उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण कनेक्टिविटी को नई दिशा देने की तैयारी है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित PMGSY चिंतन शिविर-2026 में UPRRDA के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने बताया कि प्रदेश में 80,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़क नेटवर्क है और 5,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण पर्यावरण-अनुकूल FDR तकनीक से किया जा चुका है। अब PMGSY-IV में गुणवत्ता, स्थायित्व, नवाचार और जलवायु-सहनीयता पर जोर रहेगा।
किसी गांव की तस्वीर बदलने के लिए हमेशा बड़ी इमारतों या बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट की जरूरत नहीं होती। कई बार एक मजबूत और पक्की सड़क ही पूरे गांव की अर्थव्यवस्था को बदलने की शुरुआत कर देती है। किसान के लिए मंडी तक पहुंच आसान हो, महिलाओं के बनाए उत्पाद बाजार तक पहुंचें, युवाओं को कॉलेज और कौशल प्रशिक्षण केंद्र तक जाने में कम समय लगे या सरकारी योजनाओं का लाभ गांव के आखिरी परिवार तक पहुंचे—इन सभी के पीछे बेहतर सड़क संपर्क की अहम भूमिका होती है।
उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) को इसी सोच के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशन और नेतृत्व में ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। दावा है कि सुदूर गांवों तक पक्की सड़कों का विस्तार अब ग्रामीण विकास और आर्थिक बदलाव का माध्यम बन रहा है।
इसी कार्यप्रणाली और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित PMGSY चिंतन शिविर-2026 में हुई।
80 हजार KM से ज्यादा ग्रामीण सड़क नेटवर्क
चिंतन शिविर में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (UPRRDA) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने उत्तर प्रदेश की ग्रामीण सड़क व्यवस्था और भविष्य की रणनीति को सामने रखा।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 80,000 किलोमीटर से अधिक का ग्रामीण सड़क नेटवर्क मौजूद है। अब UPRRDA प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण यानी PMGSY-IV में प्रवेश कर रहा है।

इस नए चरण में केवल सड़क की लंबाई बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं होगा, बल्कि सड़क की गुणवत्ता, स्थायित्व, नवाचार, जलवायु-सहनीयता और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जाएगी।
यानी आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि सड़क बनी या नहीं, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि वह कितनी मजबूत है, कितने लंबे समय तक टिकती है और बदलते मौसम की चुनौतियों का कितना सामना कर सकती है।
5,000 KM से ज्यादा सड़कें FDR तकनीक से बनीं
उत्तर प्रदेश की ग्रामीण सड़क निर्माण व्यवस्था में सबसे खास पहल फुल डेप्थ रिक्लेमेशन यानी FDR तकनीक को माना जा रहा है।
शिव सहाय अवस्थी के अनुसार प्रदेश में अब तक 5,000 किलोमीटर से अधिक FDR सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इस तकनीक में मौजूदा सड़क सामग्री का अधिकतम उपयोग करते हुए सड़क को दोबारा मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जाता है।
इसका बड़ा फायदा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सड़क निर्माण के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के रूप में सामने आता है।
उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण-अनुकूल सड़क निर्माण की इस तकनीक में देश में अग्रणी भूमिका निभाई है। अवस्थी के मुताबिक प्रदेश की FDR तकनीक और कार्यप्रणाली को समझने के लिए अन्य राज्यों के अधिकारी भी उत्तर प्रदेश का अध्ययन करने पहुंच रहे हैं।
यह प्रदेश में अपनाई जा रही तकनीक और कार्यशैली के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
सड़क का मतलब सिर्फ सफर नहीं, बाजार तक पहुंच भी
ग्रामीण सड़क नेटवर्क का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं रहता। अच्छी सड़कें किसानों को सीधे बाजार और मंडियों से जोड़ने में मदद करती हैं। इससे ग्रामीण उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होता है और समय तथा परिवहन लागत को कम करने में मदद मिलती है।
इसी तरह स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को भी बड़े बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलता है। गांव की महिलाएं यदि स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार कर रही हैं तो बेहतर सड़क संपर्क उनके उत्पादों को स्थानीय बाजार से आगे ले जाने में मददगार साबित हो सकता है।
युवाओं के लिए भी बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा फायदा है। शिक्षा, कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होने से ग्रामीण युवाओं के लिए संभावनाओं का दायरा बढ़ता है।

सरकारी योजनाओं का लाभ भी होगा आसान
शिव सहाय अवस्थी ने यह भी बताया कि मजबूत ग्रामीण सड़क नेटवर्क से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सहायता मिलती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, स्वयं सहायता समूह, ग्रामीण रोजगार, कौशल विकास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बेहतर सड़क संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
दरअसल, गांव तक सड़क पहुंचने का मतलब सिर्फ वाहन का पहुंचना नहीं है। इसके साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच के रास्ते भी खुलते हैं।
PMGSY-IV में अब गुणवत्ता और भविष्य की तैयारी पर फोकस
PMGSY-IV के तहत उत्तर प्रदेश की प्राथमिकता ग्रामीण सड़कों को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाना है।
चिंतन शिविर में राज्यों, राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास अभिकरण (NRIDA) और अन्य हितधारकों ने ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श किया। उत्तर प्रदेश अब इस शिविर से मिले अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपने ग्रामीण सड़क कार्यक्रम में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
शिव सहाय अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश “बेहतर नहीं, बेहतरीन” कार्य करने के विश्वास के साथ ग्रामीण सड़क निर्माण में नई तकनीकों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
आखिरकार मजबूत सड़क नेटवर्क का लक्ष्य केवल गांवों को शहरों से जोड़ना नहीं है। इसके पीछे बड़ा उद्देश्य है—आत्मनिर्भर गांव, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकसित उत्तर प्रदेश।
अगर सड़क गांव तक पहुंचती है, तो बाजार भी पहुंचता है, अवसर भी पहुंचते हैं और विकास की रफ्तार भी बढ़ती है। PMGSY-IV के साथ उत्तर प्रदेश इसी बदलाव को और व्यापक बनाने की तैयारी में है।
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