प्रदेश के सभी 89 कृषि विज्ञान केंद्रों की समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने KVK को किसानों के लिए आदर्श मॉडल बनाने के निर्देश दिए। रबी सीजन में समय पर बुवाई, लाइन सोइंग, इंटर क्रॉपिंग और बॉर्डर लाइनिंग पर जोर दिया गया। KVK की रैंकिंग और हर दो माह में स्थलीय निरीक्षण के साथ 17 सितंबर से स्वच्छता अभियान और सभी विकासखंडों में पांच दिवसीय किसान मेलों में सहभागिता के निर्देश भी दिए गए।
कृषि विज्ञान केंद्र यानी KVK अब सिर्फ वैज्ञानिक शोध और प्रक्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेंगे। सरकार चाहती है कि इन केंद्रों की तकनीक और नवाचार सीधे किसानों के खेतों में दिखाई दें और खेती की तस्वीर बदलने में इनकी भूमिका साफ नजर आए। मंगलवार को कृषि भवन सभागार में प्रदेश के सभी 89 कृषि विज्ञान केंद्रों की समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इसी दिशा में कई अहम निर्देश दिए।
बैठक में रबी सीजन की तैयारियों से लेकर दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने, किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, KVK की रैंकिंग और नियमित स्थलीय निरीक्षण तक कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री के निर्देशों से साफ है कि अब कृषि विज्ञान केंद्रों के कामकाज को केवल गतिविधियों की संख्या से नहीं, बल्कि किसानों को मिलने वाले वास्तविक लाभ से जोड़ने की तैयारी है।
‘KVK किसानों के लिए मंदिर के समान’
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों के लिए मंदिर के समान हैं। यहां वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे शोध और नवाचार केवल केंद्रों के प्रक्षेत्रों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उनका वास्तविक असर किसानों के खेतों में दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक KVK को एक आदर्श मॉडल के तौर पर विकसित किया जाए और उसका मुख्य उद्देश्य हर हाल में किसान को लाभ पहुंचाना होना चाहिए। वैज्ञानिकों को निर्देश दिया गया कि निर्धारित मॉड्यूल के अनुसार काम करते हुए केंद्रों पर व्यावहारिक गतिविधियों को तेजी से बढ़ाया जाए।

बैठक में रबी सीजन की तैयारियों को लेकर मंत्री ने खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों में फसलों की देरी से बुवाई यानी लेट सोइंग की प्रवृत्ति को हर हाल में बदलना होगा। देरी से बुवाई का सीधा असर फसल के उत्पादन और उत्पादकता पर पड़ता है।
वैज्ञानिकों को किसानों को समय पर बुवाई, निराई-गुड़ाई और कटाई के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही खेतों में लाइन सोइंग, इंटर क्रॉपिंग यानी सहफसली खेती और बॉर्डर लाइनिंग जैसी उन्नत कृषि पद्धतियों को अनिवार्य रूप से लागू कराने पर जोर दिया गया।
मंत्री ने कहा कि इन तकनीकों की जानकारी केवल बैठकों या प्रशिक्षण तक सीमित न रहे। वैज्ञानिक अपने KVK के प्रक्षेत्रों के साथ-साथ किसानों के खेतों पर सजीव प्रदर्शन कराएं, ताकि किसान तकनीक को अपनी आंखों के सामने देखकर उसे अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वैज्ञानिकों के सामने आने वाली नीतिगत और तकनीकी चुनौतियों का शासन स्तर पर तत्परता से समाधान कराया जाएगा।
अब KVK की होगी रैंकिंग, दो महीने में निरीक्षण
कृषि विज्ञान केंद्रों के कामकाज में पारदर्शिता और परिणामोन्मुखी व्यवस्था लाने के लिए कृषि मंत्री ने कृषि विश्वविद्यालयों के स्तर पर KVK की नियमित रैंकिंग कराने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही उच्च स्तर पर कम से कम हर दो माह में कृषि विज्ञान केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य केंद्रों की वास्तविक गतिविधियों, किसानों से जुड़ाव और योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की जमीनी समीक्षा करना है।
मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित विभिन्न वेलफेयर स्कीम को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में कृषि विज्ञान केंद्र महत्वपूर्ण कड़ी बनें। इसके लिए किसानों को योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी देने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
बीज, कृषि यंत्र और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पर जागरूकता
बैठक में किसानों को उपलब्ध सरकारी सुविधाओं के प्रचार-प्रसार का मुद्दा भी उठा। मंत्री ने वर्तमान में खुले बीज पोर्टल और कृषि यंत्र पोर्टल की जानकारी किसानों तक व्यापक स्तर पर पहुंचाने के निर्देश दिए।

इसके अलावा 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के बारे में भी किसानों को जागरूक करने को कहा गया। उद्देश्य यही है कि सरकारी सुविधाएं और कृषि संबंधी तकनीकी सहायता कागजों या पोर्टल तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक लाभार्थी किसान तक पहुंचे।
17 सितंबर से स्वच्छता अभियान, विकासखंडों में पांच दिवसीय किसान मेले
कृषि मंत्री ने 17 सितंबर को सेवा संकल्प अभियान के अवसर पर व्यापक स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही प्रदेश के सभी विकासखंडों में आयोजित होने वाले पांच दिवसीय किसान मेलों में कृषि विज्ञान केंद्रों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने को कहा गया।
इन मेलों के जरिए किसानों को कृषि तकनीक, सरकारी योजनाओं, उन्नत कृषि पद्धतियों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देने पर जोर रहेगा।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव रवींद्र, विशेष सचिव लाल बहादुर यादव, बांदा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एसवीएस राजू, मेरठ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति त्रिवेणी दत्त, कानपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति संजीव गुप्ता, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, निदेशक कृषि टीएम त्रिपाठी सहित प्रदेश के सभी 89 कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अब देखना यह होगा कि KVK को मॉडल बनाने, उनकी रैंकिंग करने और हर दो माह में स्थलीय निरीक्षण के इन निर्देशों का असर किसानों के खेतों तक कितनी तेजी से पहुंचता है। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता साफ है—शोध प्रयोगशालाओं से निकलकर खेत तक पहुंचे और कृषि विज्ञान का लाभ सीधे किसान की फसल में दिखाई दे।
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