दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर टीम ने बैंक अधिकारियों को कंपनी के डायरेक्टर की पहचान बताकर धोखा देने वाले कथित गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब ₹2.50 करोड़ की संपत्ति बरामद की है। मामले में ₹22.56 लाख के फर्जी RTGS ट्रांसफर, पश्चिम बंगाल से जुड़े म्यूल बैंक खातों और इसी तरह के छह अन्य मामलों का खुलासा हुआ है।
बैंक में करोड़ों रुपये के लेनदेन की बात करने वाला व्यक्ति असली कंपनी डायरेक्टर नहीं, बल्कि कथित तौर पर एक जालसाज था। पहले ₹1 करोड़ की एफडी की चर्चा, फिर ब्याज दरों पर बातचीत और उसके बाद कंपनी की चेकबुक खत्म होने का बहाना बनाकर ईमेल से भुगतान का अनुरोध—इसी तरीके से बैंक अधिकारियों का भरोसा जीतकर ₹22,56,922 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिए गए। अब दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार करने और करीब ₹2.50 करोड़ की संपत्ति बरामद करने का दावा किया है।
दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर थाने की टीम के अनुसार, यह मामला बैंक ऑफ इंडिया की राजेंद्र प्लेस, नई दिल्ली शाखा के मैनेजर की शिकायत पर सामने आया। पुलिस ने इस संबंध में ई-एफआईआर संख्या 0228/2026, दिनांक 5 अगस्त 2026, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319 और 340 के तहत दर्ज की।
ऐसे दिया बैंक अधिकारियों को धोखा
पुलिस के मुताबिक, 5 अगस्त 2026 को बैंक अधिकारी को फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को कई कॉर्पोरेट संस्थाओं से जुड़े डायरेक्टर दीपक मल्होत्रा के रूप में पेश किया। शुरुआत में उसने ₹1 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) बनवाने की बात की और फिर दूसरे बैंकों में ज्यादा ब्याज मिलने का हवाला देकर ब्याज दरों पर चर्चा की, ताकि बातचीत वास्तविक लगे।
कुछ समय बाद उसने कंपनी खाते से भुगतान करने की जरूरत बताई और दावा किया कि कंपनी की चेकबुक खत्म हो गई है। इसके बाद उसने ईमेल के जरिए ट्रांजैक्शन करने का अनुरोध किया। बैंक के आधिकारिक ईमेल पर कंपनी के पंजीकृत ईमेल पते से मिलता-जुलता फर्जी ईमेल भेजा गया। इसमें कंपनी के लेटरहेड पर ₹22,56,922 दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश था।

जब बैंक अधिकारियों ने अनिवार्य क्षतिपूर्ति दस्तावेज (इंडेम्निटी) मांगे, तो कथित जालसाज ने पहले भी ऐसे लेनदेन होने और भुगतान तत्काल करने की जरूरत बताकर दबाव बनाया। पुलिस के अनुसार, इसी फर्जी निर्देश पर RTGS ट्रांसफर कर दिया गया।
तकनीकी जांच के बाद दो आरोपी गिरफ्तार
जांच में पता चला कि रकम पश्चिम बंगाल में बंधन बैंक के एक कथित म्यूल खाते में भेजी गई थी। फोन नंबर और ईमेल से जुड़े तकनीकी विवरण फर्जी पहचान से जुड़े मिले, जिससे आरोपियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था।
पुलिस के अनुसार, एसआई कमलेश कुमार के नेतृत्व में एएसआई पंकज यादव, हेड कांस्टेबल मनवीर सिंह, हेड कांस्टेबल शमीम, कांस्टेबल नितिन, महिला हेड कांस्टेबल सुनीता और महिला कांस्टेबल ललिता की टीम ने तकनीकी रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, संचार विवरण और आरोपियों की गतिविधियों का विश्लेषण किया। जांच एसएचओ साइबर थाना योगराज दलाल की निगरानी और एसीपी करोल बाग शिवम कुमार के पर्यवेक्षण में की गई।
इसके बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया:
विनय कुमार यादव, उम्र 36 वर्ष, निवासी लोनी, गाजियाबाद।
अनिल कुमार सहगल, उम्र 65 वर्ष, निवासी नोएडा।
पुलिस का कहना है कि जांच में पश्चिम बंगाल और बिहार में सक्रिय कथित सहयोगियों के संबंध भी सामने आए हैं।
फर्जी ईमेल, म्यूल खाते और सोना खरीदने का तरीका
जांच के अनुसार, गिरोह का तरीका आम साइबर ठगी से अलग था। इसमें सीधे आम नागरिकों को निशाना बनाने के बजाय बैंक कर्मचारियों को कंपनी के डायरेक्टर की पहचान बताकर फंड ट्रांसफर के लिए राजी किया जाता था। फर्जी कंपनी लेटरहेड, मिलते-जुलते ईमेल पते, सोशल इंजीनियरिंग और म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, रकम खाते में पहुंचने के बाद उसे दूसरे रूप में बदलने की कोशिश की गई। पश्चिम बंगाल के एक ज्वेलर से कथित तौर पर ₹18.50 लाख का सोना ऑनलाइन खरीदा गया और रकम निकालने के लिए एटीएम से नकद निकासी भी की गई।
₹2.50 करोड़ की संपत्ति बरामद, थार रॉक्स भी शामिल
पुलिस ने वर्तमान और संबंधित मामलों से जुड़ी करीब ₹2.50 करोड़ की संपत्ति बरामद करने की जानकारी दी है। इसमें लगभग 1,500 ग्राम सोना, तीन मोबाइल फोन, ₹2,37,000 नकद और अगस्त 2026 में खरीदी गई नई महिंद्रा थार रॉक्स शामिल है।

बरामद सामान में 101 सोने के सिक्के शामिल हैं, जिनका कुल वजन लगभग 924 ग्राम बताया गया है। इसके अलावा 17 सोने की चेन, कुल नौ सोने के कड़े/ब्रेसलेट—आठ पुरुषों के कड़े और एक चेन ब्रेसलेट—तीन सोने के हार, तीन अंगूठियां, तीन जोड़ी यानी छह बालियां, एक नोज रिंग और एक सोने का टीका बरामद किया गया है। पुलिस इन संपत्तियों का मौजूदा और संबंधित मामलों से संबंध जांच रही है।
सात साल से फरार घोषित अपराधी होने का दावा
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले भी विभिन्न स्थानों पर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज रहे हैं। बताया गया कि दोनों की पहचान जेल में हुई थी और वे कथित तौर पर ‘मैजिक पेन’ के जरिए चेक संबंधी धोखाधड़ी से भी जुड़े रहे हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, विनय यादव को 8 अगस्त 2019 से घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) बताया गया है और वह सात साल से अधिक समय से फरार था। वर्ष 2009 में कमला मार्केट थाने के एक जाली मुद्रा मामले में उसकी गिरफ्तारी का भी उल्लेख है, जिसमें कथित तौर पर ₹4,500 की नकली मुद्रा बरामद हुई थी।
विनय यादव के बताए गए पुराने मामले: कोतवाली गाजियाबाद के FIR 1020/2018 (धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश), FIR 1374/2018 (हत्या के प्रयास), FIR 1376/2018 (आर्म्स एक्ट), FIR 802/2020 और 845/2020 (धोखाधड़ी और जालसाजी), सहारनपुर के सीओ सदर थाने का FIR 05/2021, लोनी कोतवाली के FIR 1713/2014 (दंगा और हत्या) तथा FIR 2170/2014 (आर्म्स एक्ट), और कमला मार्केट का FIR 113/2009 (जाली मुद्रा) शामिल हैं।
अनिल सहगल के बताए गए पुराने मामले: साइबर क्राइम एनआईटी फरीदाबाद का FIR 20/2022, अयोध्या कोतवाली का FIR 528/2018, कवि नगर गाजियाबाद का FIR 1165/2015, लिंक रोड गाजियाबाद का FIR 118/2025 और सहारनपुर साइबर क्राइम थाने का FIR 05/2021 शामिल हैं। इन मामलों में आईटी एक्ट और धोखाधड़ी-जालसाजी से संबंधित धाराओं का उल्लेख है।
छह अन्य मामलों से भी जुड़े तार
पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद समान तरीके से बैंक अधिकारियों को धोखा देकर म्यूल खातों में रकम ट्रांसफर कराने वाले छह अन्य मामलों का खुलासा करने का दावा किया है:
गुरुग्राम साइबर साउथ, FIR 134/2026, दिनांक 21 मई 2026: ICICI बैंक से जुड़े ₹2.98 करोड़।
पलवल कैंप, FIR 342/2026, दिनांक 28 जुलाई 2026: बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े ₹1.30 करोड़।
गुरुग्राम साइबर क्राइम, FIR 176/2026, दिनांक 19 मई 2026: ICICI बैंक से जुड़े ₹52.35 लाख।
साउथ-ईस्ट जिला साइबर थाना, FIR 55/2026, दिनांक 28 जनवरी 2026: ICICI बैंक से जुड़े ₹20.50 लाख।
रोहिणी साइबर थाना, FIR 341/2026, दिनांक 21 अगस्त 2026: ICICI बैंक से जुड़े ₹16.65 लाख।
रोहिणी साइबर थाना, FIR 30/2026, दिनांक 16 अक्टूबर 2026: केनरा बैंक से जुड़े ₹88 लाख की कथित कोशिश।
बैंकों और कंपनियों के लिए पुलिस की सलाह
पुलिस ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को उच्च-मूल्य वाले लेनदेन में निर्धारित SOP का पालन करने, जल्दबाजी वाले भुगतान अनुरोधों को बैंक रिकॉर्ड में दर्ज अधिकृत मोबाइल नंबर पर स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने और दबाव में अनिवार्य दस्तावेजों या इंडेम्निटी की शर्तों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है। कॉर्पोरेट खातों के बड़े ट्रांसफर में ईमेल सत्यापन और अतिरिक्त प्राधिकरण व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
संदिग्ध ट्रांजैक्शन या किसी की पहचान बनाकर की गई धोखाधड़ी की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर देने की अपील की गई है।
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