उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने सीतापुर में 19 वर्षों से फरार चल रहे 50 हजार रुपये के इनामी अपराधी रामू को गिरफ्तार किया है। वह थाना संदना में वर्ष 2007 में दर्ज बस डकैती के मुकदमे में वांछित था। एसटीएफ के मुताबिक आरोपी पंजाब में छिपकर रह रहा था और अपनी बहन से मिलने सीतापुर आया था। सूचना मिलने पर टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ घेराबंदी कर 23 सितंबर 2026 की रात उसे ग्राम मानपुर मजरा, धवरपारा में सरायन नदी पुल के पास से गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ सीतापुर जिले के अलग-अलग थानों में हथियार, अपहरण, चोरी, डकैती और गैंगस्टर एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज हैं।
करीब दो दशक पहले दर्ज हुई एक डकैती का मामला एक बार फिर चर्चा में है। वजह है उस मामले का एक ऐसा आरोपी, जो पुलिस की पकड़ से करीब 19 वर्षों तक दूर रहा। लेकिन 23 सितंबर 2026 की देर रात उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने सीतापुर में कार्रवाई करते हुए 50 हजार रुपये के इनामी और वांछित अपराधी रामू को गिरफ्तार कर लिया।
एसटीएफ के मुताबिक रामू थाना संदना, जनपद सीतापुर में दर्ज मुकदमा संख्या 662/2007, जिसमें धारा 395, 397, 427 और 412 आईपीसी लगाई गई थी, में वांछित था। इस मामले में उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
बहन से मिलने आया था सीतापुर, STF ने दबोचा
एसटीएफ के अनुसार फरार और इनामी अपराधियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। इसी अभियान के तहत लखनऊ एसटीएफ की एक टीम विभिन्न राज्यों में अभिसूचना जुटा रही थी।
श्री संजीव कुमार दीक्षित, अपर पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ लखनऊ के पर्यवेक्षण में चल रही कार्रवाई के दौरान उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी सरोज कुमार अवस्थी, मुख्य आरक्षी मुकेश प्रजापति और चालक राकेश कुमार मिश्र की टीम हरियाणा, पंजाब और एनसीआर क्षेत्र में सक्रिय थी।
इसी दौरान टीम को सूचना मिली कि संदना थाने के पुराने डकैती मामले में वांछित और 50 हजार रुपये का इनामी रामू पंजाब से सीतापुर आया हुआ है और अपनी बहन से मिलने वाला है।
सूचना मिलते ही एसटीएफ टीम सीतापुर पहुंची और स्थानीय पुलिस को साथ लेकर बताए गए स्थान पर पहुंची। घेराबंदी के बाद 23 सितंबर 2026 की रात करीब 11:10 बजे, ग्राम मानपुर मजरा, धवरपारा, सरायन नदी पुल के पास, थाना संदना क्षेत्र से रामू को गिरफ्तार कर लिया गया।
2007 की बस डकैती में था वांछित
एसटीएफ की पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह ग्राम भानपुर, थाना कमलापुर, जनपद सीतापुर का मूल निवासी है और कमलापुर थाने का हिस्ट्रीशीटर है।
एसटीएफ के मुताबिक पूछताछ में उसने यह भी बताया कि वह साथियों के साथ मिलकर लूट, डकैती और चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था।
वर्ष 2007 की जिस घटना में वह वांछित था, उसके संबंध में एसटीएफ के अनुसार रामू ने अपने साथियों झब्बू उर्फ जलजला, सहरू, मुरली उर्फ शेरा, काशीराम, देशराज और चैना उर्फ उमाशंकर के साथ मिलकर भरौना चौराहे के पास एक बस को रोककर यात्रियों के साथ मारपीट और लूटपाट की थी। अधिकारियों के अनुसार इस घटना में एक व्यक्ति की मौत भी हुई थी।
मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार होकर पंजाब चला गया और वहीं छिपकर रहने लगा। करीब 19 साल तक पुलिस की गिरफ्त से दूर रहने के बाद आखिरकार अब उसे सीतापुर में दबोच लिया गया।
पुराने मामलों ने भी खोली अपराध की लंबी फेहरिस्त
रामू के खिलाफ सिर्फ एक ही मुकदमा नहीं है। एसटीएफ द्वारा जारी आपराधिक इतिहास के अनुसार उसके खिलाफ सीतापुर के अलग-अलग थानों में कई मामले दर्ज हैं।
उसके खिलाफ बिसवां थाने में आर्म्स एक्ट, कमलापुर में धारा 364, 457, 380 तथा 379, 411, मानपुर में धारा 458, और फिर कमलापुर में आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज बताए गए हैं।
इसके अलावा संदना थाने में 2007 का डकैती का मुकदमा और 2008 में धारा 2/3 उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला भी दर्ज है।
आपराधिक इतिहास के अनुसार वर्ष 2003 से 2008 के बीच उसके खिलाफ कुल आठ मुकदमों का रिकॉर्ड सामने आया है।
गिरफ्तारी के बाद आगे की कार्रवाई
एसटीएफ ने गिरफ्तार आरोपी को थाना संदना, जनपद सीतापुर में दर्ज मुकदमा संख्या 662/2007 में दाखिल कर दिया है। अब आगे की वैधानिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।
करीब दो दशक तक लंबित रहे इस मामले में रामू की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक अहम कार्रवाई मानी जा रही है। हालांकि 2007 की घटना और पूछताछ में सामने आए अन्य आरोपों का अंतिम निर्धारण संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।
फिलहाल 23 सितंबर की रात की वह कार्रवाई एक ऐसे आरोपी की फरारी का अंत लेकर आई, जिसकी तलाश करीब 19 वर्षों से जारी थी। पंजाब में छिपकर रहने के बाद बहन से मिलने सीतापुर पहुंचना आखिरकार उसके लिए पुलिस तक पहुंचने की कड़ी बन गया।
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