अखिलेश यादव ने PDA का नया फुल फॉर्म बताते हुए P से Protest, D से Demonstration और A से Activist बताया। उन्होंने Patience, Discipline और Positive Action का भी जिक्र किया और बीजेपी पर निशाना साधा।
समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चर्चित PDA नारे को लेकर एक नया राजनीतिक अर्थ सामने रखा है। अब तक PDA को पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन अखिलेश यादव ने इसे विरोध, प्रदर्शन और सामाजिक सक्रियता से जोड़ते हुए नया संदेश देने की कोशिश की है।
अखिलेश यादव ने कहा कि PDA में P से Protest, D से Demonstration और A से Activist भी शामिल हैं। उनका कहना था कि जो लोग अपने अधिकारों और मुद्दों को लेकर विरोध करते हैं, प्रदर्शन करते हैं और अपनी आवाज उठाते हैं, वे भी PDA का हिस्सा हैं।
यानी सपा प्रमुख का फोकस अब PDA को केवल एक सामाजिक-राजनीतिक समीकरण के तौर पर पेश करने के बजाय आंदोलन और सक्रिय भागीदारी से जोड़ने पर भी दिखाई दिया।
PDA का नया मतलब क्या बताया अखिलेश ने?
अखिलेश यादव ने PDA की व्याख्या करते हुए कहा कि इसमें Protest करने वाले लोग, Demonstration करने वाले लोग और Activist यानी सामाजिक रूप से सक्रिय लोग शामिल हैं।
उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश की राजनीति में PDA के दायरे को और व्यापक करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सपा प्रमुख लगातार PDA को अपनी पार्टी की राजनीतिक रणनीति और सामाजिक न्याय की राजनीति के केंद्र में रखते रहे हैं।
लेकिन इस बार उन्होंने PDA के अंग्रेजी शब्दों के जरिए विरोध और सक्रियता को भी इसके साथ जोड़ दिया।
उन्होंने आगे PDA को Patience यानी धैर्य और Discipline यानी अनुशासन से भी जोड़ा। अखिलेश ने बताया कि एक साथी ने उनसे कहा कि अगर लोगों के अंदर धैर्य रहेगा, अनुशासन रहेगा और उनके Positive Actions यानी सकारात्मक कदम जारी रहेंगे, तो PDA की सरकार बनने से कोई रोक नहीं सकता।
‘PDA से विरोधियों के पेट में दर्द’
सपा प्रमुख ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर भी निशाना साधा।
अखिलेश यादव ने कहा कि विरोधी लोगों को PDA और PDA के अलग-अलग फुल फॉर्म से भी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि PDA Progressive है और Visionary है।
उनके मुताबिक जो लोग विजनरी होते हैं, वे लगातार लोगों को जोड़ने का काम करते हैं। बदलाव आने पर विजनरी सोच और विकास के साथ आगे बढ़ा जाता है।
अखिलेश का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों और आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।
रक्षाबंधन पर मुफ्त बसों को लेकर सरकार पर हमला
अखिलेश यादव ने रक्षाबंधन के दौरान महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा की सरकारी घोषणा को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि रक्षाबंधन के मौके पर बहनों को मुफ्त बस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। लेकिन उनके मुताबिक पूरे प्रदेश में व्यवस्थाएं अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहीं।
सपा प्रमुख ने दावा किया कि भारी दबाव के बावजूद मीडिया में कई ऐसी खबरें सामने आईं, जिनमें व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए गए।
उन्होंने कहा कि कहीं पर्याप्त इंतजाम नहीं था तो कहीं मुफ्त बस सेवा उपलब्ध नहीं थी। अखिलेश ने कहा कि इन व्यवस्थाओं को लेकर सामने आई खबरें लोगों के सामने हैं।
इस मुद्दे के जरिए उन्होंने सरकार की त्योहारों के दौरान सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
‘तानाशाही न कभी चली, न चलेगी’
अखिलेश यादव ने अपने बयान में सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला भी किया।
उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों की परेशानियों की कोई परवाह नहीं है। उनका कहना था कि तानाशाही न कभी चली है और न आगे चलेगी, क्योंकि आम लोग जागरूक हैं।
सपा प्रमुख ने PDA को लेकर विरोधियों की चिंता पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पुरातनपंथी, संकीर्ण सोच वाले और सामंतवादी लोगों को PDA से घबराहट है।
अखिलेश के मुताबिक जैसे-जैसे नए लोग PDA से जुड़ते हैं, विरोधियों की घबराहट और बढ़ती है। उन्होंने आरोप लगाया कि PDA को रोकने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं।
‘बीजेपी के नैरेटिव से सावधान रहना होगा’
अखिलेश यादव ने अपने समर्थकों और PDA से जुड़े लोगों को बीजेपी के राजनीतिक नैरेटिव को लेकर भी सावधान रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि समाज ने हजारों वर्षों से समस्याएं झेली हैं और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कुछ हद तक इन समस्याओं को सामान्य करने और सामाजिक बराबरी की दिशा में प्रयास किया।
अखिलेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी की ओर से कई तरह के नैरेटिव गढ़े जाएंगे और लोगों को इन सभी नैरेटिव से सावधान रहना होगा।
यह बयान उनके उस लगातार चल रहे राजनीतिक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह सामाजिक न्याय, आरक्षण और पिछड़े, दलित तथा अल्पसंख्यक वर्गों के मुद्दों को प्रमुखता देते रहे हैं।
आरक्षण के मुद्दे पर भी बीजेपी को घेरा
इससे पहले भी अखिलेश यादव बीजेपी पर आरक्षण को लेकर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी आरक्षण को खत्म करना चाहती है।
अब PDA के नए फुल फॉर्म के जरिए अखिलेश यादव ने विरोध, प्रदर्शन, एक्टिविज्म, धैर्य, अनुशासन और सकारात्मक कार्रवाई को भी अपनी राजनीतिक भाषा का हिस्सा बनाया है।
PDA को लेकर बढ़ रहा राजनीतिक संदेश
अखिलेश यादव के ताजा बयान को सिर्फ शब्दों का खेल मानना आसान नहीं होगा। PDA पहले से ही समाजवादी पार्टी की राजनीति का एक प्रमुख राजनीतिक संदेश है।
अब Protest, Demonstration और Activist जैसे शब्द जोड़कर अखिलेश ने इसे उन लोगों से जोड़ने की कोशिश की है जो सरकार या व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हैं।
वहीं Patience, Discipline और Positive Action का जिक्र करते हुए उन्होंने अपने समर्थकों को लंबे राजनीतिक संघर्ष के लिए तैयार रहने का संदेश भी दिया।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय में PDA किस तरह का राजनीतिक आकार लेता है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल अखिलेश यादव के नए फुल फॉर्म ने PDA को लेकर सियासी बहस जरूर तेज कर दी है।
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