोजना के जरिए पूर्वी यूपी और बुंदेलखंड के 28 जिलों में खेती को तकनीक, डिजिटल नेटवर्क, बेहतर बाजार, प्रोसेसिंग और निर्यात से जोड़ने की बड़ी तैयारी की गई है।
उत्तर प्रदेश में एक तरफ लगातार बारिश और अतिवृष्टि ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है, तो दूसरी तरफ सरकार ने राज्य के कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदलने के लिए एक बड़े रोडमैप की घोषणा की है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बारिश से प्रभावित लोगों को कितनी जल्दी राहत मिलेगी, बल्कि अब नजर इस पर भी है कि क्या यूपी का किसान आने वाले वर्षों में पारंपरिक खेती से निकलकर डिजिटल, क्लाइमेट स्मार्ट और ग्लोबल मार्केट से जुड़ी कृषि व्यवस्था का हिस्सा बन पाएगा?
बारिश से पैदा हुई स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कार्यालयों में बैठकर रिपोर्ट का इंतजार न करें, बल्कि प्रभावित इलाकों में पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लें। जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों को राहत पहुंचाने के साथ जरूरतमंद परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
नुकसान का तत्काल आकलन, 24 घंटे में मुआवजे की कार्रवाई
अतिवृष्टि, बारिश और आकाशीय बिजली से होने वाली जनहानि अथवा अन्य नुकसान का तत्काल आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का फोकस प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने पर है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत 24 घंटे के भीतर मुआवजा उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर जलभराव वाले इलाकों में स्थिति बिगड़ने से पहले जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया गया है।
आकाशीय बिजली को लेकर भी मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से सावधानी बरतने की अपील की है। बिजली चमकने और गरजने के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने तथा सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है। वहीं नदियों और जलाशयों के आसपास भी अतिवृष्टि के दौरान विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है, क्योंकि भारी बारिश के दौरान जलस्तर तेजी से बदल सकता है।
बारिश के बीच कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा रोडमैप
प्राकृतिक आपदा से निपटने की तैयारियों के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उत्तर प्रदेश की कृषि को नई दिशा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण एमओयू भी हुए।
विश्व बैंक वित्तपोषित उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग यानी यूपी-एग्रीज परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश विविधीकृत कृषि सहायता परियोजना (यूपीडीएएसपी) के साथ गूगल एवं नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी, आईटीसी और एक्वाब्रिज के एमओयू किए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन साझेदारियों का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसान की आय बढ़ाने, खेती को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप बनाने, वैल्यू एडिशन और ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत करने से है।
लगभग 4,000 करोड़ रुपये की विश्व बैंक समर्थित परियोजना का मुख्य फोकस पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड पर है। सरकार के अनुसार इन क्षेत्रों में कृषि की बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन लंबे समय से बदलाव और निवेश की जरूरत भी रही है।
यूपी-एग्रीज को पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 और बुंदेलखंड के 7, यानी कुल 28 जिलों के 123 विकासखंडों में लागू किया जा रहा है।
परियोजना के तहत लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने और करीब 10 लाख किसानों, 35 हजार मत्स्य उत्पादक किसानों तथा 3 लाख महिलाओं को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार के मुताबिक खरीफ 2026 में ही करीब 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को परियोजना के तहत आच्छादित किया गया है। रबी 2026-27 में भी 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं, मटर, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि किसान को केवल फसल उत्पादक के रूप में न देखा जाए, बल्कि उसे आधुनिक कृषि और अर्थव्यवस्था का समृद्धि भागीदार बनाया जाए।
3,000 हेक्टेयर में DSR, कई फसलें योजना में शामिल
यूपी-एग्रीज के तहत वैज्ञानिक और जलवायु अनुकूल खेती की तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने की तैयारी है। खरीफ 2026 में करीब 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस यानी DSR का प्रयोग किया जा रहा है।
धान के अलावा मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, तिल, उड़द और मूंगफली जैसी फसलों को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है।
सरकार का उद्देश्य कृषि की पारंपरिक ताकत को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ना है, ताकि बदलते मौसम के बीच भी उत्पादन और किसान की आय को बेहतर बनाए रखा जा सके।
किसानों के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की तैयारी
यूपी-एग्रीज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ओपन नेटवर्क फॉर एग्रीकल्चर विकसित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
गूगल और नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी के साथ साझेदारी में प्रस्तावित इस डिजिटल नेटवर्क की अवधारणा यूपीआई और ओएनडीसी जैसे ओपन डिजिटल नेटवर्क से प्रेरित बताई गई है।
लक्ष्य यह है कि किसान को मौसम की जानकारी, बाजार भाव, मिट्टी की जानकारी, कृषि सलाह और एग्रीटेक सेवाओं के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर निर्भर न रहना पड़े।
एक ही इंटरफेस से अलग-अलग कृषि सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इससे एग्रीटेक स्टार्टअप और कंपनियों को भी बड़ी संख्या में किसानों तक अपनी सेवाएं पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
2 लाख एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में क्लाइमेट स्मार्ट खेती
धान और गेहूं के लिए आईटीसी के साथ क्लाइमेट रेजिलिएंट कमोडिटी क्लस्टर विकसित करने की योजना है। इसके तहत दो लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर के विस्तार का प्रस्ताव है।
इसमें जीरो टिलेज, डायरेक्ट सीडेड राइस, जलवायु अनुकूल उन्नत बीज और वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन जैसी तकनीकों को शामिल किया जाएगा।
बहराइच में लगभग 1,500 एकड़ में धान क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसे निर्धारित गुणवत्ता और MRL मानकों के अनुरूप तैयार करने की योजना है।
सरकार ने यहां किसान की प्रति एकड़ आय में 20 से 30 प्रतिशत वृद्धि, यूरिया के इस्तेमाल में 25 प्रतिशत कमी तथा श्रम और सिंचाई में 25 से 30 प्रतिशत बचत का लक्ष्य रखा है।
यूपी-एग्रीज में धान, गेहूं, मिर्च, मक्का, हरी मटर और टमाटर जैसी फसलों के लिए निजी कंपनियों के साथ साझेदारी की जा रही है।
उद्देश्य केवल फसल पैदा करना नहीं, बल्कि उसके बाद की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है।
इसमें उत्पादन से लेकर संग्रहण, भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर है।
यानी किसान की फसल खेत से निकलकर सीधे बेहतर बाजार, प्रोसेसिंग और आगे निर्यात की संभावनाओं से जुड़ सके।
मत्स्य पालन में AI और ऑटोमेटिक फीडिंग तकनीक
यूपी सरकार ने मत्स्य पालन को भी पारंपरिक गतिविधि से निकालकर टेक्नोलॉजी आधारित उद्यम बनाने की योजना रखी है।
एक्वाब्रिज के साथ साझेदारी के जरिए मत्स्य किसानों, सहकारी समितियों और उद्यमियों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा।
इसमें AI आधारित एक्वाकल्चर मैनेजमेंट, ऑटोमेटिक फीडिंग टेक्नोलॉजी, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर रहेगा।
उन्नाव में आईएमसी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत करीब 60 एकड़ में इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर परियोजना विकसित करने की योजना है। इसमें हैचरी, फीड मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग फैसिलिटी और समर्पित ट्रेनिंग सेंटर प्रस्तावित है।
नोएडा एयरपोर्ट के पास मेगा फूड पार्क का प्रस्ताव
कृषि को मंडी से आगे ले जाने के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक मेगा फूड पार्क और एग्री एक्सपोर्ट सेंटर विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
इसका उद्देश्य कृषि उपज को प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक भविष्य की कृषि केवल मिट्टी और मौसम पर निर्भर नहीं रहेगी। डेटा साइंस, तकनीक और मार्केट इंटेलिजेंस भी कृषि व्यवस्था का अहम हिस्सा होंगे।
यूपी-एग्रीज का मूल दर्शन भी इसी दिशा में है—प्रोडक्टिविटी, टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट रेजिलिएंस, मार्केट, एंटरप्राइज और फार्मर प्रॉस्पैरिटी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अतिथियों को ओडीओपी का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र, प्रमुख सचिव पंधारी यादव, विश्व बैंक के अनूप जगवानी, गूगल के सिद्धार्थ प्रकाश, एक्वाब्रिज के मो. ताबिश, नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी की राधा किझनट्टम, आईटीसी के सचिन शर्मा, सीआईपी के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह और सिद्धि नायक एग्रो लिमिटेड के हेमंत गौर समेत अन्य अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आखिर में तस्वीर दो हिस्सों में दिखाई देती है। एक तरफ बारिश और अतिवृष्टि से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश की कृषि को भविष्य के लिए तैयार करने का बड़ा लक्ष्य।
24 घंटे में राहत और मुआवजे की कार्रवाई से लेकर 10 लाख किसानों को आधुनिक कृषि व्यवस्था से जोड़ने तक सरकार ने दोनों मोर्चों पर अपनी प्राथमिकताएं सामने रख दी हैं।
अब असली सवाल इन योजनाओं के ऐलान का नहीं, बल्कि इनके जमीन पर उतरने का है। यदि डिजिटल सेवाएं वास्तव में गांव के किसान तक पहुंचती हैं, लागत घटती है, बाजार मिलता है और उत्पादन से लेकर एक्सपोर्ट तक पूरी वैल्यू चेन मजबूत होती है, तभी यूपी-एग्रीज का दावा किसान की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वास्तविक बदलाव के रूप में दिखाई देगा।
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