उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने लखनऊ में अवैध हथियारों की तस्करी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दुर्गेश पाण्डेय उर्फ विशु के कब्जे से तीन अवैध .32 बोर पिस्टल और एक बैग बरामद हुआ। पूछताछ में उसने मध्य प्रदेश और बिहार से हथियार खरीदकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बेचने की बात बताई। मामले में आगे की जांच स्थानीय पुलिस कर रही है।
उत्तर प्रदेश में अवैध हथियारों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए चल रही कार्रवाई के बीच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को लखनऊ में अहम सफलता मिली है। एसटीएफ ने 18 अक्टूबर 2026 की रात कमिश्नरेट लखनऊ के विभूतिखंड थाना क्षेत्र से कथित अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया। आरोपी के पास से तीन अवैध .32 बोर पिस्टल और एक बैग बरामद किया गया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान दुर्गेश पाण्डेय उर्फ विशु के रूप में हुई है। वह प्रतापगढ़ जिले के संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के दुर्गीराम का पुरवा, कोटा भवानीगंज का निवासी बताया गया है।
एसटीएफ के अनुसार, यह कार्रवाई अवैध असलहों की खरीद-फरोख्त से जुड़े गिरोह के बारे में मिली खुफिया सूचना के आधार पर की गई। अब पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि आरोपी के साथ इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है और हथियारों की सप्लाई किन रास्तों से की जा रही थी।
सहारा बाजार के पीछे, वेव मॉल के पास हुई गिरफ्तारी
एसटीएफ की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, आरोपी को 18 अक्टूबर 2026 को रात करीब 9 बजकर 25 मिनट पर गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई विभूतिखंड थाना क्षेत्र में सहारा बाजार के पीछे, बेहनन का पुरवा और वेव मॉल के पास की गई।
पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के सक्रिय होने की सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद एसटीएफ की अलग-अलग इकाइयों और टीमों को खुफिया जानकारी जुटाने तथा आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।
पुलिस उपाधीक्षक धर्मेश कुमार शाही के पर्यवेक्षण में एसटीएफ मुख्यालय, लखनऊ की टीम इस नेटवर्क से जुड़ी सूचनाएं जुटा रही थी। इसी क्रम में 18 अक्टूबर को निरीक्षक राघवेन्द्र सिंह, उपनिरीक्षक अतुल चतुर्वेदी, उपनिरीक्षक देवेन्द्र पाल सिंह, हेड कांस्टेबल नीरज पाण्डेय, रामनिवास शुक्ला, राजीव कुमार और श्रीराम सिंह की टीम कमिश्नरेट लखनऊ क्षेत्र में सक्रिय थी।
इसी दौरान टीम को सूचना मिली कि एक व्यक्ति अवैध असलहा बेचने के लिए लखनऊ आया है और उसके पास हथियार मौजूद हैं। सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से तीन अवैध पिस्टल और एक बैग बरामद हुआ।
मध्य प्रदेश और बिहार से हथियार खरीदने का दावा
एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दुर्गेश पाण्डेय उर्फ विशु ने कथित तौर पर बताया कि वह अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक संगठित गिरोह से जुड़ा है। उसके अनुसार, गिरोह में उसके कई अन्य मित्र भी शामिल हैं।
आरोपी ने पूछताछ में दावा किया कि गिरोह के सदस्य पहले भी मध्य प्रदेश और बिहार से अवैध पिस्टल खरीदकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर जिलों में बेच चुके हैं।
यह जानकारी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे हथियारों की खरीद और बिक्री के कथित नेटवर्क का दायरा एक से अधिक राज्यों तक पहुंचने की आशंका सामने आती है। हालांकि, गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान, हथियारों के वास्तविक स्रोत और पहले हुई कथित तस्करी की घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
₹30-40 हजार में खरीद, ₹80 हजार से ₹1 लाख तक बिक्री
एसटीएफ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में हथियारों की खरीद और बिक्री की कीमतों के बारे में भी बताया। उसके कथित बयान के मुताबिक, गिरोह के सदस्य एक पिस्टल को करीब 30 हजार से 40 हजार रुपये में खरीदते थे और उसे 80 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक में बेच देते थे।
यदि पूछताछ में बताए गए इन दामों की पुष्टि होती है, तो यह अवैध हथियारों के कारोबार में बड़े मुनाफे की ओर इशारा करता है। हालांकि, बरामद तीनों पिस्टलों की खरीद का वास्तविक मूल्य, संभावित खरीदारों और बिक्री से जुड़े लेन-देन का विवरण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुट सकती है कि बरामद हथियार किस स्रोत से लाए गए थे, आरोपी इन्हें किसे बेचने वाला था और क्या इस नेटवर्क के जरिए पहले भी अन्य लोगों तक अवैध हथियार पहुंचाए गए हैं।
आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज, आगे की जांच स्थानीय पुलिस करेगी
गिरफ्तारी के बाद दुर्गेश पाण्डेय उर्फ विशु के खिलाफ थाना विभूतिखंड, कमिश्नरेट लखनऊ में मुकदमा अपराध संख्या 411/2026 दर्ज किया गया है। एसटीएफ की जानकारी के अनुसार, उसके विरुद्ध आर्म्स एक्ट की धारा 3/5/25 के तहत मामला पंजीकृत किया गया है।
एसटीएफ ने आरोपी को गिरफ्तार कर बरामदगी की कार्रवाई की है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जाएगी।
फिलहाल जांच का सबसे अहम पहलू यह है कि क्या गिरफ्तार आरोपी के जरिए कथित अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सकेगा। साथ ही, पुलिस के सामने हथियारों के स्रोत, सप्लाई नेटवर्क और संभावित खरीदारों की पहचान करने की चुनौती भी है।
तीन अवैध पिस्टलों की बरामदगी के बाद अब निगाहें जांच के अगले चरण पर हैं। यदि पूछताछ और अन्य साक्ष्यों से गिरोह के बाकी सदस्यों की भूमिका सामने आती है, तो इस कार्रवाई से हथियारों की कथित तस्करी के नेटवर्क की अन्य कड़ियां भी उजागर हो सकती हैं।
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