लखनऊ में ‘सशक्त भविष्य’ कार्यक्रम में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, AI, डेटा और कौशल विकास के जरिए सतत विकास लक्ष्यों को गति देने पर विशेषज्ञों ने मंथन किया।
क्या किसी प्रदेश का विकास सिर्फ सड़क, भवन और उद्योगों की संख्या से तय किया जा सकता है? अगर जवाब नहीं है, तो फिर असली सवाल स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की बुनियाद को मजबूत करने का है। इसी सवाल के बीच बुधवार को लखनऊ के होटल क्लार्क्स अवध में आयोजित ‘सशक्त भविष्य: शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को गति’ कार्यक्रम में सतत विकास लक्ष्यों यानी SDGs को हासिल करने की रणनीति पर विस्तार से मंथन हुआ।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, डिजिटल हेल्थ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कौशल विकास और सार्वजनिक नीति से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चा का केंद्र यह रहा कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि डेटा, तकनीक और नवाचार के इस्तेमाल से उनका वास्तविक लाभ बच्चों, महिलाओं, युवाओं और आम लोगों तक पहुंचे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव, नियोजन श्री आलोक कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जिनका सीधा संबंध सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति से है। उन्होंने सफल प्रयासों और नवाचारों को साझा करने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि उनसे सीख लेकर अधिक प्रभावी रणनीतियां तैयार की जा सकें।

उन्होंने कहा कि डेटा, प्रौद्योगिकी और नवाचार का बेहतर इस्तेमाल योजनाओं के परिणामों को और प्रभावी बना सकता है। यानी अब केवल योजनाएं बनाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके असर को आंकड़ों के माध्यम से समझना और जरूरत के मुताबिक रणनीति में बदलाव करना भी जरूरी है।
स्वास्थ्य और पोषण की चुनौती पर गंभीर चर्चा
कार्यक्रम के पहले सत्र में स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े SDGs की चुनौतियों और उनके संभावित समाधान पर चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव श्री अमित कुमार घोष ने बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए डेटा, तकनीक और नवाचार के प्रभावी इस्तेमाल को जरूरी बताया।
वहीं अपर मुख्य सचिव, बाल विकास एवं पुष्टाहार श्रीमती लीना जौहरी ने बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई।
नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वी.के. पॉल ने स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में निवेश को मानव विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार इन क्षेत्रों में किया गया निवेश केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा नहीं करता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मजबूत आधार तैयार करता है।

पहले सत्र की पैनल चर्चा में स्वास्थ्य और पोषण की जमीनी चुनौतियों पर भी बात हुई। डॉ. श्वेता खंडेलवाल, रबी परही, डॉ. विनोद कुमार अग्रवाल, अनुपमा शांडिल्य और आशुतोष कुमार सिंह ने रोकथाम योग्य मौतों, बच्चों में कम वजन और अविकसित शारीरिक विकास जैसी समस्याओं पर अपने विचार साझा किए।
चर्चा में यह सवाल भी सामने आया कि मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था और डेटा प्रणाली को आधुनिक तकनीक के साथ किस तरह जोड़ा जाए। हिमांशु बुराड, पीयूष एंटनी, डॉ. कनिका अग्रवाल और डॉ. आलोक सक्सेना ने स्वास्थ्य ढांचे और डेटा व्यवस्था को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकों के माध्यम से मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार रखे।
शिक्षा को बताया सतत विकास की आधारशिला
कार्यक्रम का दूसरा सत्र शिक्षा और कौशल विकास पर केंद्रित रहा। अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा SDGs की आधारशिला है। बेहतर शैक्षिक अवसर और आवश्यक कौशल लोगों के मानव विकास को मजबूती देते हैं।
वहीं प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरि ओम ने शिक्षा के साथ कौशल विकास को जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार और बेहतर अवसरों से जोड़ने के लिए शिक्षा के साथ रोजगारपरक प्रशिक्षण भी जरूरी है। SDGs की दिशा में आगे बढ़ने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल आधारित प्रशिक्षण को समान महत्व देना होगा।

शिक्षा से जुड़े सत्र में शंकर नारायणन, विनोद कराटे, सुनील कुमार, प्रेम रंजन सिंह और विष्णु कांत पांडेय ने नामांकन बढ़ाने, बच्चों को विद्यालयों में बनाए रखने, डिजिटल कौशल विकसित करने और सीखने के बेहतर परिणाम हासिल करने जैसे विषयों पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने माना कि सिर्फ स्कूल में नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बच्चों की निरंतर उपस्थिति, सीखने की गुणवत्ता और बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप कौशल विकसित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर में बदलती जरूरतें
कार्यक्रम में चौथी औद्योगिक क्रांति के प्रभाव पर भी विशेष चर्चा हुई। प्रो. बलवंत सिंह मेहता, डॉ. कृष्ण कुमार सिंह, डॉ. अनन्या समाजदार, प्रणव बंसोडे और दीपक कुमार सिंह ने बदलते दौर में कौशल, रोजगार और करियर के बदलते स्वरूप पर अपने विचार साझा किए।
चर्चा का व्यापक संदेश यही रहा कि भविष्य की नौकरियों और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी है। युवाओं को ऐसे कौशल से लैस करना होगा, जो तकनीकी बदलावों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।
सिर्फ योजनाएं नहीं, असर पर नजर जरूरी
‘सशक्त भविष्य’ कार्यक्रम में हुई चर्चा ने यह संकेत दिया कि सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा को अलग-अलग खांचों में देखने के बजाय एक-दूसरे से जोड़कर काम करना होगा। डेटा और AI जैसी तकनीकें जहां योजनाओं की निगरानी और निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बना सकती हैं, वहीं मजबूत आंगनबाड़ी व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास मानव विकास की नींव मजबूत कर सकते हैं।
अब चुनौती यही है कि कार्यक्रमों और चर्चाओं में सामने आए नवाचार और सुझाव कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं। क्योंकि सतत विकास के लक्ष्य केवल आंकड़ों में प्रगति दर्ज करने से नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में दिखाई देने वाले बदलाव से पूरे होंगे।
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