गाजियाबाद जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की बैठक में कूप पंजीकरण, अनापत्ति प्रमाण पत्र और नवीनीकरण से जुड़े विभिन्न आवेदनों पर निर्णय लिया गया। वहीं बाल भारती पब्लिक स्कूल, बृज विहार द्वारा भूगर्भ जल उपयोग संबंधी एनओसी आवेदन पर परिषद ने सख्त रुख अपनाते हुए पहले 8 लाख रुपये का जुर्माना जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
भूगर्भ जल संरक्षण और उसके नियमन को लेकर प्रशासन अब पहले से अधिक सख्त नजर आ रहा है। इसी दिशा में सोमवार को जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद, गाजियाबाद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भूगर्भ जल से जुड़े विभिन्न मामलों और प्राप्त आवेदनों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया तथा नियमों के अनुरूप निर्णय लिए गए।
बैठक में कूप पंजीकरण, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), एनओसी नवीनीकरण, वेतन अभिकरण पंजीकरण और विशेष मामलों से संबंधित आवेदनों की समीक्षा की गई। परिषद के निर्णयों से यह स्पष्ट संकेत मिला कि भूगर्भ जल के उपयोग और संरक्षण के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कूप पंजीकरण के सभी आवेदन स्वीकृत
बैठक में सबसे पहले कूप पंजीकरण से संबंधित आवेदनों की समीक्षा की गई। परिषद के समक्ष कुल पांच आवेदन प्रस्तुत किए गए थे। दस्तावेजों और निर्धारित मानकों की जांच के बाद सभी पांचों आवेदनों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई।

अधिकारियों का कहना है कि कूप पंजीकरण भूगर्भ जल प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे जल संसाधनों की निगरानी और संरक्षण को प्रभावी बनाया जा सकता है।
अनापत्ति प्रमाण पत्र के आवेदन को मिली मंजूरी
अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने के लिए प्राप्त एक आवेदन पर भी परिषद ने विचार किया। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी पाए जाने पर इस आवेदन को स्वीकृत कर दिया गया।
एनओसी जारी करने की प्रक्रिया भूगर्भ जल के नियंत्रित उपयोग और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नवीनीकरण के छह आवेदनों में एक अस्वीकृत
बैठक में अनापत्ति प्रमाण पत्र के नवीनीकरण से जुड़े छह मामलों की भी समीक्षा की गई। इनमें से एक आवेदन को निर्धारित मानकों पर खरा न उतरने के कारण अस्वीकृत कर दिया गया।
वहीं शेष पांच आवेदनों के संबंध में परिषद ने निर्देश दिए कि संबंधित क्षेत्रों में तालाबों और जल संरक्षण संरचनाओं की स्थिति का सत्यापन किया जाए। जांच पूरी होने के बाद इन मामलों को ऑनलाइन माध्यम से राज्य प्राधिकरण को अग्रसारित किया जाएगा।
इस निर्णय को भूगर्भ जल संरक्षण और जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वेतन अभिकरण पंजीकरण के सभी आवेदन खारिज
बैठक में वेतन अभिकरण पंजीकरण से जुड़े सात आवेदनों पर भी चर्चा हुई। परिषद ने सभी सातों आवेदनों को अस्वीकृत कर दिया।
हालांकि बैठक में अस्वीकृति के विस्तृत कारणों का उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित मानकों और नियमों का पालन न होने की स्थिति में किसी भी आवेदन को मंजूरी नहीं दी जा सकती।
बाल भारती पब्लिक स्कूल का मामला बना चर्चा का केंद्र
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित विषय बाल भारती पब्लिक स्कूल, बृज विहार, गाजियाबाद से संबंधित रहा।
स्कूल द्वारा धारा-51 (स्पेशल केस) के अंतर्गत अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। परिषद ने इस मामले की समीक्षा के दौरान पाया कि स्कूल पर पूर्व में लगाया गया आर्थिक दंड अब तक जमा नहीं कराया गया है।
जानकारी के अनुसार, 13 मई 2026 को विद्यालय पर भूगर्भ जल नियमों के उल्लंघन के चलते दोगुना जुर्माना लगाया गया था। यह जुर्माना कुल 8 लाख रुपये निर्धारित किया गया था।

परिषद की बैठक में स्पष्ट किया गया कि यह राशि अभी तक जमा नहीं की गई है।
जुर्माना जमा किए बिना आगे नहीं बढ़ेगी फाइल
मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यालय को तत्काल अनुस्मारक और अंतिम चेतावनी नोटिस जारी किया जाए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बाल भारती पब्लिक स्कूल द्वारा प्रस्तुत ऑफलाइन एनओसी आवेदन पर तब तक कोई सकारात्मक संस्तुति नहीं दी जाएगी, जब तक विद्यालय निर्धारित 8 लाख रुपये की जुर्माना राशि जमा नहीं कर देता।
जुर्माना जमा होने के बाद ही आवेदन को संस्तुति सहित आगे की कार्रवाई के लिए केंद्रीय प्राधिकरण, लखनऊ भेजा जाएगा।
यह निर्णय प्रशासन की सख्त नीति को दर्शाता है, जिसके तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को बिना जवाबदेही के राहत नहीं दी जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि गाजियाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे जनपद में भूगर्भ जल स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद द्वारा की जा रही नियमित समीक्षा और निगरानी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
बैठक में लिए गए निर्णय यह संकेत देते हैं कि प्रशासन भूगर्भ जल के अनियंत्रित दोहन को रोकने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए गंभीरता से कार्य कर रहा है।
बैठक के अंत में संयुक्त निदेशक ने मुख्य विकास अधिकारी तथा परिषद के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही बैठक का औपचारिक समापन किया गया।
भूगर्भ जल संरक्षण से जुड़े इन निर्णयों को आने वाले समय में जिले में जल प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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