लखनऊ के अलीगंज स्थित एक निजी कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली। हादसे में कई लोग घायल हुए हैं। मृतकों में दिसंबर में शादी करने वाले युवक-युवती और परिवार के इकलौते कमाने वाले भी शामिल हैं। एसआईटी जांच शुरू हो चुकी है और प्रशासन ने कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार को उस समय दहल उठी जब अलीगंज के पुरनिया इलाके में स्थित एक बहुमंजिला निजी कोचिंग सेंटर में अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं और आग की लपटों से घिर गई। अंदर मौजूद छात्र, कर्मचारी और प्रशिक्षु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन कई लोगों के लिए यह इमारत मौत का फंदा साबित हुई।
इस भयावह हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों का इलाज किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में चल रहा है। यह हादसा सिर्फ एक अग्निकांड नहीं, बल्कि 15 परिवारों की जिंदगी में कभी न भरने वाला जख्म बन गया है।
दिसंबर में होनी थी शादी, लेकिन पहले ही बुझ गए दो जीवन
हादसे में जान गंवाने वालों में नीलेश और अनामिका भी शामिल हैं। दोनों एक ही संस्थान में काम करते थे और इसी साल दिसंबर में उनकी शादी होने वाली थी। परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शादी के सपने सजाने वाले दोनों युवा एक साथ दुनिया छोड़ गए। उनके परिवारों में मातम पसरा हुआ है और रिश्तेदारों को अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि जिनके हाथों में कुछ महीनों बाद वरमाला होनी थी, आज उनकी अर्थियां उठ चुकी हैं।

मां-बाप का इकलौता सहारा भी छिन गया
मृतकों में अब्दुल रहमान का नाम भी शामिल है, जो अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। लंबे समय तक नौकरी की तलाश करने के बाद उसे इस संस्थान में आईटी टेक्नीशियन के रूप में काम मिला था। उसके दोस्तों के अनुसार वह मेहनती और जिम्मेदार युवक था।
सबसे दर्दनाक बात यह रही कि हादसे के समय उसके माता-पिता की तबीयत इतनी खराब थी कि वे अपने बेटे का शव लेने तक मॉर्चरी नहीं पहुंच सके। अब्दुल की मौत ने पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक संकट में डाल दिया है।
कैसे लगी आग और कैसे मचा मौत का तांडव?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सोमवार दोपहर अचानक इमारत में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही देर में पूरा भवन धुएं से भर गया, जिससे अंदर मौजूद लोगों का दम घुटने लगा।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन तब तक कई लोग धुएं और आग के बीच फंस चुके थे। आग इतनी भयावह थी कि कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से नीचे उतरने की कोशिश की।

चश्मदीद की जुबानी मौत के उन खौफनाक पलों की कहानी
हादसे में घायल हुई लवप्रीत ने अस्पताल से अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि अचानक चारों ओर धुआं फैल गया था और किसी को समझ नहीं आ रहा था कि बाहर निकलने का रास्ता कहां है।
उनके अनुसार दम घुटने लगा था और लोग चीख रहे थे। उन्होंने छत की तरफ भागने की कोशिश की, लेकिन वहां भी रास्ता नहीं मिला। आखिरकार उन्होंने तार पकड़कर नीचे उतरने का प्रयास किया, लेकिन संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर गईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं। फिलहाल उनका इलाज जारी है।
मृतकों की सूची ने हर किसी को झकझोर दिया
इस दर्दनाक हादसे में सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुच्छा, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, अब्दुल रहमान, सूरज, शहजान, जयनिल चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमल्या की मौत हुई है।
इन नामों के पीछे ऐसे परिवार हैं जिनकी दुनिया उजड़ चुकी है। किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने बेटी, किसी ने भाई और किसी ने जीवनसाथी बनने वाला साथी।
10 दमकल गाड़ियों ने घंटों बाद पाया आग पर काबू
राहत एवं बचाव अभियान के दौरान फायर ब्रिगेड की लगभग 10 गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। बचाव दल ने इमारत की पिछली दीवार तोड़कर अंदर पहुंचने का रास्ता बनाया। इसी रास्ते से कई लोगों को बाहर निकाला गया और शवों को भी निकाला गया।

अधिकारियों के अनुसार पूरी इमारत की तलाशी ली जा चुकी है और अब किसी के अंदर फंसे होने की संभावना नहीं है।
हादसे के बाद प्रशासन का बड़ा एक्शन
हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला, पेट शॉप संचालक राम कृष्ण उपाध्याय और एनीमेशन कोचिंग संचालक तुषार कृष्णा जायसवाल समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
एफएसएल और एसआईटी की टीमें घटनास्थल पर पहुंच चुकी हैं। बिल्डिंग के दस्तावेजों की जांच की जा रही है और यह भी चर्चा है कि नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर भवन पर बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है।
सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये तथा गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
लेकिन जिन परिवारों ने अपने बच्चों, भाई-बहनों और जीवनसाथियों को खो दिया, उनके लिए यह मुआवजा उस दर्द को कभी कम नहीं कर सकता जो यह हादसा दे गया है।
लखनऊ का यह अग्निकांड सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों, प्रशासनिक लापरवाही और अवैध निर्माणों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब पूरे प्रदेश की नजर एसआईटी जांच पर टिकी है कि आखिर वह कौन सी चूक थी जिसने 15 जिंदगियों को हमेशा के लिए बुझा दिया।
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