Monday, June 08, 2026

GST घोटाले का बड़ा खुलासा! करोड़ों की टैक्स चोरी करने वाले 50-50 हजार के इनामी मास्टरमाइंड दिल्ली से गिरफ्तार

फर्जी फर्में, नकली इनवॉइस और बोगस ई-वे बिल के जरिए करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी का आरोप, यूपी STF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो इनामी आरोपी दबोचे गए

Bahrampur , Latest Updated On - Jun 02 2026 | 17:20:00 PM
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उत्तर प्रदेश एसटीएफ और संतकबीर नगर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। विभिन्न राज्यों और यूपी के कई जिलों में फर्जी फर्मों का नेटवर्क खड़ा कर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले 50-50 हजार रुपये के इनामी दो आरोपियों को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है।

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देशभर में टैक्स चोरी और फर्जी कारोबारी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के बीच उत्तर प्रदेश एसटीएफ और संतकबीर नगर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि यह गिरोह विभिन्न राज्यों और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराकर नकली इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार करता था तथा इनके माध्यम से करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहा था।

इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे और 50-50 हजार रुपये के इनामी घोषित दो आरोपियों को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सौरभ अग्रवाल और अजीत कुमार के रूप में हुई है।

दिल्ली के हरिनगर इलाके से हुई गिरफ्तारी

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि दोनों वांछित आरोपी पश्चिमी दिल्ली के हरिनगर क्षेत्र में मौजूद हैं। सूचना मिलते ही पुलिस उपाधीक्षक प्रमोद कुमार शुक्ल के पर्यवेक्षण में निरीक्षक शैलेन्द्र कुमार के नेतृत्व में गठित टीम सक्रिय हुई।

टीम में उपनिरीक्षक मुनेन्द्र सिंह, वीर प्रताप, अजीत सिंह और चालक सुरेश कुमार शामिल थे। सूचना की पुष्टि होने के बाद एसटीएफ टीम ने संबंधित विवेचक के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को हरिनगर थाना क्षेत्र स्थित मोहल्ला ब्लॉक टावर से गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी 1 जून 2026 को शाम करीब 6:30 बजे की गई। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

गिरफ्तार आरोपी सौरभ अग्रवाल नई दिल्ली के द्वारका सेक्टर-18 स्थित समृद्धि अपार्टमेंट का निवासी है। वहीं दूसरा आरोपी अजीत कुमार कलेणापुरी एक्सटेंशन, नई दिल्ली का रहने वाला है।

दोनों आरोपी संतकबीर नगर के कोतवाली खलीलाबाद में दर्ज मुकदमा संख्या 577/2025 में वांछित थे। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट तथा जीएसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

इस मामले का खुलासा पहली बार 12 फरवरी 2026 को हुआ था, जब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो अन्य आरोपियों संदीप कुमार और अमन उपाध्याय को गिरफ्तार किया था। हालांकि उस समय सौरभ अग्रवाल, अजीत कुमार और उनके दो अन्य सहयोगी फरार हो गए थे।

फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। इसके बाद एसटीएफ लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई थी।

कैसे चलता था फर्जी GST नेटवर्क?

पूछताछ में आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों आरोपी नई दिल्ली में अकाउंटेंसी और टैक्स संबंधी कार्य करते थे। इसी आड़ में उन्होंने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर एक संगठित नेटवर्क तैयार किया था।

यह गिरोह सबसे पहले फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराता था। इसके बाद इन फर्मों के नाम पर बिना किसी वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के फर्जी सेल्स इनवॉइस तैयार किए जाते थे।

इन नकली बिलों के आधार पर बोगस ई-वे बिल जनरेट कर उन्हें जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किया जाता था। इसके बाद फर्जी जीएसटीआर-1 रिटर्न दाखिल कर वास्तविक फर्मों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ दिलाया जाता था।

बैंक खातों के जरिए दिया जाता था वैध लेन-देन का रूप

जांच में सामने आया है कि फर्जी लेन-देन को वास्तविक दिखाने के लिए गिरोह बैंक खातों का भी इस्तेमाल करता था। बोगस इनवॉइस में दर्ज रकम को बैंकिंग चैनल के माध्यम से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर दिखाया जाता था।

इसके बाद यह रकम नकद निकासी, सर्कुलर ट्रेडिंग या अन्य फर्जी फर्मों के माध्यम से वापस संबंधित पक्षों तक पहुंचा दी जाती थी। इससे पूरा लेन-देन कागजों पर वैध दिखाई देता था, जबकि वास्तविक व्यापारिक गतिविधि का कोई अस्तित्व नहीं होता था।

लॉगिन आईडी और पासवर्ड भी रखते थे अपने पास

पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों के पास विभिन्न फर्मों की लॉगिन आईडी, पासवर्ड और ओटीपी तक की पहुंच थी। इसी आधार पर वे जीएसटी पोर्टल पर रिटर्न फाइल करने, ई-वे बिल बनाने और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाओं को संचालित करते थे।

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क के जरिए दिल्ली समेत कई राज्यों और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्जनों फर्जी फर्में संचालित की जा रही थीं।

करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका

प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क ने फर्जी इनवॉइसिंग और सर्कुलर ट्रेडिंग के माध्यम से करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की है। इससे केंद्र और राज्य सरकार को भारी राजस्व क्षति पहुंची है।

जीएसटी विभाग पहले ही ऐसे मामलों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई मुकदमे दर्ज करा चुका है। इसी क्रम में एसटीएफ को तकनीकी और ऑपरेशनल सहयोग प्रदान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

आगे की जांच जारी

गिरफ्तार दोनों आरोपियों को पश्चिमी दिल्ली के हरिनगर थाने में दाखिल किया गया है। अब संबंधित मामले के विवेचक द्वारा आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा अब तक कितनी फर्जी फर्मों के माध्यम से टैक्स चोरी को अंजाम दिया गया।

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