उत्तर प्रदेश और नाइजीरिया के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं पर लखनऊ में महत्वपूर्ण बैठक हुई। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में हुई चर्चा में कृषि तकनीक, खाद्य सुरक्षा, उद्यानिकी, सहकारिता, ग्रामीण विकास, कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन और किसानों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। इसी दिन कृषि अनुसंधान, खाद-बीज-कीटनाशक व्यापार और यूपी को ग्लोबल एग्री हब बनाने की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।
उत्तर प्रदेश की खेती अब सिर्फ प्रदेश की सीमाओं तक सीमित रखने की कोशिश नहीं है। सरकार कृषि को आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर बाजार से जोड़ते हुए वैश्विक स्तर पर नई साझेदारियों की संभावनाएं तलाश रही है। इसी दिशा में बुधवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश और नाइजीरिया के बीच कृषि सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई।
स्थानीय निजी होटल में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में नाइजीरिया के कृषि एवं खाद्य सुरक्षा राज्य मंत्री सीनेटर डॉ. अलीयू साबी अब्दुल्लाही के नेतृत्व में आए 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक हुई। दोनों पक्षों ने कृषि क्षेत्र के अनुभव साझा किए और यह समझने की कोशिश की कि तकनीक, उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और किसानों के हित में आपसी सहयोग को किस तरह आगे बढ़ाया जा सकता है।
बैठक में सबसे अहम सवाल यही रहा कि कृषि में होने वाले नवाचारों और तकनीकी सहयोग का वास्तविक लाभ किसानों तक कैसे पहुंचे।

बैठक के दौरान नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल ने अपने देश में कृषि क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न नवाचारों और प्रयासों की जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ साझा की।
वहीं, उत्तर प्रदेश की ओर से भी कृषि और उद्यान क्षेत्र में किए जा रहे आधुनिक प्रयोगों तथा तकनीक के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।
प्रमुख सचिव उद्यान बीएल मीणा, प्रमुख सचिव कृषि रवींद्र तथा आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता योगेश कुमार ने प्रदेश में चल रहे कार्यक्रमों और नवाचारों की जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल को कृषि उत्पादन, उद्यानिकी, सहकारिता और ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों से अवगत कराया गया।
सरकार का जोर ऐसी तकनीकों और व्यवस्थाओं पर है, जिनसे खेती की लागत कम हो और किसानों को उत्पादन के साथ-साथ बाजार में भी बेहतर मूल्य मिल सके।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की समृद्धि के लिए बीज से बाजार तक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और नवाचारों को कृषि से जोड़कर किसानों की लागत कम करना और उनकी आय एवं लाभ में वृद्धि करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
यूपी और नाइजीरिया के बीच हुई बैठक में भी इसी व्यापक सोच के तहत कृषि तकनीक, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण विकास और कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन पर चर्चा हुई।
बैठक सिर्फ खेत में उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रही। कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन और किसानों को अधिक लाभ दिलाने के तरीकों पर भी विचार किया गया।
कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ने के बाद सबसे बड़ी चुनौती किसानों को उचित बाजार और बेहतर मूल्य दिलाने की होती है। ऐसे में दोनों पक्षों ने कृषि उत्पादों की मार्केटिंग, तकनीकी सहयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
इससे साफ है कि सरकार कृषि को केवल उत्पादन का विषय न मानकर उसे तकनीक, प्रसंस्करण, बाजार और ग्रामीण विकास से जोड़ने पर जोर दे रही है।

नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के अलावा कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बुधवार को कृषि भवन के सभागार में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के कार्यों की समीक्षा भी की।
समीक्षा के दौरान परिषद को पिछले वर्ष आवंटित बजट के उपयोग और विभिन्न कार्यों की प्रगति की जानकारी ली गई। अनुसंधान और फसलों की नई प्रजातियों के विकास में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर कृषि मंत्री ने नाराजगी व्यक्त की और काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।
यानी सरकार एक तरफ वैश्विक सहयोग की संभावनाएं तलाश रही है, तो दूसरी तरफ प्रदेश के भीतर कृषि अनुसंधान व्यवस्था के परिणामों को लेकर भी अधिकारियों से जवाबदेही की अपेक्षा की जा रही है।
बैठक में खाद, बीज और कीटनाशक व्यापारियों के साथ कृषि आदान व्यापार की व्यावहारिक समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
कृषि मंत्री ने व्यापारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि किसानों के साथ ओवर रेटिंग और टैगिंग जैसी गतिविधियां किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
साथ ही व्यापारियों को भरोसा दिया गया कि कारोबार के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक और तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी।
सरकार का उद्देश्य बताया गया कि किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक निर्धारित व्यवस्था के तहत आसानी से उपलब्ध हों और उन्हें अनावश्यक आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े।
कृषि मंत्री ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के 'इनोवेशन हब यूपी' के प्रस्तुतीकरण का भी अवलोकन किया।
उन्होंने कहा कि किसानों के हित में बनाई जाने वाली प्रत्येक योजना का वास्तविक लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने प्रस्तुतीकरण की दोबारा गहन समीक्षा करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश को ग्लोबल एग्री हब बनाने की दिशा में प्रस्तावित 'यूपी कृषि महाकुंभ-2026' से संबंधित प्रस्तुतीकरण भी देखा गया।
नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल में राज्य मंत्री सीनेटर डॉ. अलीयू साबी अब्दुल्लाही के साथ मोहम्मद इहिएज़ुए अब्दुलमुतालिब, बोलुवाडे एबेनेज़र ओलामिडे, इंजीनियर अमीनू बोडिंगा मोहम्मद, डॉ. एडेट एकाँग, श्रीमती इलुरोमी डेबोला, गालान्ती मलामी मोहम्मद, अदुनमो रूफस संडे, डॉ. जिब्रिल शान्ताली मोहम्मद और इंजीनियर शैलेन्द्र कुमार झा शामिल रहे।
बैठक में प्रमुख सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, प्रमुख सचिव सहकारिता अजय कुमार शुक्ला, महानिदेशक उपकार संजय सिंह, निदेशक कृषि टीएम त्रिपाठी, निदेशक उद्यान भानु प्रकाश राम त्रिपाठी सहित कृषि, उद्यान और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश और नाइजीरिया के बीच हुई यह बातचीत कृषि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए रास्ते खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। लेकिन इस पूरी कवायद की असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब तकनीक और नवाचार की बातें कागजों से निकलकर खेतों, मंडियों और किसानों की आय तक पहुंचें।
एक तरफ नाइजीरिया ने अपने अनुभव साझा किए, दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश ने अपने कृषि मॉडल और नवाचारों की जानकारी दी। अब नजर इस बात पर होगी कि इन चर्चाओं से भविष्य में कौन से ठोस सहयोग सामने आते हैं और उत्तर प्रदेश के किसानों को इसका कितना प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
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